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बैंकिंग ज्ञान — संपूर्ण हिंदी नोट्स
(Banking Knowledge — Complete Hindi Study Notes)
अध्याय 1 से 5 तक
Bank & Deposits • Types of Customer • Indian Banking System, Committees, DEAF, TDS, ATM Codes
Remittance (NEFT/RTGS/IMPS) • Banker-Customer Relationship
नोट: महत्वपूर्ण शब्दों व नियमों के आगे अंग्रेज़ी शब्द/अर्थ कोष्ठक में दिए गए हैं ताकि परीक्षा में दोनों भाषा में समझ बनी रहे।
विषय-सूची (Index)
अध्याय 1 बैंक और बैंक जमा
Bank, Banking Company, Banker व Customer की परिभाषा; जमा के प्रकार (Savings/Current/Fixed/RD); Inoperative व Dormant खाते
अध्याय 2 ग्राहकों के प्रकार
Minor, Guardian, Illiterate, VIP, Pension, Senior Citizen, Staff, Married Women, Lunatic, Joint A/c, Executor, HUF
अध्याय 3 भारतीय बैंकिंग प्रणाली, समितियां, DEAF, TDS व ATM कोड्स
RBI संरचना, PSB List, Bank Mergers, Important Committees, TDS Rules, DEAF/UDGAM, SFB vs PB, ATM Response Codes
अध्याय 4 निधि प्रेषण — NEFT, RTGS, IMPS, MICR, SWIFT
NEFT/RTGS/IMPS की समय-सीमा, शुल्क, सीमाएं; DD नियम; IFSC/UTR/MICR/SWIFT कोड
अध्याय 5 बैंकर-ग्राहक संबंध
Debtor-Creditor, Trustee, Bailor-Bailee, Agent-Principal आदि संबंध; Mandate Letter व Power of Attorney
अध्याय 1: बैंक और बैंक जमा (Bank & Bank Deposits)
बैंक की परिभाषा (Definition of Bank)
Banking Regulation Act, 1949 की धारा 5(b) के अनुसार — "Banking" का अर्थ है जनता से धन जमा स्वीकार करना, जिसका उद्देश्य उधार देना या निवेश करना हो, जो मांगने पर (on demand) या अन्यथा वापस करने योग्य हो, और चेक, ड्राफ्ट, आदेश आदि (cheque, draft, order) द्वारा निकाला जा सके।
Banking Business के दो प्रमुख कार्य होते हैं —
① जनता से current, deposit, savings या अन्य खातों में धन प्राप्त करना, जो मांगने पर या उससे कम अवधि की सूचना (notice) पर वापस करने योग्य हो।
② ग्राहकों द्वारा दिए/जमा किए गए चेक (cheque) का भुगतान करना या वसूल (collect) करना।
बैंकर की परिभाषा (Definition of Banker)
Negotiable Instruments Act, 1881 की धारा 3 — "Banker" में कोई भी व्यक्ति शामिल है जो बैंकर के रूप में कार्य करता है, तथा कोई भी post office savings bank भी इसमें शामिल है।
Bill of Exchange Act, 1882 की धारा 2 — "Banker" में ऐसे व्यक्तियों का समूह शामिल है (चाहे incorporated हो या न हो) जो बैंकिंग का व्यवसाय (business of banking) करते हैं।
बैंकिंग कंपनी की परिभाषा (Definition of Banking Company)
एक वित्तीय संस्था जो जनता से जमा स्वीकार करती है और उसे उधार देने की गतिविधियों में लगाती है।
Banking Regulation Act, 1949 की धारा 5(C) अनुसार, बैंकिंग कंपनी — जनता से धन जमा स्वीकार करना, जिसका उद्देश्य उधार देना या निवेश करना हो, जो मांगने पर या अन्यथा वापस करने योग्य हो व चेक/ड्राफ्ट/आदेश द्वारा निकाली जा सके।
मुख्य 4 बिंदु — a) जनता से जमा स्वीकार करना (Accepting deposits from public) b) पैसा उधार देना (Lends the money) c) पैसा निवेश करना (Invest the money) d) मांगने पर वापसी (Repayable on demand)
बैंकिंग कंपनियों का लाइसेंसिंग (Licensing of Banking Companies)
BR Act की धारा 22 के अनुसार, भारत में कोई भी कंपनी बिना RBI से लाइसेंस (license) लिए बैंकिंग व्यवसाय नहीं कर सकती।
"Branch/Branch Office" — कोई भी शाखा या उप-कार्यालय (pay office/sub-pay office) जहाँ जमा (deposit) प्राप्त की जाती है, चेक भुनाए जाते हैं (cheques cashed) या पैसा उधार दिया जाता है — धारा 35 के प्रयोजन हेतु धारा 6(1) में उल्लिखित अन्य व्यवसाय स्थान भी इसमें शामिल हैं।
Penal Charges नियम — न्यूनतम बैलेंस (minimum balance) की कमी पर लगने वाला penalty, शॉर्टफॉल (shortfall) की मात्रा के सीधे अनुपात (directly proportionate) में होना चाहिए — अर्थात यह वास्तविक बैलेंस व निर्धारित न्यूनतम बैलेंस के अंतर पर एक निश्चित प्रतिशत (fixed %) के रूप में लिया जाए।
बैंक ग्राहक की परिभाषा (Definition of Bank Customer)
"Customer" शब्द किसी भी अधिनियम (Act) में परिभाषित नहीं है।
जिस व्यक्ति का बैंक में खाता है या बैंकर के साथ संबंध (relationship) है — भले ही उसका खाता न हो — वह customer कहलाता है।
KYC Policy के अनुसार Customer —
① वह व्यक्ति/इकाई जिसका खाता है और/या बैंक से व्यावसायिक संबंध है
② वह जिसकी ओर से खाता संचालित (maintained) है।
ग्राहकों के प्रकार (Type of Bank Customer)
Existing Customer — जिसका बैंक से खाता संबंध (account relationship — यह एक contractual relationship है।
Former Customer — जिसका बैंक से पहले संबंध था।
Walk-in Customer — तकनीकी रूप से customer नहीं, परन्तु draft खरीदना, cheque भुनाना जैसी बैंक सुविधाएँ लेता है।
Prospective/Potential Customer — जो खाता खोलने का इरादा रखता है, जैसे — विधिवत हस्ताक्षरित AOF बैंक को दे चुका है और बैंक ने उसे स्वीकार भी कर लिया है, फिर भी बैंक के रिकॉर्ड में अभी खाता वास्तव में खुला नहीं है।
Core Banking Solution (CBS) में customer शब्द व्यापक है — अब ग्राहक पूरे "Bank" का customer होता है, न कि किसी एक शाखा का। परन्तु किसी भी cause of action की स्थिति में ग्राहक को अपनी base branch से संपर्क करना आवश्यक है।
जमा के प्रकार (Types of Bank Deposits)
उद्देश्य के आधार पर जमा खाते तीन प्रकार के होते हैं — ① Savings Bank Account (बचत खाता) ② Current Deposit Account (चालू खाता) ③ Term / Fixed / Recurring Deposit (सावधि जमा)
Bulk Deposits — SCB व Small Finance Bank हेतु ₹3 करोड़ या अधिक की single rupee term deposit; RRB व LAB हेतु ₹1 करोड़ या अधिक।
Demand Deposits — मांगने पर निकाली जा सकने वाली जमा। Savings Deposit = ब्याज देने वाली demand deposit; Current Deposit = बिना ब्याज (non-interest bearing) वाली demand deposit।
Demand Deposits – Auto Sweep / FFD / Savings-linked FD / MODS — यह परंपरागत रूप से Term Deposit व Savings Account का combination होता है।
1. बचत खाता (Savings Bank Account)
निश्चित आय वाले लोगों (वेतनभोगी, मजदूर आदि) के लिए उपयुक्त। न्यूनतम प्रारंभिक जमा बैंक अनुसार अलग-अलग होती है।
a) ब्याज खाते के दैनिक बैलेंस (daily balance) पर calculate होता है।
b) बैंक द्वारा निर्धारित न्यूनतम बैलेंस (minimum balance) रखना अनिवार्य है।
c) ब्याज कम से कम तिमाही (quarterly) में एक बार क्रेडिट होता है।
d) ₹1 लाख तक बैलेंस पर uniform Rate of Interest (RoI) लागू होगी, राशि चाहे जो भी हो।
e) ₹1 लाख से अधिक end-of-day saving balance पर differential RoI दी जा सकती है।
f) ₹10,000 तक का ब्याज Income Tax Act की धारा 80TTA के तहत टैक्स-मुक्त (exempt) है।
Savings Account नहीं खोला जा सकता — सरकारी विभाग/निकाय, नगर निगम, नगर समितियां, पंचायत समिति, राज्य आवास बोर्ड, जल-मल निकासी बोर्ड, राज्य पाठ्यपुस्तक निगम, महानगर विकास प्राधिकरण, किसी राजनीतिक पार्टी, या किसी व्यापारिक/व्यावसायिक (trading/business/professional) संस्था (proprietorship/partnership/company) के नाम पर।
Savings Account खोला जा सकता है — व्यक्ति (निवासी/अनिवासी), Associations, Societies, शैक्षणिक संस्थान, HUF, Trusts, बैंक-वित्तपोषित Primary Co-op Society, Khadi & Village Industries Board, कृषि उत्पाद विपणन समिति, DWCRA, SHG (पंजीकृत/अपंजीकृत), VVV (Farmers Club) आदि के नाम पर।
2. चालू खाता (Current Deposit Account)
व्यवसायी, कंपनियां व संस्थान (जैसे अस्पताल) जिन्हें असीमित बार भुगतान करना होता है — यह खाता व्यक्ति/proprietorship/partnership/Pvt-Public Ltd Co/HUF/Societies/Trusts/Govt Depts/LLP आदि द्वारा खोला जा सकता है।
इस पर बैंक कोई ब्याज नहीं देता (No interest paid) — बल्कि खाताधारक वार्षिक operational charge देता है।
खाता खोलते समय बैंक को CIBIL/CRILC देखना अनिवार्य है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि entity पर कोई borrowing arrangement/defaulter status तो नहीं है।
मृत व्यक्ति या sole proprietorship के चालू खाते में शेष राशि पर मृत्यु की तिथि से claimant को भुगतान तक savings account की दर पर ब्याज मिलता है।
CC/OD हेतु चालू खाता खोलने के नियम (Credit Risk Management)
जहाँ बैंकिंग सिस्टम का aggregate exposure ₹10 करोड़ या अधिक है, वहाँ विशेष प्रावधान लागू।
₹10 करोड़ से कम aggregate exposure वाले borrowers के लिए बैंक बिना किसी प्रतिबंध current account खोल सकते हैं (परन्तु ग्राहक से यह undertaking लेनी होगी कि ₹10 करोड़ या अधिक होने पर वे सूचित करेंगे)।
Borrower किसी भी एक बैंक (जिसके साथ CC/OD सुविधा हो) में current account खोल सकता है, बशर्ते उस बैंक का कम से कम 10% aggregate/fund-based exposure हो।
यदि कोई बैंक 10% मानदंड पूरा न करे, या केवल एक बैंक पूरा करे, तो सबसे बड़े exposure वाले दो बैंक (एक-दूसरे के NOC सहित) current/OD account रख सकते हैं।
यदि केवल एक बैंक का ही exposure है, तो ग्राहक की पसंद का एक और बैंक NOC लेकर खाता रख सकता है।
जो बैंक पात्रता मानदंड पूरा नहीं करता, वह केवल Collection Account रख सकता है — यह मुख्यतः receipt/cash inflow हेतु प्रयुक्त current/OD खाता है।
Collection Account में जमा राशि, प्राप्ति के 2 कार्यदिवस के भीतर designated CC/current/OD account में भेजी जानी चाहिए (statutory dues पहले debit किए जा सकते हैं)।
Cash Credit Account — यह current/OD से अलग है, working capital सुविधा से जुड़ा; इस पर कोई प्रतिबंध लागू नहीं।
3. सावधि जमा खाता (Fixed Deposit Account)
"Term Deposit" — निश्चित अवधि के लिए ब्याज देने वाली जमा, जिसमें Recurring/Cumulative/Annuity/Reinvestment deposits व Cash Certificates भी शामिल हैं।
Accounting भाषा में इसे "Time Liabilities" कहा जाता है — अर्थात notice पर निकासी योग्य जमा, मांग पर नहीं।
Interest — Maturity Option (Re-investment): ब्याज तिमाही आधार पर compound होता है व maturity पर देय होता है — कैलेंडर तिमाही के अंत (31/3, 30/6, 30/9, 31/12) पर interest inflow।
Interest — Income Option: Monthly/Quarterly/Half-Yearly/Yearly आधार पर भुगतान। Quarterly भुगतान simple interest दर पर। Monthly भुगतान discounted value पर होता है, जबकि Half-yearly व Yearly भुगतान quarterly compounded आधार पर।
अवधि 7 दिन से 10 वर्ष तक हो सकती है। FD callable या non-callable आधार पर हो सकती है। FD की सुरक्षा पर loan भी मिल सकता है।
7 दिन से पहले premature withdrawal पर कोई ब्याज नहीं दिया जाएगा।
व्यक्तियों (एकल/संयुक्त) की ₹1 करोड़ तक की सभी term deposits में premature-withdrawal-facility अनिवार्य है (पहले यह सीमा ₹15 लाख थी)।
यदि TD मैच्योर होकर राशि unclaimed रह जाए तो उस पर savings rate या contracted rate — जो भी कम हो, वह ब्याज मिलेगा।
आवर्ती जमा खाता (Recurring Deposit Account)
खाता खोलते समय व्यक्ति एक निश्चित राशि हर महीने जमा करने को सहमत होता है — maturity पर कुल जमा + ब्याज देय होता है। मैच्योरिटी से पहले भी बंद किया जा सकता है (ब्याज सहित)।
Simple interest दैनिक product आधार पर calculate व half-yearly compound/credit होता है।
खाता व्यक्तिगत रूप से, संयुक्त रूप से, या नाबालिग के guardian द्वारा खोला जा सकता है। ब्याज दर savings से अधिक पर FD से कम होती है।
Premature withdrawal पर उतनी अवधि के लिए applicable rate पर ब्याज मिलता है — contracted rate पर नहीं।
यदि FD/RD पर premature penalty है तो 1% penal interest लगेगा — अर्थात "उस अवधि/राशि पर applicable rate माइनस 1%" दिया जाएगा, contracted rate पर नहीं।
Term Deposit — रविवार/छुट्टी पर मैच्योरिटी
यदि term deposit रविवार, छुट्टी या non-business working day को मैच्योर होती है, तो अगले working day तक originally contracted rate पर ब्याज मिलेगा —
① Reinvestment व Recurring deposits में maturity value पर;
② साधारण term deposit में मूल principal amount पर — यह गणना 365 दिन/वर्ष के आधार पर होती है।
निष्क्रिय / Dormant खाते (Inoperative/Dormant Accounts)
Savings व Current दोनों प्रकार के खाते को inoperative/dormant माना जाता है यदि निर्धारित अवधि (2 वर्ष) 24 माह तक कोई customer-induced लेनदेन (debit या credit — ग्राहक या तीसरे पक्ष द्वारा प्रेरित) न हुआ हो।
Savings account पर ब्याज नियमित रूप से क्रेडिट होता रहेगा — चाहे खाता operative हो या नहीं। यदि TDR मैच्योर होकर unclaimed रहे तो savings rate या contracted rate — जो कम हो — मिलेगा।
RBI दिशानिर्देश (01.01.2024) के अनुसार — face-to-face physical mode में या digital channel (internet/mobile banking) के जरिए की गई KYC updation अब वैध customer-induced non-financial transaction मानी जाती है।
अध्याय 2: ग्राहकों के प्रकार (Types of Customer)
प्राकृतिक व अन्य व्यक्ति (Natural & Legal Persons)
Natural Person (प्राकृतिक व्यक्ति) वह होता है जो एक वास्तविक इंसान (Human Being) हो।अर्थात, जन्म लेने वाला कोई भी व्यक्ति Natural Person कहलाता है।
Legal Persons = कानून द्वारा मान्यता प्राप्त संस्था
HUF, Joint Stock Companies, Firms, Associations, Cooperative Societies, Local Authorities, Government Departments, Trusts/Clubs/Committees, Power of Attorney धारक, Executors and Administrators।
अभिभावकों के प्रकार — हिंदू नाबालिग (Guardian of Hindu Minor)
प्राकृतिक अभिभावक (Natural Guardian) क्रम — पहले पिता, फिर माता, इसके बाद legal guardian।
माता तभी प्राकृतिक अभिभावक बन सकती है यदि पिता संन्यासी बन जाए।
यदि कोर्ट पिता को guardian के रूप में fit न पाए, तो माता को guardian नियुक्त किया जा सकता है।
सौतेली माँ/सौतेला पिता (step mother/step father) कभी प्राकृतिक अभिभावक नहीं बन सकते।
विवाहित हिंदू नाबालिग लड़की — यदि पति की मृत्यु हो जाए, तो ससुर (father-in-law) प्राकृतिक अभिभावक बनता है।
नाजायज़ हिंदू नाबालिग (Illegitimate) — माता प्राकृतिक अभिभावक होती है।
दत्तक हिंदू नाबालिग (Adopted) — दत्तक माता-पिता (adoptive parents) प्राकृतिक अभिभावक होंगे।
मुस्लिम नाबालिग (Muslim Minor)
प्राकृतिक अभिभावक क्रम — पहले पिता, फिर पिता के पिता (Father's father)।
इनमें से किसी के जीवित न रहने पर नाबालिग का प्रतिनिधित्व केवल legal guardian ही कर सकता है।
Father → Father's Executor → Grandfather → Grandfather's Executor → Court Guardian
माता कभी प्राकृतिक अभिभावक नहीं बन सकती।
ईसाई व अन्य धर्म (हिंदू/इस्लाम को छोड़कर)
इनमें Legal Guardian होता है, प्राकृतिक अभिभावक नहीं।
Guardian की शक्तियां — नाबालिग के agent के रूप में कार्य करना; नाबालिग के लाभ हेतु loan लेना/foreclose करना; major होते ही उसकी शक्ति समाप्त हो जाती है।
नाबालिग — महत्वपूर्ण प्रावधान (Minor)
Indian Majority Act, 1875 की धारा 3 अनुसार — सामान्यतः 18 वर्ष तक व्यक्ति नाबालिग रहता है; कोर्ट-नियुक्त guardian होने पर यह सीमा 21 वर्ष है।
10 वर्ष या अधिक आयु का, साक्षर (literate) व एकरूप हस्ताक्षर करने वाला नाबालिग स्वयं खाता संचालित कर सकता है (board approved policy अनुसार illiterate को भी अनुमति दी जा सकती है)।
नाबालिग की मृत्यु होने पर धन claim case के रूप में निपटाया जाता है (trust के रूप में नहीं)।
नाबालिग contract (अनुबंध) नहीं कर सकता, और agent नियुक्त होने पर वह अपने principal के प्रति उत्तरदायी नहीं होता। यदि partner बना है तो majority प्राप्त करने के 6 माह के भीतर अपना दायित्व स्वीकार करना होगा।
Guardian द्वारा खोले गए नाबालिग खातों को overdraw नहीं किया जा सकता — वे हमेशा credit में रहने चाहिए।
पिता प्राकृतिक अभिभावक है, परन्तु RBI ने बैंकों को माता को भी guardian के रूप में (केवल fixed व savings account हेतु) अनुमति दी है।
अशिक्षित व्यक्ति (Illiterate Person)
जो किसी भी भाषा को पढ़-लिख नहीं सकता व किसी भी भाषा में हस्ताक्षर करने में सक्षम नहीं।
बैंक अधिकारी को passbook, chequebook, debit card आदि की सुरक्षा सहित पूरी T&C समझानी होती है।
अशिक्षित व्यक्ति contract कर सकता है। किसी नज़दीकी संबंधी अशिक्षित के साथ joint account खोल सकता है।
पुरुष बाएं हाथ का अंगूठा निशान व महिला दाएं हाथ का अंगूठा निशान देगी।
Current account खोलने हेतु उच्च अधिकारियों की पूर्व अनुमति आवश्यक।
सामान्यतः cheque book जारी नहीं होती, संचालन व्यक्तिगत रूप से (in person) होता है।
यदि power of attorney देता है तो वह notary public से attest होनी चाहिए।
Statutory भुगतान व loan किश्तों के लिए post-dated cheque हेतु cheque book जारी हो सकती है (account payee crossed) — जारी करते समय अंगूठे के निशान का सत्यापन किया जाता है।
दृष्टिबाधित व्यक्ति (Visually Impaired Person - VIP)
VIP को हर प्रकार का खाता खोलने की अनुमति है (current हेतु उच्च अधिकारी की पूर्व अनुमति आवश्यक)। T&C एक witness की उपस्थिति में समझाई जाती है।
VIP contract कर सकता है। हस्ताक्षर/अंगूठा निशान अधिकृत अधिकारी की उपस्थिति में लिया जाता है व किसी मौजूदा खाताधारक द्वारा witness किया जाता है।
Visible पहचान चिह्न (identification marks) नोट किए जाते हैं। AOF, specimen signature slip, passbook, pay-in slip, withdrawal slip व cheque book पर "Visually Impaired Person" की रबर स्टाम्प लगाई जाती है।
दो अंधे व्यक्तियों का joint account खोलना अनुमत है।
Persons with Disabilities
Autism, cerebral palsy, mental retardation व multiple disabilities वाले व्यक्तियों के लिए savings व term deposits — District Court द्वारा नियुक्त legal guardian, या National Trust (Disabilities Act, 1999) के तहत बनी Local Level Committee द्वारा नियुक्त guardian खोल सकते हैं (Mental Health Act, 1987)।
पेंशन खाते (Pension Accounts)
यदि spouse (family pensioner) family pension credit हेतु मौजूदा joint account चुनता है, तो बैंक को नया खाता खोलने की आवश्यकता नहीं — बशर्ते Pension Payment Order (PPO) में उसके नाम authorization पहले से मौजूद हो।
पेंशन/arrears क्रेडिट करने में देरी पर बैंक को नियत तारीख के बाद 8% प्रति वर्ष की fixed दर से पेंशनभोगी को मुआवजा देना होगा।
Senior Citizens — जो 60 वर्ष पूर्ण कर चुके हैं व भारत में निवासी हैं, उन्हें card rate पर 0.50% अतिरिक्त ब्याज दर का लाभ मिलता है।
Super Senior Citizen (80 वर्ष या अधिक): Card Rate + 0.80%
Incapacitated Account Holder — जो व्यक्ति बैंक में शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हो सकता व शारीरिक अक्षमता के कारण cheque/withdrawal form पर अंगूठा निशान भी नहीं दे सकता।
पेंशन disbursing authorities की advice व सभी सुसंगत दस्तावेज़ों पर खाता खोला जाता है। पेंशनभोगी अपने पहले के मौजूदा खाते में भी क्रेडिट चुन सकता है।
पेंशनभोगी अपने spouse के साथ joint account खोल सकते हैं — संचालन निर्देश F/S, E/S व spouse के साथ जॉइंटली भी अनुमत।
पेंशनभोगी की मृत्यु होने पर spouse family pension/अन्य लाभों के लिए खाता जारी रख सकता/सकती है।
पेंशनभोगी को प्रत्येक वर्ष नवंबर माह में Life Certificate/employment-non-employment certificate जमा करना आवश्यक है।
भारत सरकार ने डिजिटल Life Certificate "Jeevan Parman" शुरू किया है — Aadhaar biometric authentication द्वारा।
Super senior citizens अक्टूबर माह में Life Certificate जमा कर सकते हैं।
वृद्ध/बीमार/अशक्त पेंशनभोगियों की निकासी — (a) अंगूठे/toe निशान को दो स्वतंत्र गवाहों (जिनमें से एक जिम्मेदार बैंक अधिकारी हो) से सत्यापित करना; (b) यदि अंगूठा/toe निशान भी न दे सकें व बैंक में उपस्थित भी न हो सकें तो cheque/withdrawal form पर एक mark लिया जाकर दो स्वतंत्र गवाहों द्वारा सत्यापित।
स्टाफ खाते (Staff Accounts)
कार्यरत या सेवानिवृत्त स्टाफ सदस्यों की जमा पर बैंक 1% अतिरिक्त ब्याज दर दे सकता है (संबंधित बैंक की शर्तों अनुसार)।
Joint account में पहला नाम स्टाफ सदस्य का होना चाहिए। यह सुविधा मृत स्टाफ सदस्य/मृत सेवानिवृत्त सदस्य के spouse पर भी लागू है।
यह सुविधा NRE/NRO/FCNR जमा पर लागू नहीं होती।
Deputation पर गए कर्मचारी के लिए मूल (deputing) बैंक अतिरिक्त RoI दे सकता है — निश्चित अवधि हेतु deputed होने पर अवधि समाप्ति पर लाभ बंद हो जाता है।
यह सुविधा HUF या HUF के Karta के नाम की term deposit पर लागू नहीं — भले ही Karta resident Indian senior citizen हो।
सेवानिवृत्त staff जो senior citizen हैं, उन्हें अपने विवेक से बैंक staff सुविधा के साथ-साथ senior citizen लाभ भी दे सकते हैं।
सामान्यतः Retired Staff RoI — 1% (staff) + 0.5% (senior citizen); 80 वर्ष+ आयु के Retired Staff के लिए — 1% + 0.5% + 0.3% (SSS)।
विवाहित महिला (Married Women)
Contract कर सकती है। ऋण लेने की स्थिति में पति सामान्यतः उत्तरदायी नहीं होता, सिवाय — जीवन की आवश्यकताओं हेतु उधार लेने पर, घरेलू आवश्यकताओं हेतु उधार लेने पर, या पति के agent के रूप में कार्य करने पर।
Pardanashin Women — पहचान स्थापित करना (establishing identity) महत्वपूर्ण; current account Circle Head/RM/उच्च अधिकारी की अनुमति से खोला जाता है।
विक्षिप्त व्यक्ति (Lunatic)
अत्यधिक विकृत मानसिक स्थिति वाला व्यक्ति (जो बेतुके, लापरवाह या अनियंत्रित व्यवहार करता हो)।
Contract नहीं कर सकता। नया खाता नहीं खोल सकता।
यदि बैंक को व्यक्ति की lunacy की जानकारी मिलते ही खाते का संचालन तुरंत रोक दिया जाता है।
Mental Health Act, 1987 के तहत जारी Legal Guardianship Certificate — कोर्ट-नियुक्त guardian होने पर खाता खोलने में कोई बाधा नहीं।
National Trust Act, 1999 — Local Level Committee को विशेष disability वाले व्यक्ति के लिए guardian नियुक्त करने का अधिकार है, जो व्यक्ति व संपत्ति दोनों की देखभाल करेगा।
संयुक्त खाता (Joint Account)
संचालन के प्रकार — I. Jointly by all (सभी द्वारा संयुक्त रूप से) II. Either or Survivor / Anyone or Survivor III. Former or Survivor / Latter or Survivor IV. Jointly or Survivor
किसी भी joint account holder की मृत्यु/दिवालियापन (bankruptcy)/lunatic घोषित होने पर खाता संचालन का अधिकार स्वतः रद्द हो जाता है।
मृतक द्वारा हस्ताक्षरित cheque, survivors की सहमति (agreement) से पहले clear नहीं किया जा सकता।
कोई भी joint holder स्वयं के विवेक से किसी agent की नियुक्ति नहीं कर सकता।
Account Operation के प्रकार — विस्तार से
Jointly: सभी लेनदेन हेतु सभी holders के हस्ताक्षर आवश्यक। किसी एक holder की मृत्यु पर खाता "inoperable" माना जाता है व बैलेंस survivor को दिया जाता है।
Joint or Survivor: यह Jointly जैसा है, परन्तु survivor खाता संचालन जारी रख सकता है।
Either or Survivor: दो holders (primary व secondary), दोनों में से कोई भी या दोनों संचालन कर सकते हैं।
Former or Survivor: केवल primary holder संचालन कर सकता है; मृत्यु पर दूसरा joint holder संचालन कर सकता है।
Latter or Survivor: दूसरा holder संचालन कर सकता है; उसकी मृत्यु के बाद primary holder संचालन करेगा।
Anyone or Survivor: दो से अधिक व्यक्तियों द्वारा संचालित; बैलेंस/ब्याज किसी भी holder को दिया जा सकता है।
याद रखें — Survivorship account में premature withdrawal हेतु, जब दोनों जीवित हों, तो दोनों पक्षों की सहमति आवश्यक होगी।
Executors व Administrators
Executor — मृतक व्यक्ति की संपत्ति (estate) का प्रबंधन करने हेतु नियुक्त व्यक्ति (वसीयत/will द्वारा नियुक्त)।
Administrator — जहाँ वसीयत न हो, वहाँ संपत्ति प्रबंधन हेतु कोर्ट द्वारा नियुक्त व्यक्ति।
खाता "XYZ executors to the estate of ABC deceased" नाम से खोला जाना चाहिए।
बैंकर को executors/administrators के व्यक्तिगत debit balance को estate खातों से समायोजित (settle) करने का अधिकार नहीं है।
हिंदू अविभाजित परिवार (HUF)
सामान्यतः पैतृक संपत्ति व व्यवसाय एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानांतरित होता है।
प्रबंधन सबसे बड़े पुरुष सदस्य Karta द्वारा होता है (Karta का दायित्व असीमित/unlimited liability होता है); अन्य सदस्य co-parceners होते हैं (limited liability — जब तक वे व्यक्तिगत क्षमता में दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर न करें)।
नाबालिग की ओर से guardian हस्ताक्षर करेगा, जो majority प्राप्त करने के बाद सहमति प्रदान करेगा।
Co-parcener खाता संचालित नहीं कर सकता, परन्तु cheque payment रोक (stop) सकता है।
Karta किसी अन्य major co-parcener को अधिकृत (authorise) कर सकता है।
किसी तीसरे पक्ष के पक्ष में mandate केवल सभी co-parceners की सहमति के बाद ही दिया जा सकता है।
Hindu Succession Act पारित होने के बाद, किसी पुरुष सदस्य की मृत्यु के बाद उसका हिस्सा उसकी पत्नी, बेटी व अन्य महिला सदस्यों को भी मिल सकता है।
HUF खाता Karta द्वारा खोला व संचालित किया जा सकता है। Karta किसी major co-parcener को HUF खाते के संचालन का दायित्व सौंप (delegate) सकता है।
अध्याय 3: भारतीय बैंकिंग प्रणाली, समितियां, DEAF, TDS व ATM कोड्स
भारतीय बैंकिंग की संरचना (Structure of Indian Banking)
RBI (केंद्रीय बैंक व Apex वित्तीय संस्था) → Scheduled Banks (RBI Act, 1934 की दूसरी अनुसूची में शामिल) व Non-Scheduled Banks।
Scheduled Banks में — ① Commercial Banks ② Cooperative Banks (a. State Cooperative Banks, b. District Central Cooperative Banks-DCCBs, c. Primary Agricultural Credit Societies-PACS, d. Regional Rural Banks-RRBs) ③ Development Banks।
Scheduled Banks — RBI Act 1934 की दूसरी अनुसूची में शामिल, RBI के bank rate पर ऋण के पात्र। Commercial व Cooperative Banks इसी की उप-श्रेणियां हैं।
Non-Scheduled Banks — दूसरी अनुसूची में शामिल नहीं; संकट (crisis) के समय को छोड़कर सामान्यतः RBI से उधार नहीं ले सकते।
Development Banks/Financial Institutions — कम लाभ पर बड़े सामाजिक लाभ वाली, निवेश-गहन (investment-intensive) परियोजनाओं को वित्त प्रदान करते हैं।
प्रमुख Development Banks
SIDBI (Small Industries Development Bank of India) — संसद अधिनियम के तहत 1990 में स्थापित; MSME क्षेत्र की promotion, financing व development हेतु Principal Financial Institution; HQ — लखनऊ (Lucknow)।
NABARD (National Bank for Agriculture and Rural Development) — स्थापना 12 जुलाई 1982; "Development Bank of the Nation for Fostering Rural Prosperity"; HQ — मुंबई (Mumbai)।
EXIM Bank (Export-Import Bank of India) — स्थापना 1 जनवरी 1982; HQ — मुंबई; देश की प्रमुख export finance संस्था।
अन्य उदाहरण — NHB (National Housing Bank), IFCI (Industrial Finance Corporation of India), NAFCUB (National Cooperative Development Corporation)।
सरकारी बैंक / PSBs (वर्तमान में 12)
Government Banks अर्थात Public Sector Banks (PSBs) वे संस्थाएं हैं जिनमें भारत सरकार की हिस्सेदारी सामान्यतः 51% से अधिक होती है।
1) State Bank of India 2) Bank of Baroda 3) Punjab National Bank 4) Bank of India 5) Union Bank of India 6) Canara Bank 7) Bank of Maharashtra 8) Central Bank of India 9) Indian Overseas Bank 10) Indian Bank 11) UCO Bank 12) Punjab and Sind Bank
बैंकों का विलय — Bank Mergers 2020
1960 — State Bank of India (Subsidiary Banks) Act, 1959 के तहत SBI को 8 राज्य-संबद्ध बैंकों का नियंत्रण मिला। इन Associated Banks का SBI में विलय 1 अप्रैल 2017 से प्रभावी हुआ।
1969 — भारत सरकार ने 14 बड़े निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण (nationalisation) किया (जैसे Bank of India)। 1980 में 6 और निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ।
Imperial Bank of India का 1955 में राष्ट्रीयकरण होकर SBI बना।
पहला भारतीय बैंक — Bank of Hindustan।
पहला संपूर्ण भारतीय (wholly Indian) बैंक — PNB।
DFS ने "One State One RRB" सिद्धांत पर 26 Regional Rural Banks (RRBs) के amalgamation को अधिसूचित किया — यह RRB विलय का चौथा चरण है (26 राज्यों व 2 केंद्रशासित प्रदेशों में 28 RRBs)।
महत्वपूर्ण बैंकिंग समितियां (Important Banking Committees)
TDS (Tax Deducted at Source)
Payment of Term Deposit by Cash Income Tax Act की धारा 269 — नकद भुगतान निषेध यदि principal + interest ₹20,000 या अधिक हो; भुगतान केवल a/c payee के माध्यम से।
FD ब्याज पर TDS दर — PAN दिया हो तो 10%, न दिया हो तो 20%। NRO FD पर TDS दर 30%। NRE व FCNR FD — कोई TDS नहीं (tax-free)।
TDS waiver हेतु Form 121 (पूर्व में 15G/15H) घोषणा करके FD provider को हर वित्तीय वर्ष के प्रारंभ में जमा करना होता है।
जिन व्यक्तियों की कुल taxable income ₹2.5 लाख (Old Regime) से कम है, वे FD पर TDS से मुक्त हैं।
Rebate FY 2025-26 हेतु बढ़कर ₹60,000 (पहले ₹25,000) हुई — संशोधित कर संरचना में ₹12 लाख तक की आय पर कोई कर देयता नहीं; वेतनभोगी व्यक्तियों हेतु ₹75,000 standard deduction सहित ₹12.75 लाख तक कर देयता शून्य।
TDS — कब नहीं काटा जाता (Section 194A) IT Act
यदि बैंक/डाकघर द्वारा किसी जमाकर्ता (Payee) के खाते में एक वित्तीय वर्ष के दौरान जमा (Credit) या भुगतान (Payment) किया गया कुल ब्याज निर्धारित सीमा से अधिक हो, तो उस पर TDS काटा जाता है।
Super senior citizens (80 वर्ष+) हेतु सीमा ₹5 लाख।
Mutual Fund व Stock Dividend पर TDS छूट सीमा — ₹5,000 से बढ़ाकर ₹10,000 कर दी गई है।
Sec 194A अनुसार — General Public हेतु ब्याज आय ₹50,000/वर्ष से अधिक व Senior Citizens हेतु ₹1,00,000/वर्ष से अधिक होने पर TDS काटा जाता है।
Savings bank account पर ₹10,000 तक का ब्याज Sec 80TTA के तहत टैक्स-मुक्त।
बैंक सभी शाखाओं में जमा के ब्याज को जोड़कर (aggregate) यह सीमा तय करता है।
Form 121 (Form 15G/15H) — वित्तीय वर्ष के प्रारंभ में ही जमा करना बेहतर होता है। Non-residents को Form 121 का लाभ नहीं मिलता। इसमें New व Old दोनों regime का विकल्प उपलब्ध है।
Form 15H — 60 वर्ष+ आयु वाले जमा कर सकते हैं; taxable income अधिकतम छूट सीमा तक होनी चाहिए (₹3 लाख; 80+ आयु हेतु ₹5 लाख)।
TDS on Cash Withdrawals (Section 194N)
यदि पिछले 3 assessment years (AY) की ITR नहीं भरी है — ₹20 लाख से अधिक नकद निकासी पर 2% व ₹1 करोड़ से अधिक पर 5% TDS।
यदि इनमें से किसी भी/सभी AY की ITR भरी है — ₹1 करोड़ से अधिक निकासी पर 2% TDS।
अदावी जमा / DEAF (Depositor Education & Awareness Fund)
बैंकों को हर कैलेंडर माह में inoperative accounts व 10 वर्ष या अधिक समय से unclaimed राशि DEA Fund में स्थानांतरित करनी होती है।
Claim window — हर महीने के पहले 10 कार्यदिवस (e-Kuber system के जरिए)।
UDRN (Unclaimed Deposit Reference Number) — CBS द्वारा उत्पन्न, प्रत्येक unclaimed खाते/जमा को दिया गया unique नंबर।
RBI Portal — UDGAM = "Unclaimed Deposits – Gateway to Access inforMation"।
DEAF ब्याज दर — 11 मई 2021 से 3% प्रति वर्ष (simple interest); 30 जून 2018 तक 4%; 1 जुलाई 2018 से 10 मई 2021 तक 3.5%।
यह निर्देश Banking Regulation Act, 1949 की धारा 26A व 35A के तहत जारी होते हैं, तथा Commercial Banks (RRB, LAB, SFB, PB सहित) व सभी Co-operative Banks पर लागू होते हैं। बैंक को e-Kuber पर DEA Fund module में रजिस्टर करना अनिवार्य है।
मृत जमाकर्ता का खाता (Deceased Depositor's Account) — ब्याज नियम
A. मृत्यु maturity से पहले हुई, राशि का claim maturity के बाद — bank contracted rate पर maturity तक ब्याज देगा; maturity के बाद bank की beyond-maturity date तक की savings rate पर ब्याज देगा।
B. मृत्यु maturity से पहले हुई, राशि का claim भी maturity से पहले — जितनी अवधि deposit बैंक के पास रही, उसी हेतु applicable rate पर बिना penalty ब्याज मिलेगा।
C. मृत्यु overdue deposit की maturity के बाद हुई — बैंक की overdue deposit policy अनुसार ब्याज मिलेगा।
मृतक ग्राहक के जमा खातों का claim — सभी आवश्यक दस्तावेज मिलने के 15 कैलेंडर दिन के भीतर निपटाना अनिवार्य।
Safe deposit locker/safe custody claim — 15 कैलेंडर दिन के भीतर process करके claimant से inventory date तय करने हेतु संपर्क।
देरी होने पर बैंक को prevailing Bank Rate से कम न हो, ऐसी दर पर ब्याज के रूप में compensation देना होगा।
Small Finance Bank vs Payments Bank — तुलना
Local Area Bank (LAB) व Co-operative Banks
LAB योजना 24 अगस्त 1996 को शुरू हुई — ग्रामीण/अर्ध-शहरी क्षेत्र में, 3 सन्निकट (contiguous) जिलों में कार्यरत, कम लागत संरचना वाले छोटे निजी बैंक। न्यूनतम स्टार्ट-अप पूंजी — ₹5 करोड़। प्रति जिला केवल 1 शहरी शाखा की अनुमति; बाकी शाखाएं ग्रामीण/अर्ध-शहरी क्षेत्र में।
Cooperative Banks — "एक व्यक्ति, एक वोट" सिद्धांत पर कार्य करते हैं। BR Act 1949 व Banking Laws (Application to Co-operative Societies) Act 1965 के तहत RBI का नियमन (capital adequacy, risk control, lending norms)। NABARD — सहकारी क्षेत्र का शीर्ष निकाय (apex body)।
ATM Authorisation Response Codes — कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण
Transaction approved with balance — लेनदेन स्वीकृत, बैलेंस दिखाया गया
Expired OTP / Invalid Transaction / Invalid Amount / Invalid Card / No Savings Account
Transaction not allowed / Hot Card / Unauthorized Usage — कार्ड उपयोग हेतु अधिकृत नहीं
No Funds / Expired Card / Incorrect PIN / No Card Record
Transaction not permitted on card / Transaction not permitted on term
Suspected Fraud / Limit Exceeded — वर्तमान अवधि में अधिकतम निकासी संख्या पार
Card PIN not set / Exceed PIN retry / Invalid Account (Dormant Account)
PIN length error / Invalid PIN Block / Invalid CVV / PIN key Error / MAC sync error
Security Violation / Switch not available / Invalid Originator (Mobile number mismatch)
System Error / No Fund Transfer / Duplicate Transaction / Device Time-out
Uncertain Dispense / Amount Too Large / BNA Deposit Error / New & Old PIN Same / Card Lost
अध्याय 4: निधि प्रेषण — NEFT, RTGS, IMPS, MICR, SWIFT
NEFT (National Electronic Fund Transfer)
16 दिसंबर 2019 से NEFT 24x7 उपलब्ध है (वर्ष के सभी दिन, छुट्टियों सहित)।
प्रतिदिन 48 आधे-घंटे (half-hourly) के settlement batches RBI द्वारा चलाए जाते हैं — पहला batch 00.30 बजे के बाद शुरू, अंतिम batch 00.00 बजे समाप्त।
Transaction Amount — कोई न्यूनतम या अधिकतम सीमा नहीं।
Outward transactions N06 Messages के माध्यम से भेजे जाते हैं — debit a/c customer account होना चाहिए (NEFT केवल ग्राहकों की ओर से निधि हस्तांतरण हेतु है)।
NEFT Deferred Net Settlement (DNS) आधार पर कार्य करता है — लेनदेन batches में settle होते हैं, किसी निश्चित समय पर settlement होता है।
बिना बैंक खाते वाले व्यक्ति भी NEFT से पैसा भेज सकते हैं — पूरा पता, टेलीफोन नंबर आदि देकर; ऐसा नकद remittance अधिकतम ₹50,000/लेनदेन तक सीमित होगा।
NEFT — Service Charges (शाखाओं के माध्यम से)
Internet Banking Service (IBS) व Mobile Banking Service (MBS) के जरिए NEFT charge — प्रत्येक बैंक स्वयं तय करता है।
NRE व NRO खातों में NEFT से निधि transfer संभव — FEMA, 2000 व Wire Transfer Guidelines के अधीन।
यदि batch settlement के 2 घंटे बाद भी लेनदेन credit या return नहीं होता, तो बैंक ग्राहक को प्रचलित RBI LAF rate पर penal interest देने हेतु उत्तरदायी है — ग्राहक द्वारा claim की प्रतीक्षा किए बिना।
NEFT से Indo-Nepal Remittance
प्रति लेनदेन सीमा ₹50,000 से बढ़ाकर ₹2 लाख कर दी गई है।
वर्ष में 12 remittances की सीमा (cap) हटा दी गई है (खाताधारकों हेतु)।
Walk-in/non-customer नकद remittances के लिए ₹50,000/remittance व वार्षिक अधिकतम 12 remittances की सीमा लागू रहेगी।
यदि प्रेषक (sender) किसी भी NEFT-enabled बैंक-शाखा में खाता रखता है, तो कोई सीमा नहीं है।
RTGS (Real Time Gross Settlement)
RBI द्वारा मार्च 2004 में इंटर-बैंक भुगतान को अधिक सुरक्षित व तेज़ बनाने हेतु implement किया गया।
प्रत्येक लेनदेन व्यक्तिगत रूप से (individually) settle होता है व प्रोसेस होते ही यह अंतिम व अपरिवर्तनीय (final & irrevocable) माना जाता है।
यह सबसे तेज़ इंटर-बैंक निधि हस्तांतरण प्रणाली है।
न्यूनतम राशि ₹2 लाख, कोई अधिकतम सीमा नहीं।
NG-RTGS — 19 अक्टूबर 2013 से लागू, ISO 20022 मानकों पर आधारित उन्नत सुविधाएं।
सामान्य परिस्थितियों में लाभार्थी बैंक को निधि प्राप्त होने के 30 मिनट के भीतर लाभार्थी के खाते में credit करना अनिवार्य है।
असफल भुगतान लौटाने में देरी (Payment Interface पर प्राप्ति के 1 घंटे के भीतर या RTGS Business Day समाप्ति से पहले, जो भी पहले हो) होने पर originating customer को वर्तमान repo rate + 2% पर मुआवजा मिलता है।
RTGS — Message Types व Timing
NCP Messages (Normal Customer Payment Request, R41) — ग्राहकों की ओर से भेजे गए, debit a/c customer account होना अनिवार्य।
NIP Messages (Normal Interbank Payment Request, R42) — बैंक द्वारा Inter-Bank Remittance हेतु; debit a/c कोई customer account नहीं हो सकता, यह एक Office account होना चाहिए।
Timing — RTGS 24x7x365 उपलब्ध है, 14 दिसंबर 2020 से लागू।
'Real Time' का अर्थ है निर्देश प्राप्त होते ही उसका प्रोसेसिंग; 'Gross Settlement' का अर्थ है फंड ट्रांसफर निर्देशों का व्यक्तिगत रूप से settlement।
RTGS — Service Charges (शाखाओं के माध्यम से)
IBS व MBS के जरिए RTGS charge भी व्यक्तिगत बैंक द्वारा निर्धारित।
IFSC व UTR No.
IFSC (Indian Financial System Code) — RTGS/NEFT में गंतव्य शाखा (destination branch) दर्शाने वाला 11-अक्षरों का uniform कोड। उदाहरण (SBI): SBIN0011425 → [Bank (4 अक्षर) + Reserve (0) + SOL (6 अंक)]।
UTR No. (Unique Transaction Reference No.) — NEFT में यह 16/22 अक्षरों का होता है; RTGS में NCP message हेतु सिस्टम द्वारा उत्पन्न 22 अक्षरों का होता है।
LEI (Legal Entity Identifier) — ₹50 करोड़ या अधिक के single payment transactions (गैर-व्यक्ति entities द्वारा) में remitter व beneficiary दोनों की 20-digit LEI जानकारी शामिल करना अनिवार्य — यह NEFT व RTGS दोनों पर लागू है।
IMPS (Immediate Payment Service)
2010 में भारत सरकार द्वारा लॉन्च; NPCI (National Payment Corporation of India) द्वारा सुविधाजनक बनाया गया।
Real-time electronic fund transfer सेवा — 24x7x365 उपलब्ध।
दो प्रकार के IMPS लेनदेन —
P2A (Person to Account) — Account Number व IFSC के जरिए (RTGS/NEFT जैसे विवरण)।
P2P (Person to Person) — Mobile Number व MMID के जरिए। MMID (Mobile Money Identifier) — बैंकों द्वारा जारी 7-अंकों का unique नंबर।
IMPS अधिकतम सीमा ₹5 लाख/लेनदेन (SMS व IVR के माध्यम से — ₹2 लाख)।
शुल्क व्यक्तिगत सदस्य बैंकों व PPIs द्वारा तय किए जाते हैं।
Demand Draft (DD)
बैंकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ₹20,000 व उससे अधिक की demand draft हमेशा account payee crossing के साथ जारी हो।
₹50,000 व अधिक की remittance (DD/mail transfer/telegraphic transfer या अन्य mode) व travellers cheques का issue केवल ग्राहक के खाते से debit या cheque द्वारा किया जाना चाहिए — नकद भुगतान के विरुद्ध नहीं।
15 सितंबर 2018 से सभी DD/BC पर खरीदार का नाम अंकित करना अनिवार्य।
DD केवल एक बार ही, जारी होने की तिथि से 1 वर्ष के भीतर, revalidate की जा सकती है।
खोई हुई DD की Duplicate DD RBI दिशानिर्देश अनुसार एक पखवाड़े (fortnight) के भीतर जारी करनी होगी। इससे अधिक देरी पर corresponding maturity की fixed deposit दर पर ब्याज देकर ग्राहक को क्षतिपूर्ति करनी होगी।
₹5,000 तक की duplicate draft (खोई हुई draft के स्थान पर) पर्याप्त indemnity के आधार पर खरीदार को जारी की जा सकती है।
RBI Act, 1934 की धारा 31 के अनुसार, Demand Draft "bearer" को देय (payable) नहीं हो सकती।
NEFT vs RTGS vs IMPS — तुलना तालिका
MICR कोड (Magnetic Ink Character Recognition)
यह 9 अंकों का कोड होता है — चेक की तेज़ प्रोसेसिंग हेतु प्रयुक्त।
प्रथम 3 अंक — शहर (City) कोड को दर्शाते हैं।
अगले 3 अंक — बैंक (Bank) कोड को दर्शाते हैं।
अंतिम 3 अंक — शाखा (Branch) कोड को दर्शाते हैं।
SWIFT कोड (Society for Worldwide Interbank Financial Telecommunication)
यह 8 से 11 अक्षरों का कोड है, जो अंतर-राष्ट्रीय (cross-border) निधि हस्तांतरण हेतु प्रयुक्त होता है।
संरचना — Bank Code (4 अक्षर, केवल letters) + Country Code (2 अक्षर) + Location Code (2 अक्षर/अंक) + Branch Code (3 अक्षर/अंक, वैकल्पिक)।
अध्याय 5: बैंकर-ग्राहक संबंध (Banker-Customer Relationship)
परिचय
बैंक व ग्राहक के बीच संबंध को मोटे तौर पर दो भागों में बांटा जा सकता है — ① General Relationship ② Special Relationship।
Banking Regulation Act, 1949 की धारा 5(b) बैंकिंग व्यवसाय/बैंकिंग कंपनी को परिभाषित करती है; धारा 6 में बैंकिंग कंपनी के व्यवसाय के रूप (forms of business) बताए गए हैं — (a) जनता से जमा स्वीकारना (b) मांगने पर या अन्य साधनों से जमा निकासी की अनुमति देना।
Customer — किसी भी अधिनियम में कानूनी रूप से परिभाषित नहीं है।
RBI KYC Policy अनुसार customer वह व्यक्ति है जो किसी regulated entity के साथ वित्तीय लेनदेन/गतिविधि में लगा हो — इसमें वह व्यक्ति भी शामिल है जिसकी ओर से लेनदेन करने वाला व्यक्ति कार्य कर रहा हो।
बैंकर व ग्राहक के बीच प्राथमिक संबंध (Primary Relationship) — Debtor (ऋणी) व Creditor (लेनदार) का होता है।
कानूनी संबंध — लेनदेन अनुसार (Legal Relationship Table)
1. Debtor & Creditor
जब ग्राहक अपने खाते में पैसा जमा करता है — बैंक ग्राहक का debtor (ऋणी) व ग्राहक बैंक का creditor (लेनदार) बन जाता है।
इस पर कोई limitation कानून लागू नहीं होता।
भुगतान हेतु मांग (demand) करना आवश्यक है — बैंक स्वेच्छा से भुगतान करने को बाध्य नहीं है।
जब बैंक पैसा उधार देता है — ग्राहक borrower (debtor) व बैंक creditor बन जाता है।
Demand Draft/Mail/Telegraphic Transfer जारी करते समय, बैंक payee/beneficiary का पैसा देने के कारण debtor बन जाता है।
2. Trustee & Beneficiary
यदि ग्राहक किसी विशेष उद्देश्य हेतु पैसा जमा करता है, तो बैंक bailee के अतिरिक्त trustee भी होता है।
जब बैंक ऋण की सुरक्षा हेतु कोई मूल्यवान asset/दस्तावेज प्राप्त करता है, तो बैंक trustee व ग्राहक beneficiary माना जाता है — यह एक special contract है।
ग्राहक द्वारा safekeeping/जमा हेतु दी गई कीमती वस्तुओं/securities के मामले में भी बैंकर trustee की भूमिका निभाता है — इसके लिए बैंक शुल्क लेता है।
3. Mortgagor & Mortgagee
Transfer of Property Act, 1882 की धारा 58 अनुसार — mortgage का अर्थ है, ऋण/भावी ऋण/दायित्व की अदायगी सुरक्षित करने हेतु विशिष्ट अचल संपत्ति में interest का transfer।
Mortgagor केवल संपत्ति के interest से अलग होता है, ownership से नहीं।
Interest का Transferor mortgagor (ग्राहक) कहलाता है व Transferee mortgagee (बैंकर) कहलाता है।
4. Agent & Principal
Indian Contract Act, 1872 की धारा 182 अनुसार — 'agent' वह व्यक्ति है जिसे किसी अन्य के लिए कार्य करने या तीसरे पक्ष के साथ लेनदेन में उसका प्रतिनिधित्व करने हेतु नियोजित किया जाता है; जिसके लिए यह कार्य होता है वह 'Principal' कहलाता है।
बैंक cheques, bills collect करता है व rent, telephone bill, insurance premium आदि विभिन्न प्राधिकरणों को भुगतान करता है — ऐसे सभी मामलों में बैंक ग्राहक का agent है, व इसके लिए शुल्क लेता है।
बैंक ग्राहकों की standing instructions का भी पालन करता है।
ग्राहक की मृत्यु, दिवालियापन (insolvency) व lunacy पर यह संबंध समाप्त हो जाता है।
5. Lessor & Lessee
Transfer of Property Act, 1882 की धारा 105 — lease, Lessor, Lessee, premium व rent को परिभाषित करती है।
Lessor — जो अचल संपत्ति स्थानांतरित करता है। Lessee — जिसे संपत्ति स्थानांतरित की जाती है। Premium — lease प्राप्त करने हेतु दिया गया मूल्य। Rent — नियमित रूप से दी जाने वाली सेवा/धन।
Locker के मामले में बैंक lessor व ग्राहक lessee होता है। बैंक की गैर-लापरवाही (non-negligence) से हुए नुकसान के लिए बैंक जिम्मेदार नहीं है।
6. Bailor & Bailee
Bailment एक ऐसा अनुबंध है जिसके तहत ग्राहक किसी मूल्यवान asset या विशिष्ट वस्तु एक निश्चित अवधि हेतु बैंकर को सौंपता है — जैसे कीमती वस्तुएं, दस्तावेज़, securities, bonds।
a) जो ग्राहक asset सौंपता है वह bailor होता है।
b) जिस बैंकर को asset एक निश्चित अवधि हेतु सौंपा जाता है वह bailee कहलाता है।
7. Pawnor & Pawnee
जब ग्राहक loan प्राप्त करने हेतु कुछ assets/security बैंक के पास pledge (गिरवी) रखता है, तो ग्राहक Pledger (Pawnor) व बैंक Pledgee (Pawnee) बनता है।
Indian Contract Act, 1872 की धारा 172 — ऋण के भुगतान या वचन की पूर्ति की सुरक्षा हेतु goods का bailment "pledge" कहलाता है। Bailor यहाँ "pawnor" व bailee "pawnee" कहलाता है।
इस अनुबंध के अंतर्गत, ऋण चुकाए जाने तक assets/security बैंक के पास रहती है।
8. Advisor & Client / 9. Custodian & Guarantor
जब ग्राहक securities में निवेश करता है, तो बैंक advisor व ग्राहक client की भूमिका में होता है। बैंक को सावधानी से (औपचारिक या अनौपचारिक रूप से) सलाह देनी चाहिए।
Custodian के रूप में — बैंक ग्राहक की securities की कानूनी जिम्मेदारी लेता है; DeMat account खोलते समय बैंक custodian बनता है।
Guarantor के रूप में — बैंक अपने ग्राहकों की ओर से गारंटी (guarantee) देता है। Guarantee एक contingent contract है (Indian Contract Act की धारा 31 अनुसार) — अर्थात यह किसी घटना के होने/न होने पर निर्भर एक ऐसा अनुबंध है जो कुछ करने/न करने से संबंधित है।
10. Indemnity Holder & Indemnifier
Indian Contract Act, 1872 की धारा 124 के अनुसार, Indemnity — एक ऐसा अनुबंध है जिसमें एक पक्ष दूसरे पक्ष को स्वयं promisor के आचरण, या किसी अन्य व्यक्ति के आचरण से हुए नुकसान से बचाने का वादा करता है — इसे "contract of indemnity" कहते हैं।
शब्दकोश अनुसार Indemnity का अर्थ है — किसी नुकसान/वित्तीय बोझ से सुरक्षा।
बैंकिंग में यह संबंध duplicate demand draft जारी करने, TDR, deceased account payment आदि लेनदेन में होता है।
ऐसे मामलों में indemnifier गलत/अधिक भुगतान से हुए किसी भी नुकसान की भरपाई करेगा। यहाँ बैंक Indemnity Holder (Promisee) व ग्राहक Indemnifier (Promisor) होता है।
संबंध की समाप्ति (Termination of Relationship)
बैंक व ग्राहक के बीच संबंध निम्न स्थितियों में समाप्त होता है —
(a) ग्राहक की मृत्यु, दिवालियापन (insolvency), lunacy;
(b) ग्राहक द्वारा खाता बंद करना अर्थात स्वैच्छिक समाप्ति (Voluntary Termination);
(c) कंपनी का Liquidation;
(d) बैंक द्वारा उचित notice देकर खाता बंद करना;
(e) अनुबंध/लेनदेन का पूर्ण होना;
(f) Garnishee/attachment आदेश प्राप्त होने पर।
संबंध प्रभावित नहीं होता — a) ग्राहक की गिरफ्तारी (Arrest) b) ग्राहक का कारावास (Imprisonment) c) किसी अन्य देश में प्रवास (Migration)।
Mandate Letters (जनादेश पत्र)
यह खाताधारक (mandator) द्वारा बैंक को दिया गया एक साधारण authority letter है, जिसके द्वारा किसी विशेष व्यक्ति (mandatory) को उसकी ओर से खाता संचालित करने की अनुमति दी जाती है।
ऐसे mandate letters पर कोई stamp duty नहीं लगती।
विशेष अनुमति के बिना खाता overdraw नहीं किया जा सकता।
Joint account में सभी holders के हस्ताक्षर आवश्यक हैं।
अशिक्षित व्यक्ति के मामले में mandate notary के समक्ष हस्ताक्षरित होना चाहिए।
यह न stamped, न witnessed होता है।
Mandate की समाप्ति — खाताधारक की मृत्यु, दिवालियापन, insanity; खाताधारक द्वारा revocation; mandate holder द्वारा अस्वीकृति (refusal)।
Power of Attorney (मुख्तारनामा)
यह एक लिखित औपचारिक साधन द्वारा दी गई authority है, जिसके द्वारा donor/principal किसी अन्य व्यक्ति (donee/attorney/agent) को अपनी ओर से कार्य करने हेतु अधिकृत करता है।
इसे stamped होना व notary के समक्ष execute होना आवश्यक है।
यह Indian Contract Act के अंतर्गत आता है।
Registration अनिवार्य नहीं है। Attorney आगे किसी को delegate नहीं कर सकता।
दो प्रकार — ① General/Universal Power of Attorney: संपत्ति, बैंक खातों, tax payments, registration आदि से जुड़ा व्यापक अधिकार — इसमें जोखिम अधिक है यदि attorney विश्वसनीय न हो। ② Special/Limited Power of Attorney: किसी विशेष कार्य हेतु — कार्य पूर्ण होते ही यह समाप्त हो जाती है।
PoA की समाप्ति कब — 1) Principal की मृत्यु/अक्षमता (केवल durable PoA के मामले में) 2) Principal द्वारा PoA रद्द करना 3) PoA का उद्देश्य पूर्ण हो जाना 4) Agent की मृत्यु, अक्षमता या त्यागपत्र होने पर।