PNB — सब स्टाफ से क्लर्क प्रमोशन
बैंकिंग ज्ञान — संपूर्ण हिंदी नोट्स (भाग 2)
(Banking Knowledge — Complete Hindi Study Notes, Part 2)
अध्याय 6 से 10 तक
KYC, AML (PMLA) & FATCA • Financial Inclusion • SHG, JLG, NRLM & NULM
Government Business (Small Savings Schemes) • Safe Deposit Lockers
नोट: महत्वपूर्ण शब्दों व नियमों के आगे अंग्रेज़ी शब्द/अर्थ कोष्ठक में दिए गए हैं ताकि परीक्षा में दोनों भाषा में समझ बनी रहे। यह भाग 1 (अध्याय 1-5) की अगली कड़ी है।
विषय-सूची (Index)
अध्याय 6 KYC, AML (PMLA) व FATCA
Customer/Beneficial Owner परिभाषा, CIP-6 OVD, CDD के 3 स्तर, Risk Categorization, PEP, Shell Bank, PMLA Act 2002, Money Laundering के 3 चरण, CKYCR
अध्याय 7 वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion)
BSBDA नियम, LBS, PMJDY, RSETI, BC Model, USSD (*99#), AePS, Unauthorized Transaction Liability, Compensation Rules
अध्याय 8 SHG, JLG, NRLM व NULM
SHG की उत्पत्ति, Panchsutra, DAY-NRLM, Loan Doses, MCP, Interest Subvention, JLG, NULM
अध्याय 9 सरकारी व्यवसाय (Government Business — Small Savings Schemes)
PPF, SSA, SCSS, Sovereign Gold Bonds, MSSC, Agency Commission, Pension Disbursement, Gold Monetization Scheme
अध्याय 10 सुरक्षित जमा लॉकर (Safe Deposit Lockers)
Locker Nomination, Operation Rules, Break Open, Claims Settlement, New Amendments, Surrender Process
अध्याय 6: KYC, AML (PMLA), FATCA
KYC — महत्वपूर्ण परिभाषाएं (RBI Master Direction)
Customer — I. वह व्यक्ति/इकाई जिसका बैंक से खाता/व्यावसायिक संबंध है (walk-in customer सहित)। II. वह जिसकी ओर से खाता है (Beneficial Owner)।
Beneficial Owner — वह प्राकृतिक व्यक्ति जो अंततः client को नियंत्रित/स्वामित्व रखता है, या जिसकी ओर से लेनदेन हो रहा है — इसमें ऐसा व्यक्ति भी शामिल है जो किसी juridical person पर अंतिम प्रभावी नियंत्रण रखता है।
Walk-in Customer — वह व्यक्ति जिसका बैंक में खाता आधारित संबंध नहीं है, परन्तु बैंक के साथ लेनदेन करता है।
FATCA (Foreign Account Tax Compliance Act, USA) — विदेशी वित्तीय संस्थाओं को US taxpayers या US taxpayer की substantial हिस्सेदारी वाली विदेशी entities के खातों की रिपोर्ट देनी होती है।
पहचान व पते संबंधी रिकॉर्ड — खाता खोलते समय व व्यावसायिक संबंध के दौरान प्राप्त — संबंध समाप्त होने के बाद कम से कम 5 वर्ष तक सुरक्षित रखने होंगे।
Customer Identification Procedure (CIP) — 6 OVD
RBI द्वारा मान्य Officially Valid Document (OVD) — ① Voter ID Card (www.nvsp.in से सत्यापन) ② Passport ③ Driving License ④ NREGA Job Card ⑤ National Population Register द्वारा जारी पत्र ⑥ Aadhaar
अनिवार्य दस्तावेज़ — PAN या Form 60 (यथा लागू) अनिवार्य है। PAN — 10-अक्षरों का alphanumeric कोड।
Form 60 — यह घोषणा कि ग्राहक income tax assessee नहीं है (₹50,000 व अधिक की उच्च-मूल्य नकद जमा पर)। Form 61 — कृषि आय वाले व्यक्तियों हेतु।
सीमित उपयोग हेतु (छोटे खातों में सही पते के प्रमाण हेतु) — टेलीफोन बिल, bank account statement, recognised authority का letter, बिजली बिल, राशन कार्ड, employer letter — जो किसी भी service provider का 2 महीने से अधिक पुराना न हो।
ग्राहक को current address का OVD दस्तावेज़ जमा करने की तिथि से 3 महीने के भीतर जमा करना होगा।
पते में परिवर्तन होने पर 2 महीने के भीतर सकारात्मक पुष्टि (positive confirmation) — जैसे address verification letter, contact point verification, deliverables आदि।
OTP आधारित खाता
ग्राहक के सभी deposit खातों का कुल बैलेंस ₹1 लाख से अधिक नहीं होना चाहिए।
एक वित्तीय वर्ष में सभी खातों के कुल credit ₹2 लाख से अधिक नहीं होने चाहिए।
OTP आधारित खाते में केवल Term Loan ही अधिकतम ₹60,000 तक स्वीकृत किया जा सकता है।
Customer Due Diligence (CDD) — 3 स्तर
"Customer Due Diligence (CDD)" का अर्थ है ग्राहक व beneficial owner की पहचान करना व सत्यापित करना।
1) Simplified Due Diligence (SDD) — जहाँ money laundering/terrorist funding का जोखिम कम हो व पूर्ण CDD आवश्यक न हो — जैसे low-value accounts, SHG के खाते, विदेशी छात्रों के खाते आदि।
2) Basic Customer Due Diligence (CDD) — सभी ग्राहकों की पहचान सत्यापित करने व जोखिम आंकने हेतु प्राप्त जानकारी।
3) Enhanced Due Diligence (EDD) — उच्च-जोखिम ग्राहकों हेतु अतिरिक्त जानकारी — जैसे non-face-to-face customer accounts, PEP accounts, Money Mule accounts, professional intermediaries (Mutual Funds, Pension Funds) द्वारा खोले गए client accounts।
याद रखें — RE (Regulated Entity) व ग्राहक के बीच सभी घरेलू व अंतरराष्ट्रीय लेनदेन के रिकॉर्ड, लेनदेन की तिथि से कम से कम 5 वर्ष तक सुरक्षित रखने आवश्यक हैं।
Risk Management — Periodic KYC Updation
Customer Identification status व लेनदेन की निरंतर निगरानी हेतु समय-समय पर KYC updation आवश्यक — एक risk-based approach अपनाया गया है —
Low Risk — कम से कम हर 10 वर्ष में एक बार।
Medium Risk — कम से कम हर 8 वर्ष में एक बार।
High Risk — कम से कम हर 2 वर्ष में एक बार।
Risk Categorization के मापदंड — ग्राहक की पहचान, सामाजिक/वित्तीय स्थिति, व्यवसाय की प्रकृति, ग्राहक के व्यवसाय व स्थान की जानकारी, भौगोलिक जोखिम, प्रयुक्त products/services का प्रकार, delivery channel, लेनदेन का प्रकार (नकद, चेक, wire transfer, forex आदि)।
व्यक्तियों के मामले में CBS system, 5 मापदंडों (Constitution Code, Customer Type-Retail, Profession Codes, Residential Status, High-Risk Indicators) में से जो भी सबसे अधिक जोखिम दिखाए, वह ग्राहक को assign करता है।
Risk Categorization — Constitution Codes अनुसार
High Risk — Co-op Society, Association, Recreational Clubs, Trusts, Pvt Ltd Companies, Pvt Ltd Co Sub Listed Stock, Personal, Security Personnel outside India।
Low Risk — State Govt, Local Govt Bodies (Rural/Urban), Govt Educational Institutions, Central Govt, Self Help Group, Farmer, Ex-serviceman-Defence Personnel, Jal Nigam, Mid Day Meal, Panchayat, Railway, State Warehousing Corp, Pensioner, Salary/Wage Class, Scholarship Holder, Indian Commercial Banks-Govt आदि।
Medium Risk — Indian Commercial Banks-Private, Financial Services Company, Mutual Funds-Public Sector, Microfinance Institutions, NBFC, States Police, Stock Brokers, Trader/Business (Bullion Dealers/Jewellers इसी में) आदि।
व्यवसाय आधारित — Partnership, HUF, Proprietorship, Blind/Dumb/Deaf (profession के आधार पर)।
विदेशी छात्रों (Foreign Students) का खाता खोलना
बैंक विदेशी छात्र का NRO account पासपोर्ट (visa व immigration endorsement सहित, गृह देश में पहचान व पता, फोटो व शिक्षण संस्थान का admission letter) के आधार पर खोल सकता है।
खाता खोलने के 30 दिन के भीतर स्थानीय पते की घोषणा प्राप्त व सत्यापित करनी होगी।
पता सत्यापन लंबित रहने तक — 30-दिन की अवधि में विदेशी remittance USD 1,000 से अधिक नहीं, तथा कुल जमा ₹50,000 से अधिक नहीं होनी चाहिए।
यह एक सामान्य NRO account माना जाएगा (RBI के NRO निर्देश व FEMA 1999 के प्रावधान अनुसार)।
Pakistani nationality के छात्रों को खाता खोलने हेतु RBI की पूर्व अनुमति आवश्यक है।
PEP, Shell Bank, UCIC व अन्य परिभाषाएं
Politically Exposed Persons (PEPs) — विदेशी देश में प्रमुख सार्वजनिक पद पर रहे/वर्तमान व्यक्ति — जैसे राष्ट्राध्यक्ष/सरकार प्रमुख, वरिष्ठ राजनेता, वरिष्ठ सरकारी/न्यायिक/सैन्य अधिकारी, राज्य-स्वामित्व वाली corporations के वरिष्ठ executives, महत्वपूर्ण राजनीतिक पार्टी अधिकारी।
Shell Bank — एक ऐसा बैंक जो जिस देश में incorporated है वहाँ उसकी कोई physical presence नहीं व किसी regulated financial group से असंबद्ध है।
UCIC (Unique Customer Identification Code) — किसी व्यक्तिगत ग्राहक के सभी खाते उसके UCIC के अंतर्गत खोले जाते हैं।
Wire Transfer — किसी originator (प्राकृतिक/कानूनी) की ओर से बैंक के माध्यम से electronic रूप से किसी beneficiary को धन उपलब्ध कराने हेतु किया गया लेनदेन (सीधे या transfers की एक श्रृंखला के माध्यम से)।
बैंक व ग्राहक के मध्य सभी लेनदेन के रिकॉर्ड (घरेलू व अंतरराष्ट्रीय) लेनदेन की तिथि से कम से कम 5 वर्ष तक सुरक्षित रखने आवश्यक।
Non-Profit Organizations की जानकारी DARPAN Portal (NITI Aayog) पर पंजीकृत की जाती है।
AML — मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA Act, 2002)
Money laundering एक ऐसी प्रक्रिया है जिसका उपयोग अपराधी अपनी अवैध आय के स्रोत को छिपाने हेतु करते हैं — जटिल transfers/transactions या कई व्यवसायों के माध्यम से पैसे को "साफ (clean)" करके वैध व्यावसायिक लाभ जैसा दर्शाया जाता है।
Section 3, PMLA 2002 — money laundering अपराध की परिभाषा — जो कोई भी अपराध की आय (proceeds of crime) से जुड़ी किसी प्रक्रिया/गतिविधि में प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से शामिल होकर उसे untainted property के रूप में दर्शाता है, वह money laundering का दोषी माना जाएगा।
Section 45, PMLA — PMLA के तहत सभी अपराध cognizable व non-bailable (गैर-जमानती) माने जाते हैं।
Section 4, PMLA — सज़ा — 3 से 7 वर्ष का कठोर कारावास व अपराध की गंभीरता अनुसार जुर्माना। NDPS Act (Narcotics Drugs and Psychotropic Substances Act) से संबंधित मामलों में कारावास अधिकतम 10 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।
मनी लॉन्ड्रिंग के 3 चरण
1) Placement (प्लेसमेंट) — यह पहला चरण है — आपराधिक गतिविधि से प्राप्त धन (proceeds) का वित्तीय प्रणाली में भौतिक रूप से प्रवेश (disposal)।
2) Layering (लेयरिंग) — जटिल वित्तीय लेनदेन की परतें बनाकर अवैध आय को उसके स्रोत से अलग करना — यह audit trail को छुपाता है व गुमनामी (anonymity) प्रदान करता है।
3) Integration (एकीकरण) — तीसरा चरण — money laundered proceeds को सामान्य/वैध धन के रूप में वैध अर्थव्यवस्था में प्रवेश कराना।
AML/KYC — अन्य महत्वपूर्ण बिंदु
₹50,000 या अधिक की demand draft, mail/telegraphic transfer, NEFT, IMPS या travellers cheque जारी करने की remittance — ग्राहक के खाते से debit करके या cheque के जरिए ही हो सकती है, नकद के विरुद्ध नहीं।
PAN या समकक्ष e-document — Income Tax Rule 114B अनुसार बैंकों पर लागू।
KYC Templates — CKYCR को KYC data की रिपोर्टिंग हेतु तैयार templates (व्यक्ति व legal entities हेतु)।
Designated Director — PML Act अध्याय IV के अंतर्गत दायित्वों के अनुपालन (overall compliance) हेतु RE द्वारा नियुक्त व्यक्ति, जिसे बोर्ड नामित करता है।
Low-risk customer हेतु — RE सभी लेनदेन की अनुमति देगा व KYC updation इसके देय होने के 1 वर्ष के भीतर या 30 जून 2026 तक, जो बाद में हो, सुनिश्चित करेगा।
KYC Updation/Periodic Updation हेतु Business Correspondent (BC) का उपयोग किया जा सकता है।
CKYCR (Central KYC Records Registry)
यह एक राष्ट्रीय database के रूप में कार्य करती है, जहाँ ग्राहक KYC records upload, validate व de-duplicate किए जाते हैं व सभी Reporting Entities (REs) को उपलब्ध कराए जाते हैं।
प्रत्येक ग्राहक को 14-अंकों का CKYC Identifier दिया जाता है, जिसका उपयोग विभिन्न वित्तीय संस्थाओं में विभिन्न सेवाओं हेतु किया जा सकता है।
CKYCR — CERSAI (Central Registry of Securitization, Asset Reconstruction and Security Interest of India) द्वारा संचालित एक centralized repository है।
KYC records upload करने की समय-सीमा — ग्राहक के onboarding के 10 दिन के भीतर।
अध्याय 7: वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion)
परिचय (Introduction)
Financial Inclusion — वित्तीय सेवाओं तक समान अवसर की उपलब्धता (availability & equality of opportunities to access financial services)।
लक्ष्य — unbanked/underbanked, कम आय वर्ग के लोगों को किफायती दरों पर सतत वित्तीय सेवाएं प्रदान करना।
Recommended by — Dr. C. Rangarajan Committee।
उद्देश्य — सभी को सस्ती दरों पर वित्तीय सेवाएं (payment, remittance, savings, loans, advances, insurance) उपलब्ध कराना; गरीब व अमीर के बीच अंतर पाटना; अतिरिक्त धन को गरीबों तक पहुँचाना; देश में आर्थिक विकास प्राप्त करना।
वित्तीय समावेशन में RBI की केंद्रीय भूमिका है।
RBI द्वारा वित्तीय समावेशन के साधन
Simplified KYC — Utility bills जो सामान्यतः 2 महीने से पुराने न हों (बिजली, टेलीफोन, पोस्टपेड, पानी, पाइप्ड गैस), नगरपालिका/property tax receipt आदि।
ग्राहक की on-boarding के समय AOF/OVD के साथ यह undertaking ली जाती है कि वह updated current address का OVD 3 महीने के भीतर जमा करेगा — न देने पर खाते में संचालन प्रतिबंधित (Debit-Freeze) हो जाएगा।
वित्तीय समावेशन के मुख्य साधन — i. No Frills Account ii. BSBDA (Basic Savings Bank Deposit Account) iii. LBS (Lead Banking Scheme) iv. PMJDY (Pradhan Mantri Jan Dhan Yojana) v. Business Correspondent System vi. RSETI vii. SHG/JLG viii. Technological/Digital Services।
BSBDA (Basic Savings Bank Deposit Account) — Small Account नियम
a) एक वित्तीय वर्ष में जमा राशि ₹1 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए।
b) पूरे महीने की अधिकतम निकासी सीमा ₹10,000 है।
c) खाते में किसी भी समय बैलेंस ₹50,000 से अधिक नहीं होना चाहिए।
d) महीने में न्यूनतम 4 निकासी (ATM सहित)।
e) महीने में किए जा सकने वाले जमा की संख्या व राशि पर कोई सीमा नहीं (केवल BSBDA में)।
f) BSBDA धारक उसी बैंक में कोई अन्य savings account नहीं खोल सकता। यदि पहले से कोई savings account है तो BSBDA खुलने की तिथि से 30 दिन के भीतर उसे बंद करना अनिवार्य होगा।
g) ATM कार्ड या ATM-cum-Debit Card की सुविधा — कोई annual fee, issuance या renewal शुल्क नहीं।
h) छोटे खाते शुरुआत में 12 महीने के लिए वैध होते हैं, जिसे OVD हेतु आवेदन का प्रमाण देने पर और 12 महीने के लिए बढ़ाया जा सकता है।
नया क्या है? — न्यूनतम 25 चेक पन्नों की मुफ्त cheque book प्रति वर्ष, मुफ्त IBS व MBS।
LBS (Lead Banking Scheme)
RBI द्वारा दिसंबर 1969 में शुरू की गई।
उद्देश्य — बैंकों व अन्य विकास एजेंसियों की गतिविधियों में समन्वय स्थापित करके priority sector व अन्य क्षेत्रों में bank finance के प्रवाह को बढ़ाना, तथा ग्रामीण क्षेत्र के समग्र विकास में बैंकों की भूमिका बढ़ाना।
LBS की उत्पत्ति — Prof. D.R. Gadgil की अध्यक्षता वाले Gadgil Study Group से जुड़ी है।
Nariman Committee — Public Sector Banks के Branch Expansion Programme पर RBI द्वारा गठित Committee of Bankers (Chairman — Shri F.K.F. Nariman) ने 'Area Approach' (District Lead Bank) के विचार का समर्थन किया।
LBS की अंतिम समीक्षा 2009 में Smt. Usha Thorat (RBI की पूर्व Deputy Governor) की अध्यक्षता वाली High Level Committee द्वारा की गई।
Lead Bank की भूमिका — आवंटित जिलों में शाखा बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार व ग्रामीण अर्थव्यवस्था की credit आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु सभी credit संस्थाओं के प्रयासों में समन्वय स्थापित करने वाले consortium leader के रूप में कार्य करना।
District Credit Plans की तैयारी व क्रियान्वयन निगरानी हेतु 1979 में Lead Bank Officer (LBO) नियुक्त किया गया, जिसे अब Lead District Manager (LDM) कहा जाता है।
Bankers' Committee — संरचना
BLBC (Block Level Bankers' Committee) — Block स्तर पर credit संस्थाओं व field-level विकास एजेंसियों के बीच समन्वय हेतु मंच। जिले का LDM BLBC का Chairman होता है।
पंचायत समिति के प्रतिनिधि अर्ध-वार्षिक (half-yearly) अंतराल पर बैठकों में आमंत्रित किए जाते हैं। Payments Banks (PBs) को भी बैठकों में आमंत्रित किया जाना चाहिए।
BLBC बैठकें तिमाही अंतराल पर होती हैं — तिमाही समाप्ति के 60 दिन के भीतर आयोजित होनी चाहिए (उत्तर-पूर्व क्षेत्र में भौगोलिक बाधाओं के कारण वर्ष में कम से कम 2 बार)।
DCC (District Consultative Committee) — District Credit Plan के क्रियान्वयन की निगरानी हेतु Lead Banks द्वारा तिमाही अंतराल पर बुलाई जाती है। District Collector DCC बैठकों का Chairman होता है।
SLBC (State Level Bankers' Committee) — अप्रैल 1977 में गठित; राज्य में समन्वय हेतु apex inter-institutional forum, मुख्यतः नीतिगत मुद्दों पर केंद्रित (बैंकों/सरकारी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की भागीदारी)। SLBC की अध्यक्षता Convenor Bank के Chairman/MD/ED द्वारा की जाती है — तिमाही बैठकें।
PMJDY (Pradhan Mantri Jan Dhan Yojana)
इस योजना के तहत किसी भी बैंक शाखा या Business Correspondent (Bank Mitra) outlet में BSBD account खोला जा सकता है — उन व्यक्तियों द्वारा जिनका कोई अन्य खाता नहीं है।
लॉन्च — 15 अगस्त 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा। नारा — "मेरा खाता, भाग्य विधाता" ("My account, fortune maker")।
PMJDY के लाभ — a) कोई न्यूनतम बैलेंस आवश्यक नहीं b) RuPay Debit Card प्रदान c) Accident Insurance Cover ₹1 लाख (28.8.2018 के बाद खुले नए खातों हेतु बढ़ाकर ₹2 लाख) RuPay कार्ड के साथ d) OD सुविधा ₹10,000 तक (पात्र खाताधारकों हेतु, आयु 18-65 वर्ष)।
PMJDY खाते इन योजनाओं हेतु पात्र हैं — DBT (Direct Benefit Transfer), PMJJBY (Pradhan Mantri Jeevan Jyoti Bima Yojana), PMSBY (Pradhan Mantri Suraksha Bima Yojana), APY (Atal Pension Yojana), MUDRA Scheme।
RSETI (Rural Self Employment Training Institutes)
Ministry of Rural Development (MoRD) की पहल — हर जिले में समर्पित infrastructure स्थापित करके ग्रामीण युवाओं को entrepreneurship विकास हेतु प्रशिक्षण व skill up-gradation देना। बैंकों द्वारा भारत सरकार व राज्य सरकारों के सहयोग से प्रबंधित।
MoRD हर जिले के lead bank को एक RSETI स्थापित करने हेतु ₹2 करोड़ का one-time grant देता है।
उद्देश्य — ग्रामीण BPL युवाओं की पहचान व स्व-रोजगार हेतु प्रशिक्षण; प्रशिक्षण मांग-आधारित (demand driven); उम्मीदवार की योग्यता आंकने के बाद क्षेत्र तय करना; बैंकों से credit linkage हेतु hand-holding support; कम से कम 2 वर्ष तक escort services; निःशुल्क भोजन-आवास सहित intensive short-term residential प्रशिक्षण।
BC Model (Business Correspondent)
एक BC कई बैंकों हेतु कार्य कर सकता है, परन्तु customer interface पर एक retail outlet/sub-agent एक समय में केवल एक बैंक की सेवाएं प्रदान करेगा। बैंक-BC के बीच अनुबंध पूरी तरह से लिखित agreement द्वारा परिभाषित व कानूनी रूप से जांचा जाना चाहिए।
बैंकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि BC द्वारा प्रयुक्त उपकरण व तकनीक उच्च मानकों के हों।
BC Model वर्ष 2006 में RBI द्वारा शुरू किया गया।
मौजूदा निर्देशों अनुसार, NBFCs को Business Correspondent नियुक्त नहीं किया जा सकता।
Scheduled Commercial Banks — RRBs व LABs सहित — Business Correspondents नियुक्त कर सकते हैं।
BC व base branch के बीच अधिकतम दूरी — ग्रामीण/अर्ध-शहरी/शहरी क्षेत्रों में 30 km, महानगरीय (metropolitan) केंद्रों में 5 km से अधिक सामान्यतः नहीं होनी चाहिए।
USSD (*99#)
यह अभिनव payment सेवा Unstructured Supplementary Service Data (USSD) चैनल पर कार्य करती है — बिना mobile internet data के, साधारण (feature) फोन से mobile banking लेनदेन की अनुमति देती है।
*99# के जरिए धन हस्तांतरण की सेवाएं — 1) UPI ID के माध्यम से 2) Account Number + IFSC के माध्यम से 3) Mobile Number के माध्यम से।
भारत सरकार द्वारा initiated व NPCI द्वारा विकसित — यह 28 अगस्त 2014 को माननीय प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्र को समर्पित की गई (PMJDY का हिस्सा)।
Fund transfer request 24x7 शुरू की जा सकती है। यह सेवा सभी GSM service providers/handsets पर कार्य करती है — CDMA फोन पर उपलब्ध नहीं।
वर्तमान में यह हिंदी व अंग्रेज़ी सहित 13 प्रमुख भाषाओं में उपलब्ध है। UPI PIN — 6 अंक।
Funds Transfer सीमा — ₹5,000/दिन, ₹50,000/वर्ष।
AePS (Aadhaar Enabled Payment System)
AePS एक bank-led model है जो किसी भी बैंक के Business Correspondent के जरिए PoS (Micro ATM) पर Aadhaar authentication के माध्यम से online interoperable वित्तीय समावेशन लेनदेन की अनुमति देता है।
DBT (Direct Benefit Transfer) — LPG सब्सिडी जैसे उपभोक्ता लाभों के प्रत्यक्ष हस्तांतरण हेतु विकसित सेवा — भारत सरकार द्वारा चयनित जिलों में जनवरी 2013 में शुरू।
लेनदेन हेतु आवश्यक इनपुट — I. Bank Name II. Aadhaar Number III. Enrollment के समय लिया गया Fingerprint।
AePS द्वारा दी जाने वाली बैंकिंग सेवाएं — Cash Deposit, Cash Withdrawal, Balance Enquiry, Mini Statement, Aadhaar to Aadhaar Fund Transfer, Authentication, BHIM Aadhaar Pay।
अन्य सेवाएं — KYC/eKYC, Best Finger Detection, Demo Auth, Tokenization, Aadhaar Seeding Status।
Unauthorized Electronic Transaction — ग्राहक की देयता (Liability)
यह उन स्थितियों पर लागू होता है जहाँ कमी (deficiency) न तो बैंक की है, न ग्राहक की, बल्कि सिस्टम में कहीं और है।
Zero Liability — यदि ग्राहक बैंक से unauthorised transaction की सूचना मिलने के 3 कार्यदिवस के भीतर बैंक को सूचित करता है।
Limited Liability — यदि ग्राहक सूचना मिलने के 4 से 7 कार्यदिवस के भीतर बैंक को सूचित करता है — देयता नीचे दी गई तालिका अनुसार होगी।
यदि रिपोर्ट करने में 7 कार्यदिवस से अधिक देरी हो, तो ग्राहक की देयता बैंक की Board Approved Policy के अनुसार तय होगी।
Reversal Timeline — ग्राहक द्वारा सूचित करने पर बैंक unauthorised transaction की राशि को ग्राहक के खाते में 10 कार्यदिवस के भीतर shadow reversal के रूप में क्रेडिट करेगा।
शिकायत का निपटारा व ग्राहक की देयता (यदि कोई हो) की स्थापना — बैंक की Board Approved Policy अनुसार, परन्तु शिकायत प्राप्ति से अधिकतम 90 दिन के भीतर।
नया मसौदा — Customer's Liability (Draft RBI Directions, 1 जुलाई 2026 से लागू)
यह निर्देश 1 जुलाई 2026 को या उसके बाद हुए electronic banking लेनदेन पर लागू होंगे।
₹500 से अधिक के हर electronic banking लेनदेन पर बैंक को अनिवार्य रूप से instant SMS alert भेजनी होगी। ₹500 तक के लेनदेन पर SMS भेजना बैंक की आंतरिक नीति पर निर्भर।
बैंक की वेबसाइट के होम पेज पर fraudulent electronic banking लेनदेन रिपोर्ट करने हेतु सीधा लिंक देना अनिवार्य।
ग्राहकों को धोखाधड़ी वाले लेनदेन व card खोने/चोरी होने की रिपोर्ट हेतु 24x7 multiple channels (phone banking, SMS, e-mail, IVR, toll-free helpline, home branch) उपलब्ध कराने होंगे।
यदि fraudulent transaction बैंक की लापरवाही/कमी के कारण हुआ हो — ग्राहक की रिपोर्टिंग की परवाह किए बिना zero liability व transaction reversal का अधिकार होगा।
Third-party breach के मामले में — यदि ग्राहक घटना की तिथि से निर्धारित समय-सीमा के भीतर रिपोर्ट करता है, तो भी zero liability मिलेगी।
रद्द (rejected) शिकायतों के मामले में — बैंक को OTP logs, SMS logs, transaction logs जैसे सहायक विवरण सहित अस्वीकृति का कारण ग्राहक को बताना अनिवार्य।
छोटी राशि की धोखाधड़ी हेतु मुआवजा (Compensation for Small Value Fraud)
व्यक्ति (bona fide victim) जिसकी शिकायत में कुल नुकसान ₹50,000 तक हो — उसे net loss का 85% या ₹25,000, जो भी कम हो, जीवनकाल में एक बार मुआवजे के रूप में मिलेगा (शर्तों के अधीन)।
₹29,412 से कम loss वाली शिकायत में — 85% मुआवज़ा — RBI 65%, ग्राहक का बैंक 10%, तथा beneficiary बैंक 10% वहन करेगा।
₹29,412 से ₹50,000 तक की loss वाली शिकायत में — कुल ₹25,000 मुआवज़ा — RBI ₹19,118, ग्राहक का बैंक ₹2,941, व beneficiary बैंक ₹2,941 का योगदान देंगे।
अध्याय 8: SHG, JLG, NRLM व NULM
Self Help Groups (SHG) — परिचय
SHG गरीब लोगों के छोटे समूह होते हैं। SHG अपने सदस्यों के बीच छोटी बचत (small savings) को बढ़ावा देते हैं — यह बचत बैंक के पास SHG के नाम के common fund के रूप में रखी जाती है।
समान आर्थिक व सामाजिक पृष्ठभूमि वाले लोग सामान्यतः किसी NGO या सरकारी एजेंसी की सहायता से जुड़ते हैं व अपनी समस्याओं का समाधान करके जीवन स्तर सुधारते हैं।
SHG affinity-based homogeneous groups होते हैं जिनमें सामान्यतः 10-20 सदस्य (आमतौर पर महिलाएं) होते हैं। इन्हें village (Village Organisation), sub-block व उच्च स्तरों पर federated किया जाता है — समय के साथ ये self-sufficient व community-managed संस्थाएं बनती हैं।
विशेष SHG (विकलांग व्यक्ति, दूरस्थ आदिवासी क्षेत्र, कठिन क्षेत्र) में 5-10 सदस्य हो सकते हैं।
Corpus — SHG की अपनी बचत, सदस्यों को दिए गए उधार से अर्जित ब्याज, तथा अन्य स्रोतों से आय व फंड।
बैंकों को सलाह दी जाती है कि वे village, gram panchayat, cluster या उच्च स्तर पर SHG federations के savings accounts खोलें, तथा DAY-NRLM के अंतर्गत बढ़ावा दिए गए Producer Groups के current accounts भी इन्हीं स्तरों पर खोलें।
SHG की उत्पत्ति (Genesis) व विकास
भारत में SHG की उत्पत्ति 1970 में Self-Employed Women's Association (SEWA) के गठन से जोड़ी जा सकती है।
NABARD द्वारा 1992 में शुरू किया गया SHG Bank Linkage Project विश्व की सबसे बड़ी microfinance परियोजना बन चुका है।
1999 में भारत सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्व-रोजगार को बढ़ावा देने हेतु SHG के गठन व skilling के माध्यम से Swarn Jayanti Gram Swarozgar Yojana (SGSY) शुरू की।
Ministry of Rural Development ने मौजूदा SGSY को प्रतिस्थापित करते हुए National Rural Livelihood Mission (NRLM) शुरू किया — यह विश्व का सबसे बड़ा गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम (poverty alleviation programme) बन गया।
NRLM ने गरीबों को सस्ती, प्रभावी व विश्वसनीय वित्तीय सेवाओं (financial literacy, bank account, savings, credit, insurance, remittance, pension, counselling) तक सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित की।
Panchsutra — SHG के 5 मूल सिद्धांत
① नियमित बैठकें (Regular Meetings) ② नियमित बचत (Regular Savings) ③ नियमित आंतरिक उधार व लेनदेन (Regular Inter-loaning) ④ समय पर पुनर्भुगतान (Timely Repayment) ⑤ अद्यतन बहीखाता (Up-to-date Book-keeping)।
विशेष SHG — दूरस्थ आदिवासी/कठिन क्षेत्रों के समूह, विकलांग व्यक्तियों जैसे संवेदनशील (vulnerable) सदस्यों वाले समूह — में 5 सदस्य जितना छोटा समूह भी बनाया जा सकता है।
केवल विकलांग व्यक्तियों तथा अन्य विशेष श्रेणियों (बुजुर्ग, transgender) हेतु बने समूहों के लिए — NRLM में पुरुष व महिला दोनों को SHG में शामिल किया जा सकता है।
SHG की सहायक संरचना व ऋण पात्रता
Village Federation सदस्यों व उनके SHG हेतु प्रारंभिक सहायक संरचना (support structure) है।
Cluster — किसी Block के अंतर्गत गांवों का एक समूह; राज्य अनुसार भिन्न, परन्तु सामान्यतः एक cluster में 25-40 गांव होते हैं।
SHG की ऋण पात्रता — (i) SHG कम से कम 6 महीने से अपने खातों की पुस्तकों (books of accounts) अनुसार सक्रिय अस्तित्व में हो (S/B account खुलने की तिथि से नहीं)। (ii) SHG को 'Panchsutra' का पालन करना चाहिए।
DAY-NRLM (Deendayal Antyodaya Yojana - NRLM)
Ministry of Rural Development (MoRD) ने Swarnajayanti Gram Swarojgar Yojana (SGSY) का पुनर्गठन करके National Rural Livelihood Mission (NRLM) 1 अप्रैल 2013 से लागू किया, जिसका नाम 29 मार्च 2016 से DAY-NRLM रखा गया।
DAY-NRLM Coverage — i. 50% लाभार्थी SC/ST ii. 15% अल्पसंख्यक (minorities) iii. 3% PWD (यह अनिवार्य नहीं है)।
NRLM में स्वयं सहायता समूहों (SHG) में पुरुष व महिला दोनों शामिल हो सकते हैं। SHG एक अनौपचारिक (informal) समूह है — Societies Act, State Cooperative Act या Partnership Firm के तहत पंजीकरण अनिवार्य नहीं है।
DAY-NRLM Funding Pattern — केंद्र व राज्य के बीच 60:40 अनुपात में (उत्तर-पूर्वी राज्यों/UT में 90:10, अर्थात लगभग पूर्ण रूप से केंद्र से)।
SHG को वित्तीय सहायता (Financial Assistance)
NRLM न्यूनतम 3/6 महीने से अस्तित्व में रहे व 'Panchsutra' का पालन करने वाले (अच्छे SHG के मानदंड अनुसार) SHG को Revolving Fund (RF) सहायता देता है — न्यूनतम ₹20,000, अधिकतम ₹30,000।
DAY-NRLM के अंतर्गत किसी भी SHG को कोई capital subsidy स्वीकृत नहीं की जाती।
Community Investment Support Fund (CIF) — MoRD द्वारा DAY-NRLM के तहत सभी blocks में बढ़ावा दिए गए SHG को प्रदान किया जाता है, village/cluster स्तर की federations के माध्यम से रूट किया जाता है, व federations द्वारा स्थायी रूप (in perpetuity) से बनाए रखा जाता है।
बैंकों को village, gram panchayat, cluster या उच्च स्तर पर SHG federations के savings accounts खोलने की सलाह दी जाती है — इन्हें 'Association of Persons' के savings account के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है।
SHG Bank Linkage — ऋण की खुराकें (Loan Doses)
SHG आवश्यकतानुसार Term Loan (TL) या Cash Credit Limit (CCL) या दोनों प्राप्त कर सकते हैं — आवश्यकता होने पर पहला ऋण बकाया रहते हुए भी अतिरिक्त ऋण स्वीकृत किया जा सकता है।
Repayment Schedule (TL) — 1st Dose: 24-36 महीने; 2nd Dose: 36-48 महीने; 3rd Dose: 48-60 महीने; 4th Dose: 60-84 महीने (सभी monthly/quarterly किश्तों में)।
MCP (Micro Credit Plan) — ऋण उपयोग
ऋण का उद्देश्य — सामाजिक आवश्यकताओं हेतु; उच्च लागत वाले ऋण की अदला-बदली (high cost debt swapping); घर/शौचालय निर्माण या मरम्मत; sustainable livelihoods या SHG द्वारा शुरू की गई किसी व्यवहार्य सामूहिक गतिविधि हेतु वित्तपोषण।
SHG द्वारा तैयार MCP ऋण के उद्देश्य व उपयोग का निर्धारण करने का आधार बनते हैं।
SHG सदस्यों को व्यक्तिगत Credit सुविधाएं
महिला SHG सदस्यों को entrepreneur बनने में सहायता हेतु — बैंक अपनी lending policy अनुसार परिपक्व, अच्छा प्रदर्शन करने वाले SHG (जो 2 वर्ष से अधिक पुराने हों व समय पर पुनर्भुगतान सहित कम से कम एक bank loan dose प्राप्त कर चुके हों) के व्यक्तिगत सदस्यों को ₹10 लाख तक का ऋण दे सकते हैं।
DAY-NRLM के अंतर्गत हर SHG में एक महिला को (यदि पात्र हो) MUDRA Scheme के तहत ₹1 लाख तक का ऋण दिया जा सकता है।
PMJDY खाता रखने वाली हर महिला SHG सदस्य को बैंकों को न्यूनतम ₹5,000 OD सुविधा देने की सलाह दी जाती है (IBA दिशानिर्देश अनुसार)।
DAY-NRLM ने पात्र व्यक्तिगत महिला SHG सदस्यों हेतु 'Women Enterprise Acceleration Fund' बनाया है।
Security, Margin व Capital Subsidy
SHG को ₹10 लाख तक ऋण पर — कोई collateral व कोई margin नहीं लिया जाएगा; SHG के savings bank account पर कोई lien नहीं लगाया जाएगा व ऋण स्वीकृति हेतु किसी जमा पर जोर नहीं दिया जाएगा।
SHG को ₹10 लाख से ऊपर व ₹20 लाख तक ऋण पर — कोई collateral security नहीं (संपूर्ण loan पर CGFMU coverage उपलब्ध); ऐसे ऋण पर margin — ₹10 लाख से अधिक राशि का अधिकतम 10% (बैंक की स्वीकृत loan policy अनुसार) लिया जा सकता है।
Capital Subsidy पूर्णतः बंद — DAY-NRLM के क्रियान्वयन की तिथि से किसी भी SHG को कोई Capital Subsidy स्वीकृत नहीं की जाएगी।
शाखाओं को DAY-NRLM की विभिन्न गतिविधियों की progress व delinquency रिपोर्ट हर महीने LDM को (आगे SLBC द्वारा गठित Special Sub Committee हेतु) प्रस्तुत करनी होती है। DAY-NRLM की राज्यवार समेकित प्रगति रिपोर्ट RBI को तिमाही आधार पर भेजी जाती है।
Interest Subvention Scheme (महिला SHG हेतु, FY 2024-25)
यह योजना सभी Public Sector Banks, Private Sector Banks व Small Finance Banks पर, सभी जिलों में लागू है — केवल DAY-NRLM के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्र की महिला SHG हेतु सीमित।
₹3 लाख तक ऋण पर — बैंक 7% प्रति वर्ष की रियायती (concessional) ब्याज दर पर ऋण देंगे।
₹3 लाख तक के outstanding credit balance (7% RoI) पर — बैंकों को FY 2024-25 के दौरान एकसमान 4.5% प्रति वर्ष दर पर subvention दिया जाएगा।
Interest Subvention केवल उस अवधि हेतु देय है जब खाता 'Standard' श्रेणी में रहे। सभी बैंकों को तिमाही आधार पर claim certificates प्रस्तुत करने होंगे।
Ministry of Rural Development (MoRD) द्वारा चयनित Nodal Bank — वर्तमान में Indian Bank नोडल बैंक है।
JLG (Joint Liability Group)
JLG एक अनौपचारिक समूह है — सामान्यतः 4 से 10 व्यक्तियों का, जो आपसी गारंटी (mutual guarantee) के आधार पर व्यक्तिगत रूप से या group mechanism द्वारा bank loan प्राप्त करने हेतु बनता है।
अधिकांशतः समान प्रकार की आर्थिक गतिविधि (Farm या Non-Farm क्षेत्र) में संलग्न — बैंक को संयुक्त वचन (joint undertaking) देकर loan प्राप्त करने में सक्षम होते हैं।
JLG कौन बना सकता है — Business Facilitators, NGOs, Farmers' Clubs, Farmers Associations, PRIs, KVKs, SAUs, ATMA, Bank Branches, PACS, अन्य Co-operatives, सरकारी विभाग, व्यक्ति, Input Dealers, MFIs/MFOs, JLPI आदि।
ऋण राशि सीमा — Agriculture, Allied Agri व Non-Agri गतिविधि हेतु समूह को अधिकतम ₹10,00,000, व्यक्ति को अधिकतम ₹1,00,000।
Tenant व Oral Lessees हेतु — समूह को अधिकतम ₹5,00,000, व्यक्ति को अधिकतम ₹50,000।
Margin — ₹2 लाख तक — शून्य (Nil); ₹2 लाख से अधिक — न्यूनतम 10%।
NULM (National Urban Livelihood Mission)
उद्देश्य — शहरी गरीबों (street vendors/hawkers सहित) के individuals/groups को स्व-रोजगार उपक्रम/micro-enterprise स्थापित करने हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करना।
शहरी गरीबों के SHG को बैंक से आसान credit व SHG loans पर interest subsidy का लाभ मिल सकता है।
NULM 24 सितंबर 2013 से लागू — सभी district HQs (आबादी की परवाह किए बिना) व 1 लाख या अधिक जनसंख्या वाले सभी शहरों में।
व्यक्तिगत व group enterprise loans हेतु आवेदन — Urban Local Body (ULB) द्वारा प्रायोजित (sponsoring agency) किया जाएगा।
EDP (Entrepreneurship Development Programme) — ULB व्यक्तिगत व group entrepreneurs हेतु 3-7 दिन का EDP आयोजित करेगा।
Group enterprises में न्यूनतम 3 सदस्य होने चाहिए, जिनमें से कम से कम 70% शहरी गरीब परिवारों से हों। एक ही परिवार का एक से अधिक व्यक्ति एक ही समूह में शामिल नहीं होना चाहिए।
अध्याय 9: सरकारी व्यवसाय (Government Business — Small Savings Schemes)
परिचय व महत्व (Importance)
RBI, Section 45 of the RBI Act, 1934 के तहत नियुक्त agency banks व अपने स्वयं के कार्यालयों के माध्यम से, आपसी सहमति (mutual agreement) से, केंद्र व राज्य सरकारों का सामान्य बैंकिंग व्यवसाय संचालित करता है।
RBI इस सरकारी व्यवसाय हेतु agency banks को agency commission देता है — इसका settlement RBI द्वारा Central Accounts Section (CAS), Nagpur में प्रोसेस किया जाता है।
Small Savings Schemes (SSS) पर ब्याज दरें DEA (Department of Economic Affairs) द्वारा निर्धारित की जाती हैं।
गलत तरीके से settle किए गए agency commission claims पर agency banks को RBI द्वारा अधिसूचित Bank Rate + 2% की दर से penal interest देना होगा।
महत्व — ग्राहक आधार (customer base) बढ़ाना; सुरक्षा, संरक्षा (security) व Tax benefits प्रदान करना।
केंद्र सरकार की योजनाएं (Central Govt Schemes)
1) Public Provident Fund (PPF) 2) Sukanya Samriddhi Account Scheme (SSA) 3) Senior Citizen's Savings Scheme (SCSS) 4) Kisan Vikas Patra (KVP) 5) Sovereign Gold Bonds (SGB) 6) Mahila Samman Savings Certificate (MSSC — बंद/Discontinued)
Small Saving Scheme — तुलनात्मक चार्ट
PPF (Public Provident Fund) — पात्रता
सभी भारतीय नागरिक PPF खाता खोलने व रखने के पात्र हैं।
व्यक्ति अपने नाम केवल एक खाता रख सकता है, या नाबालिग की ओर से दूसरा खाता खोल सकता है।
PPF खाता joint रूप में नहीं रखा जा सकता — यह केवल एक व्यक्ति के नाम पर हो सकता है।
Resident Individual अपने नाम पर, या किसी नाबालिग/असंतुलित मस्तिष्क (unsound mind) वाले व्यक्ति के guardian के रूप में खाता खोल सकता है।
अशिक्षित (illiterate) व अंधा (blind) व्यक्ति PPF खाता खोल सकता है — अंधे व्यक्ति को illiterate subscriber माना जाएगा।
PPF — NRI व HUF हेतु पात्रता — NRI 25.07.2003 से PPF खाता नहीं खोल सकते। HUF 13.05.2005 से PPF खाता नहीं खोल सकते। इन तिथियों से पहले खोले गए खाते maturity तक जारी रहेंगे, परन्तु उसके बाद न तो कोई extension मिलेगा, न ही कोई ब्याज देय होगा।
PPF — जमा, ब्याज व परिपक्वता
Initial Deposit — ₹500; इसके बाद ₹50 के गुणकों में जमा।
अधिकतम — ₹1,50,000 प्रति वित्तीय वर्ष, एकमुश्त या किश्तों में (स्वयं व नाबालिग खाते की जमा राशि मिलाकर)।
बंद हो चुका खाता ₹50 शुल्क के साथ, प्रत्येक चूक वर्ष के न्यूनतम जमा (₹500) के बकाया सहित पुनर्जीवित (revive) किया जा सकता है।
Nomination — एक या अधिक व्यक्तियों के पक्ष में की जा सकती है। नाबालिग की ओर से खोले गए खाते में कोई nomination नहीं की जा सकती।
ब्याज — महीने के 5वें दिन के बाद व महीने के अंत तक की न्यूनतम बैलेंस पर कैलेंडर माह हेतु; वार्षिक रूप से compound होता है।
खाता उस वित्तीय वर्ष की समाप्ति से 15 पूर्ण वित्तीय वर्ष पूरे होने पर परिपक्व होता है, जिसमें खाता खोला गया था।
परिपक्वता के बाद खाते को आगे जमा के साथ 5-5 वर्ष के block में असीमित बार बढ़ाया जा सकता है।
जमा राशि Sec. 80-C, Income Tax Act के तहत कटौती योग्य है। खाते में अर्जित ब्याज Section 10, IT Act के तहत टैक्स-मुक्त है।
SSA / Sukanya Samriddhi Yojana — खाता खोलना
खाता — केवल भारतीय resident माता-पिता या legal guardian द्वारा — बालिका (जिसने खाता खोलने की तिथि तक 10 वर्ष की आयु पूरी न की हो) के नाम पर खोला जा सकता है।
एक परिवार में इस योजना के तहत अधिकतम दो बालिकाओं हेतु खाता खोला जा सकता है।
दो से अधिक खाते तब खोले जा सकते हैं जब बच्चे पहले या दूसरे जन्म क्रम में हों या दोनों में हों (जैसे — पहले जन्म में triplet लड़कियां, या पहली लड़की के बाद दूसरे जन्म में twin लड़कियां)।
यह प्रावधान दूसरे जन्म क्रम की बालिका पर लागू नहीं होता, यदि परिवार में पहले जन्म क्रम में पहले से दो या अधिक जीवित बालिकाएं हों।
SSA — जमा, परिपक्वता व निकासी
न्यूनतम Initial Deposit — ₹250, इसके बाद ₹50 के गुणकों में।
प्रति वित्तीय वर्ष न्यूनतम राशि — ₹250; अधिकतम राशि — ₹1,50,000।
खाता खोलने की तिथि से 15 वर्ष पूरे होने तक जमा की जा सकती है।
बंद (discontinued) खाते पर — ₹50 penalty + चूक वर्षों की न्यूनतम वार्षिक जमा राशि देकर पुनर्जीवित किया जा सकता है।
खाता खोलने की तिथि से 21 वर्ष पूर्ण होने पर खाता परिपक्व होता है।
जमा राशि Sec. 80-C के तहत कटौती योग्य; अर्जित ब्याज Section 10 के तहत टैक्स-मुक्त। निवेशित राशि, अर्जित ब्याज व परिपक्वता राशि — तीनों टैक्स-मुक्त (EEE — Exempt Exempt Exempt)। Nomination की अनुमति है।
निकासी (Withdrawal) — खाताधारक की शिक्षा हेतु — 18 वर्ष की आयु या 10वीं कक्षा पास करने पर, जो भी पहले हो — निकासी के आवेदन वर्ष से पूर्व वित्तीय वर्ष के अंत में खाते की राशि का अधिकतम 50% निकाला जा सकता है।
विवाह/प्रस्तावित विवाह पर खाता बंद करने की अनुमति — आयु 18 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए। ऐसा बंद होना — प्रस्तावित विवाह की तिथि से 1 महीने पहले या विवाह की तिथि के 3 महीने बाद तक की अवधि में अनुमत नहीं है।
SCSS (Senior Citizens' Savings Scheme)
न्यूनतम जमा — ₹1,000 व इसके गुणकों में; अधिकतम जमा — ₹30 लाख।
खाता खोलने की तिथि से 5 वर्ष पूर्ण होने के बाद बंद किया जा सकता है। जमाकर्ता खाते को आगे किसी भी संख्या में बार बढ़ा सकता है।
SCSS में जमा राशि Income Tax Act की Sec. 80-C के तहत कटौती योग्य है।
SCSS — पात्रता व अन्य नियम
व्यक्ति व्यक्तिगत रूप से या पति/पत्नी (spouse) के साथ संयुक्त रूप से खाता खोल सकता है।
पात्रता — I. जिसने 60 वर्ष या अधिक आयु पूर्ण कर ली हो। II. 55 वर्ष या अधिक परन्तु 60 वर्ष से कम आयु वाला, जो सेवानिवृत्ति (superannuation) या अन्यथा रिटायर हो चुका हो — खाता खोलने की तिथि retirement के 3 महीने के भीतर हो। III. Defence Services के सेवानिवृत्त कर्मी — आयु 50 वर्ष पूर्ण करने पर।
खाताधारक इस योजना के तहत एक से अधिक खाता संचालित कर सकता है, बशर्ते सभी खातों की कुल जमा निर्धारित अधिकतम सीमा से अधिक न हो।
नकद जमा — ₹1 लाख तक की अनुमति है।
Premature withdrawal — 1 वर्ष के बाद, शर्तों के अधीन अनुमत।
ब्याज जमाकर्ता के savings account में क्रेडिट किया जाता है। IT Act की Sec 80C के तहत ₹1.5 लाख तक निवेश पर टैक्स कटौती।
ब्याज — जमा की तिथि से 31 मार्च/30 जून/30 सितंबर/31 दिसंबर तक, अगले अप्रैल/जुलाई/अक्टूबर/जनवरी के पहले कार्यदिवस पर देय।
Sovereign Gold Bonds (SGB)
नवंबर 2015 में सरकार द्वारा Gold Monetization Scheme के अंतर्गत लॉन्च किया गया।
इस योजना में, RBI द्वारा GOI के परामर्श से tranches में subscription हेतु issues जारी किए जाते हैं। हर नए tranche से पहले RBI press release जारी कर SGB की दर घोषित करता है।
यह सोना खरीदने व भंडारण करने का सबसे सुरक्षित तरीका है — इसके लिए किसी physical locker की आवश्यकता नहीं है।
मुख्य विशेषताएं — बॉन्ड की nominal value पर 2.50% (fixed rate) प्रति वर्ष ब्याज। ब्याज निवेशक के खाते में semi-annually क्रेडिट होता है, अंतिम ब्याज परिपक्वता पर principal के साथ देय।
निवेशकों को सोने की कीमतों से जुड़ा रिटर्न मिलता है। बॉन्ड में redemption राशि व ब्याज दोनों पर sovereign guarantee है।
न्यूनतम निवेश — 1 ग्राम। अधिकतम निवेश — व्यक्ति व HUF हेतु 4 kg, Trust व समान entities हेतु 20 kg प्रति वित्तीय वर्ष (अप्रैल-मार्च)।
DEMAT व paper दोनों रूपों में उपलब्ध; National Stock Exchange पर tradable। नकद भुगतान ₹20,000 तक स्वीकृत।
SGB — अन्य नियम व लाभ
बॉन्ड केवल resident भारतीय entities को बेचे जाएंगे। न्यूनतम अनुमत निवेश 1 ग्राम सोना है।
Joint holding के मामले में — 4 kg की निवेश सीमा केवल प्रथम आवेदक (first applicant) पर लागू होती है।
बॉन्ड की अवधि (tenor) — 8 वर्ष; 5 वर्ष के बाद आंशिक निकासी (partial withdrawal) की अनुमति।
Online mode में खरीद पर ₹50/ग्राम की discount दी जाती है। निवेशकों को fixed 2.50% प्रति वर्ष दर पर मुआवजा (compensation) मिलता है।
किसी व्यक्ति द्वारा SGB के redemption पर उत्पन्न capital gains tax को छूट दी गई है।
RBI द्वारा अधिसूचित तिथि पर जारी होने के एक पखवाड़े (fortnight) के भीतर बॉन्ड stock exchanges पर tradable हो जाते हैं।
Mahila Samman Saving Certificate (MSSC) — बंद (Discontinued)
महिलाओं व बालिकाओं के सशक्तिकरण हेतु डिज़ाइन की गई एक नई small savings scheme थी।
अवधि — 1 अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2025 तक सीमित अवधि हेतु उपलब्ध रही।
पात्रता — बालिका या महिला के नाम खाता खोला जा सकता था; महिला स्वयं या नाबालिग बालिका का guardian खाता खोल सकता था।
न्यूनतम जमा — ₹1,000 (₹100 के गुणकों में); अधिकतम जमा — एक खाते में या एक ही खाताधारक के सभी MSSC खातों में मिलाकर ₹2 लाख। दूसरा MSSC खाता पहले खाते की तिथि से 3 महीने के अंतराल के बाद खोला जा सकता था।
ब्याज दर — 7.5% प्रति वर्ष, quarterly compounded, quarterly क्रेडिट व खाता बंद होने पर भुगतान।
आंशिक निकासी — खाता खोलने की तिथि से 1 वर्ष बाद खाते के बैलेंस का अधिकतम 40% तक।
परिपक्वता — 2 वर्ष।
TDS — Sec 194A अनुसार, केवल तभी काटा जाता जब वित्तीय वर्ष में ब्याज ₹40,000 (senior citizens हेतु ₹50,000) से अधिक हो — ₹2 लाख की 2-वर्षीय राशि पर अधिकतम ब्याज ₹40,000 से अधिक न होने के कारण सामान्यतः TDS नहीं कटता था।
Government Agency Business Commission
Agency commission हेतु प्रति पेंशनभोगी प्रति वर्ष लेनदेन की संख्या 14 से अधिक नहीं होनी चाहिए (1 मासिक क्रेडिट + 2 arrears)।
Pension Disbursement
Prabhakar Rao Committee — भारत सरकार द्वारा गठित, पेंशन भुगतान/सरकारी व्यवसाय से संबंधित।
Central/State Governments से संबंधित पेंशन भुगतान लेनदेन agency banks द्वारा किए जाने पर agency commission हेतु पात्र होते हैं।
पूर्ण दर पर turnover commission तभी देय है जब लेनदेन के सभी चरण एक ही बैंक द्वारा संभाले जाएं। जहाँ काम दो बैंकों के बीच बंटा हो — turnover commission 75:25 के अनुपात में साझा किया जाता है।
खाता प्रकार — स्वयं के नाम या पति/पत्नी के साथ joint account — "E or S" (Either or Survivor) या "F&S" (Former & Survivor) के रूप में।
Pension Govt Portals — SPARSH व SAMPANN।
Gold Monetization Scheme (GMS)
RBI ने GMS, 2015 को उदार बनाते हुए जमाकर्ताओं को अपना bullion सीधे बैंकों, refiners या Collection and Purity Testing Centres (CPTCs) के पास जमा करने की अनुमति दी है (पहले इसके लिए बैंक, CPTC व Refinery के बीच tripartite agreement आवश्यक होता था)।
मंदिर, High Networth Individuals (HNIs) व fund houses/trusts/सरकारी संस्थाओं जैसी entities अब CPTC के बजाय सीधे बैंकों से लेनदेन कर सकती हैं।
न्यूनतम जमा — एक बार में 10 ग्राम कच्चा सोना (bars, coins, jewellery — पत्थर व अन्य धातु को छोड़कर); योजना के तहत जमा की कोई अधिकतम सीमा नहीं है। जमा किए गए सोने की मात्रा ग्राम के तीन दशमलव स्थान तक व्यक्त की जाएगी।
यह जमाकर्ताओं को उनके metal account पर ब्याज अर्जित करने की सुविधा देती है — सोना जमा होते ही ब्याज अर्जित होना शुरू हो जाता है।
इस योजना के तहत, 1 से 3 वर्ष की short-term जमा पर जमाकर्ता को 2.25% वार्षिक ब्याज मिलता है। Medium व Long-term जमा पर 2.5% ब्याज दर मिलती है।
GMS ने Medium Term (5-7 वर्ष) व Long Term Government Deposit (LTGD, 12-15 वर्ष) घटकों को 26 मार्च 2025 से बंद करने का निर्णय लिया है।
निर्धारित (designated) बैंक अपने विवेकानुसार GMS के अंतर्गत Short Term Bank Deposits (STBD, 1-3 वर्ष) की पेशकश जारी रख सकते हैं।
अध्याय 10: सुरक्षित जमा लॉकर (Safe Deposit Vaults / Lockers) व सुरक्षित अभिरक्षा
परिचय (Locker Facility)
Safe Deposit Locker — ग्राहकों को निर्धारित किराए (rent) के भुगतान पर, विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए locker में उनकी कीमती वस्तुएं/दस्तावेज़ आदि रखने की सुविधा। बैंक व locker के hirer के बीच संबंध "Lessor and Lessee" (या Licensor and Licensee) का होता है।
लॉकर में नहीं रखी जा सकतीं — हथियार (Arms/Weapons), विस्फोटक (Explosive), दवाएं (Drugs), रसायन (Chemicals), नशीले पदार्थ (Narcotics), या कोई भी अवैध पदार्थ जो बैंक/ग्राहकों के लिए खतरनाक हो।
RBI ने Safe Deposit Locker/Safe Custody Article हेतु संशोधित निर्देश जारी किए — बैंकों को मौजूदा locker holders के साथ 1 जनवरी 2023 तक संशोधित agreements करने थे।
Agreements के renewal हेतु चरणबद्ध (phased) समय-सीमा — 30 जून 2023 तक 50%, 30 सितंबर 2023 तक 75%, व 31 दिसंबर 2023 तक 100% पूर्ण करना था (stamp papers आदि की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए)।
बैंक को अनुपालन (compliance) की स्थिति RBI के DAKSH supervisory portal पर मासिक आधार पर रिपोर्ट करनी होती है।
सुरक्षित अभिरक्षा (Safe Custody)
Safe Custody एक प्रकार का Bailment है।
Indian Contract Act, 1872 की धारा 148 — Bailment, Bailor व Bailee को परिभाषित करती है।
"Bailment" — किसी उद्देश्य हेतु एक व्यक्ति द्वारा दूसरे को माल की डिलीवरी, इस अनुबंध के तहत कि उद्देश्य पूर्ण होने पर माल लौटाया जाएगा या डिलीवर करने वाले व्यक्ति के निर्देशानुसार अन्यथा उपयोग किया जाएगा।
माल डिलीवर करने वाला व्यक्ति "bailor" कहलाता है; जिसे माल डिलीवर किया जाता है वह "bailee" कहलाता है।
Securities का physical possession लेते समय — बैंक bailee व ग्राहक bailor बनता है।
बैंक अपने ग्राहकों के articles, valuables, securities आदि Safe Custody में रखता है व एक Bailee के रूप में कार्य करता है — bailee के रूप में बैंक को सौंपे गए माल की देखभाल करनी आवश्यक है।
Bailor — वह व्यक्ति जो bailment agreement के अंतर्गत किसी माल/संपत्ति का possession (स्वामित्व नहीं) अस्थायी रूप से त्यागता है, तथा उसे किसी अन्य व्यक्ति (bailee) को सौंपता है।
Locker किराए पर लेना (Hiring Out a Locker)
प्रक्रिया — Customer Due Diligence → Allotment of Locker → Model Locker Agreement → Locker Rent → Term Deposit as Security।
नाबालिगों (Minors) को locker किराए पर नहीं दिया जा सकता।
लॉकर पर RBI के महत्वपूर्ण दिशानिर्देश
बैंक locker खोलने हेतु ग्राहकों को FD खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। परन्तु सुरक्षा कवर के रूप में बैंक ग्राहकों से 3 वर्ष के किराए के बराबर व लॉकर के forced opening हेतु राशि जितनी caution money deposit मांग सकते हैं — क्योंकि कई बार hirer locker का उपयोग नहीं करते व किराया भी नहीं देते।
locker सुविधा देने से पहले बैंकों को (नए व पुराने दोनों ग्राहकों हेतु) KYC checks करने अनिवार्य हैं।
सभी locker सुविधा आवेदनों में एक waitlist number होना अनिवार्य है।
Locker keys पर bank/branch identification code अंकित होना चाहिए ताकि चाबी के मालिक की पहचान हो सके।
यदि locker लंबे समय तक संचालित न हो, तो बैंक hirer को locker संचालित करने या सरेंडर करने हेतु सूचित कर सकते हैं — locker संचालित न करने का कारण लिखित रूप में मांगा जाना चाहिए। यदि कोई जवाब न मिले व locker फिर भी संचालित न हो, तो बैंक hirer को औपचारिक notice भेजकर जबरन locker खोलने का पूरा अधिकार रखता है।
Nomination (लॉकर हेतु)
Section 45 of the Banking Regulation Act — locker सेवाओं में nomination सुविधाओं से संबंधित है। safe deposit locker से संबंधित विस्तृत प्रक्रिया —
1) BR Act की धारा 45ZE व 45ZF safe deposit lockers हेतु लागू।
2) 1 से अधिक nominee की अनुमति है।
3) जहाँ safe deposit locker दो या अधिक व्यक्तियों द्वारा संयुक्त रूप से किराए पर लिया गया हो, वहाँ वे एक या अधिक व्यक्तियों के पक्ष में nomination कर सकते हैं।
4) Nominee(s) की फोटोग्राफ, ग्राहक(ओं) के विकल्प पर, ली जा सकती है।
5) Nomination forms Rules के तहत निर्धारित हैं। अंगूठे के निशान के मामले में दो गवाहों द्वारा attestation आवश्यक है।
6) Nomination/cancellation/variation के फॉर्म की acknowledgment दी जानी चाहिए।
Locker Operation (लॉकर संचालन)
Access to locker — locker तक पहुँचने वाले सभी hirers का रिकॉर्ड — तिथि, check-in व check-out समय सहित — हस्ताक्षर के साथ Access Register में दर्ज किया जाता है।
Locker Room में गोपनीयता — जब कोई locker-hirer locker खोलता है, तो बैंक अधिकारी या कोई अन्य locker-hirer locker room के अंदर नहीं रहेगा।
ग्राहक को Alerts — locker operation की तिथि व समय की सूचना देते हुए ग्राहक के registered email व मोबाइल नंबर पर email व SMS alert भेजा जाना चाहिए।
Locks व Keys — locker surrender होने पर locks बदले (inter-changed) जाने चाहिए। Duplicate master keys बैंक की किसी अन्य शाखा में जमा की जाती हैं, व master keys की joint custody का उचित रिकॉर्ड रखा जाता है।
Daily Checks — officer-in-charge को locker operation के बाद यह जांचना चाहिए कि locker ठीक से बंद है या नहीं — यदि नहीं, तो तुरंत बंद व सील करके locker-hirer को सूचित करना चाहिए।
Locker holder की मृत्यु पर access — यदि locker joint signatures के तहत संयुक्त रूप से hire किया गया हो व locker hirer(s) ने किसी अन्य individual(s) को नामित किया हो — किसी locker hirer की मृत्यु पर, inventory तैयार करने के बाद, बैंक survivor(s) व nominee(s) को संयुक्त रूप से locker तक पहुँच व सामग्री निकालने की स्वतंत्रता देगा।
बैंकों हेतु नियम (Rules for Banks)
RBI बैंकों को strong room के प्रवेश/निकास बिंदुओं व common operation areas पर CCTV कैमरा लगाने की सलाह देता है — इसकी रिकॉर्डिंग 180 दिन से कम नहीं सुरक्षित रखनी अनिवार्य है।
धोखाधड़ी रोकने हेतु, हर बार locker access होने पर ग्राहक को SMS या mail भेजा जाएगा।
जब कोई locker एक से अधिक lessee को दिया जाता है, तो यह माना जाएगा कि प्रत्येक joint lessee को अलग-अलग access का अधिकार है।
locker-hirer(s) locker में कोई भी अवैध या खतरनाक पदार्थ नहीं रखेंगे। संदेह होने पर बैंक आवश्यक कार्रवाई कर सकता है।
बारिश, बाढ़, भूकंप, बिजली गिरना, नागरिक अशांति, दंगा, युद्ध या आतंकवादी हमले जैसे कारणों से locker की सामग्री को हुए किसी भी नुकसान/क्षति के लिए बैंक किसी भी स्थिति में उत्तरदायी नहीं होगा — फिर भी बैंक ऐसी आपदाओं से अपने परिसर की सुरक्षा हेतु उचित देखभाल करेगा।
Locker की सामग्री को किसी भी तरह से बैंक द्वारा बीमित (insured) नहीं माना जाएगा।
Locker Hirers का Risk Categorization
locker hirers को दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है —
i. High Risk — Lessee locker को वर्ष में कम से कम एक बार संचालित करे।
ii. Medium Risk — Lessee locker को तीन वर्ष में कम से कम एक बार संचालित करे।
Locker को जबरन खोलना (Break Open)
जबरन locker खोलने के कारण — Hirer द्वारा चाबी खोना; सरकारी एजेंसियों के निर्देश पर; या बैंक के विवेक पर।
Locker को बैंक अधिकारी व दो स्वतंत्र गवाहों की उपस्थिति में जबरन खोला जाएगा।
Break open process व inventory assessment की video recording अनिवार्य रूप से की जाएगी व सुरक्षित रखी जाएगी — इसे 180 दिन तक संरक्षित रखा जाना चाहिए।
बैंक अपने पास सुरक्षित रखने हेतु या locker में मिले sealed/closed packets को नहीं खोलेगा।
बड़ी शाखाओं में — locker जबरन खोलने की शक्ति Senior Manager व Second Man की समिति द्वारा बैंक के वरिष्ठ प्राधिकारियों की स्वीकृति से प्रयोग की जाएगी।
बैंक इस राशि का उपयोग ग्राहक से अपने बकाया (dues) समायोजित करने हेतु कर सकता है।
मृत्यु पर Claim Settlement
Time Limit — survivor(s)/nominee(s) को, जैसी भी स्थिति हो, आवश्यक दस्तावेज़ जमा करने की तिथि से 15 दिन से अधिक न होने वाली अवधि के भीतर निपटान।
देरी होने पर — safe deposit locker/safe custody के articles से संबंधित claim पर बैंक को निर्धारित दर पर claimant(s) को compensation देना अनिवार्य है।
Death scenarios — Sole Locker-Hirer की मृत्यु (Rent Deed में Red Ink में नोट); Jointly Operating Locker-Hirers में से किसी की मृत्यु; Survivorship Clause वाले Joint Locker-Hirers में से किसी की मृत्यु — survivor(s) को access; तथा स्पष्ट Survivorship Clause/Nominee के बिना Sole/Joint Locker-Hirer की मृत्यु — बैंक के दिशानिर्देशों अनुसार निपटान, दस्तावेज़ जमा करने की तिथि से 1 महीने के भीतर।
नए संशोधन (New Amendments)
1) यदि बैंक की गलती से नुकसान हो — बैंक की देयता (liability) locker के प्रचलित वार्षिक किराए के 100 गुना के बराबर राशि होगी।
2) Break Open के दौरान video recording करना अनिवार्य है।
3) यदि locker 7 वर्ष तक निष्क्रिय (inoperative) रहे व locker-hirer का पता न चले — चाहे किराया नियमित रूप से भरा जा रहा हो — बैंक locker की सामग्री उनके nominees/legal heir को हस्तांतरित करने या पारदर्शी तरीके से disposal करने हेतु स्वतंत्र होगा।
4) मौजूदा Locker Holder(s) द्वारा — single से joint holding में रूपांतरण; joint holder में बदलाव (जोड़ना/प्रतिस्थापन); या joint से single holding में रूपांतरण के अनुरोध पर — request letter मौजूदा व नए locker holder द्वारा हस्ताक्षरित होनी चाहिए, जबकि Locker Agreement मौजूदा, बाहर जाने वाले व नए holders द्वारा execute किया जाना चाहिए।
प्राथमिक locker holder (first holder) का प्रतिस्थापन/बहिष्करण (substitution/exclusion) अनुमत नहीं है।
जब locker एक से अधिक lessee को दिया जाता है, तो प्रत्येक joint lessee को अलग-अलग access का अधिकार निहित माना जाएगा।
Locker का Surrender (आत्मसमर्पण/वापसी)
प्रक्रिया — Rent Deed में हस्ताक्षर → चाबियां वापस करना → खाली locker से बदलना (यदि लागू हो) → ग्राहक को security (यदि कोई हो) वापस करना।