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बैंकिंग ज्ञान — संपूर्ण हिंदी नोट्स (भाग 4)
(Banking Knowledge — Complete Hindi Study Notes, Part 4)
अध्याय 16 से 20 तक
RBI Integrated Ombudsman Scheme • PM Social Security Schemes, NPS, FASTag, GST, e-Stamping
भारतीय मुद्रा व Clean Note Policy • Currency Chest प्रबंधन • कानूनी प्रकार के ग्राहक व Beneficial Owner
नोट: महत्वपूर्ण शब्दों व नियमों के आगे अंग्रेज़ी शब्द/अर्थ कोष्ठक में दिए गए हैं ताकि परीक्षा में दोनों भाषा में समझ बनी रहे। यह भाग 1, 2 व 3 (अध्याय 1-15) की अगली कड़ी है।
विषय-सूची (Index)
अध्याय 16 रिज़र्व बैंक — Integrated Ombudsman Scheme
शिकायत प्रक्रिया, TAT टेबल, Award, Appellate Authority, CRPC, कवर किए गए RE, अपवाद, Salient Features
अध्याय 17 PM सामाजिक सुरक्षा योजनाएं, NPS, FASTag, GST व e-Stamping
PMJJBY, PMSBY, APY, NPS व NPS Vatsalya, UPS, FASTag Colour Code, GST दरें, e-Stamping
अध्याय 18 भारतीय मुद्रा व Clean Note Policy
मुद्रा उत्पादन, Currency Chest, Security Features, नोटों के प्रकार, RBI Note Refund Rules 2009
अध्याय 19 Currency Chest प्रबंधन
Soiled Notes Remittance, Penalties, Counterfeit Note Reporting, Escort Team, Incentives, Verification Schedule
अध्याय 20 कानूनी प्रकार के ग्राहक व Beneficial Owner
Company, Partnership, Trust, HUF, LLP हेतु KYC दस्तावेज़ व Beneficial Owner नियम
अध्याय 16: रिज़र्व बैंक — Integrated Ombudsman Scheme (RB-IOS)
परिचय व दायरा
Reserve Bank – Integrated Ombudsman Scheme, 2026 (RB-IOS) — 1 जुलाई 2026 से प्रभावी; मूल योजना (RB-IOS, 2021) 12 नवंबर 2021 को लॉन्च हुई थी।
यह RBI की पूर्ववर्ती तीन Ombudsman Schemes को एकीकृत (integrate) करती है — (i) Banking Ombudsman Scheme, 2006 (ii) Ombudsman Scheme for Non-Banking Financial Companies, 2018 (iii) Ombudsman Scheme for Digital Transactions, 2019।
यह Scheme 'One Nation One Ombudsman' सिद्धांत अपनाती है।
Scheme, complaint दर्ज करने का आधार "Deficiency in Service" (सेवा में कमी) के रूप में परिभाषित करती है।
"Regulated Entity" (RE) का अर्थ है — कोई Bank, Non-Banking Financial Company, System Participant, या Credit Information Company (Scheme में परिभाषित अनुसार), या समय-समय पर RBI द्वारा निर्दिष्ट कोई अन्य entity — जहाँ तक कि Scheme के तहत बाहर न रखा गया हो।
शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया
शिकायतकर्ता सीधे Ombudsman से संपर्क नहीं कर सकता।
सबसे पहले शिकायतकर्ता को संबंधित Regulated Entity को लिखित शिकायत करनी होगी।
यदि Regulated Entity ने शिकायत पूर्णतः/आंशिक रूप से खारिज कर दी हो व शिकायतकर्ता जवाब से संतुष्ट न हो; या शिकायतकर्ता को RE द्वारा शिकायत प्राप्त होने के 30 दिन के भीतर कोई जवाब न मिले — तभी आगे बढ़ा जा सकता है।
शिकायत, RBI Ombudsman को — उपरोक्त समय-सीमा समाप्त होने की तिथि या संबंधित RE से अंतिम संचार की तिथि, जो भी बाद में हो — उससे 90 दिन के भीतर की जानी चाहिए।
Regulated Entity को अपने प्रधान कार्यालय में General Manager या समकक्ष रैंक से नीचे न हो ऐसा एक Principal Nodal Officer नियुक्त करना होगा, जो RE के विरुद्ध दर्ज शिकायतों में RE का प्रतिनिधित्व करने व जानकारी प्रस्तुत करने हेतु उत्तरदायी होगा।
शिकायत निपटान की समय-सीमा (Turn-Around-Time)
Compensation — उपरोक्त निर्धारित दिनों से अधिक देरी होने पर POS/ATM हेतु ₹100/दिन देय है।
नोट — जिन शिकायतों में रिकॉर्ड्स का विश्लेषण करना आवश्यक हो, वहाँ बैंक को शिकायत दर्ज होने के 30 दिन के भीतर निपटान हेतु एक समय-सीमा देनी होगी।
Customer Compensation Policy — दायरा
अनधिकृत रूप से खाता debit होना (Unauthorized debiting of account)।
Cheque/instruments collection में देरी; stop payment निर्देश स्वीकार करने के बाद भी cheque का भुगतान होना।
NEFT/RTGS में देरी; Duplicate DD व Pension जारी करने में देरी।
Cheque का खोना व ATM की नकद वितरण में असमर्थता।
बैंक के Agent द्वारा Code का उल्लंघन (Violation of Code)।
Cheque का अनादरण/वापसी (Dishonor/Return of Cheques)।
RBI Ombudsman (RBIO) — कौन है?
RBI Ombudsman — RBI का एक वरिष्ठ अधिकारी है, जिसे RBI द्वारा Regulated Entities के ग्राहकों की "deficiency in service" संबंधी शिकायतों के निवारण हेतु नियुक्त किया जाता है (RBI एक या अधिक अधिकारियों को RBI Ombudsman व RBI Deputy Ombudsman नियुक्त कर सकता है)।
क्या सभी RE, RB-IOS 2026 के अंतर्गत आते हैं? — RB-IOS, 2026 सभी commercial banks, NBFCs, Payment System Participants, अधिकांश Primary (Urban) Cooperative Banks, व Credit Information Companies को कवर करता है।
कार्यकाल (Tenor) — Ombudsman व Deputy Ombudsman की नियुक्ति एक बार में अधिकतम 3 वर्ष की अवधि हेतु की जाएगी।
योजना के लाभ (Advantages/Benefits)
1. CMS portal पर शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया का सरलीकरण।
2. शिकायतकर्ता, RE या शाखा के पते की परवाह किए बिना, देश में कहीं से भी CMS Portal/CRPC पर शिकायत दर्ज कर सकता है।
3. देश में कहीं से भी physical/email शिकायत दर्ज करने हेतु एक ही पता व एक ही email।
4. Online शिकायत registration पर स्वचालित पावती (Automatic Acknowledgement)।
5. शिकायत की स्थिति की real-time tracking की सुविधा।
6. 'One Nation One Ombudsman' दृष्टिकोण से सुविधा।
7. CMS पर ही अतिरिक्त दस्तावेज़ online जमा करने की सुविधा।
8. शिकायत के निर्णय/समापन (closure) की सूचना देने वाला विस्तृत पत्र।
9. RBI द्वारा दिए गए निवारण के संबंध में शिकायतकर्ता द्वारा online व स्वैच्छिक feedback जमा करने की सुविधा।
Award (निर्णय) संबंधी प्रावधान
1. Ombudsman, परिणामी हानि (consequential loss) के मुआवजे के रूप में भुगतान का award पारित कर सकता है, जो ₹30 लाख या जो कम हो, उतना होगा।
2. शिकायतकर्ता के समय की हानि, हुए खर्च, उत्पीड़न व मानसिक पीड़ा (harassment व mental anguish) को ध्यान में रखते हुए ₹3 लाख तक का पृथक award दिया जा सकता है।
3. RE को award का पालन करना होगा व शिकायतकर्ता से स्वीकृति पत्र (letter of acceptance) प्राप्त होने की तिथि से 30 दिन के भीतर Ombudsman को अनुपालन की सूचना देनी होगी।
4. शिकायतकर्ता Award को पूर्ण व अंतिम निपटान (full & final settlement) के रूप में स्वीकार कर सकता है, या इसे अस्वीकार भी कर सकता है।
Appellate Authority (अपीलीय प्राधिकरण)
RB-IOS, 2026 शिकायतकर्ता व RE दोनों हेतु एक अपीलीय तंत्र (appellate mechanism) प्रदान करती है।
Integrated Scheme के अंतर्गत — RBI के Consumer Education and Protection Department के प्रभारी Executive Director ही appellate authority होंगे।
Appellate Authority — Award/order में संशोधन कर सकते हैं व RBI Ombudsman के आदेश/संशोधित Award को प्रभावी करने हेतु आवश्यक निर्देश जारी कर सकते हैं; या अपने विवेक से कोई अन्य आदेश पारित कर सकते हैं।
Centralised Receipt and Processing Centre (CRPC)
Physical mode (पत्र/डाक) से प्राप्त शिकायतों हेतु CRPC — RBI, चंडीगढ़ में स्थापित किया गया है।
CRPC इन शिकायतों की प्रारंभिक जांच (initial scrutiny) व प्रोसेसिंग करता है, इन्हें CMS पर upload करता है, जिन्हें फिर Offices of RBI Ombudsmen (ORBIOs) या CEPCs को निवारण हेतु सौंपा जाता है।
वर्तमान में, ORBIOs भारत भर में 24 स्थानों से कार्यरत हैं।
CMS Portal (https://cms.rbi.org.in) के माध्यम से सीधे online दर्ज की गई शिकायतें, शिकायत register होते ही स्वचालित रूप से विभिन्न RBI Ombudsmen को आवंटित हो जाती हैं।
कार्यवाही व सुनवाई (Proceedings)
Ombudsman के समक्ष कार्यवाही summary प्रकृति की होती है।
Regulated Entity को शिकायत के दावों के जवाब में, भरोसा किए गए दस्तावेज़ों की प्रतियों सहित, अपना लिखित पक्ष (written version) — Ombudsman के समक्ष निपटान हेतु 15 दिन के भीतर दाखिल करना होगा। ऐसा न करने पर Ombudsman उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर ex-parte कार्यवाही करके उचित आदेश/Award जारी कर सकता है।
Ombudsman, बैंक के लिखित अनुरोध पर अपनी संतुष्टि के अधीन विस्तार (extension) दे सकता है।
निर्धारित समय-सीमा (शिकायत प्राप्ति की तिथि से 15 दिन) में जवाब न देने/जानकारी प्रस्तुत न करने के कारण जारी Award के संबंध में बैंक को अपील का कोई अधिकार नहीं होगा।
RB-IOS 2026 के अंतर्गत कौन-कौन से RE शामिल हैं
(i) Banks — All commercial banks (PSB, Private Sector, Foreign Banks, LAB, SFB, Payment Banks, RRB सहित), Scheduled Primary (Urban) Co-operative Banks, तथा Non-scheduled Primary (Urban) Co-operative Banks जिनका पिछले वित्तीय वर्ष के audited balance sheet अनुसार deposit size ₹50 करोड़ या अधिक हो।
(ii) RBI-पंजीकृत NBFCs — सभी NBFCs (Housing Finance Companies, CIC, IDF-NBFC, NBFC-IFC, NOFHC, Primary Dealers, Mortgage Guarantee Companies को छोड़कर) जो — a) जमा स्वीकार करने हेतु अधिकृत हों; या b) पिछले वित्तीय वर्ष के audited balance sheet अनुसार assets size ₹100 करोड़ या अधिक हो व customer interface रखते हों।
(iii) System Participants (सभी Non-bank Prepaid Payment Instrument Issuers) — सभी Payment System Participants (बैंक व non-bank दोनों, RBI द्वारा विनियमित); ये NEFT/RTGS/IMPS/UPI/BBPS/Bharat QR Code/*99#/AePS आदि की सुविधा देते हैं।
(iv) Credit Information Companies।
शिकायत कब स्वीकार नहीं की जाती
शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत के निवारण हेतु पहले अपने बैंक से संपर्क नहीं किया हो।
निर्धारित समय-सीमा की समाप्ति या संबंधित RE से अंतिम संचार की तिथि, जो भी बाद में हो, उससे 90 दिन के भीतर शिकायत न की गई हो।
शिकायत का विषय किसी अन्य मंच (जैसे न्यायालय, उपभोक्ता कोर्ट) में लंबित हो/पहले ही निपटाया जा चुका हो।
शिकायत जिस संस्था के विरुद्ध हो, वह Scheme के अंतर्गत कवर न होती हो।
शिकायत का विषय Banking Ombudsman के दायरे में न आता हो।
यदि शिकायत उसी विषय की हो जिसे किसी पिछली कार्यवाही में Banking Ombudsman के कार्यालय द्वारा पहले ही निपटाया जा चुका हो।
RE के व्यावसायिक निर्णय (commercial decision) से संबंधित शिकायतें — जैसे loan मंजूर करना।
RE के employee-employer संबंध से जुड़े किसी विवाद से संबंधित शिकायतें।
अपमानजनक (abusive), तुच्छ (frivolous) या तंग करने वाली (vexatious) प्रकृति की शिकायतें।
किसी वकील (advocate) के माध्यम से दर्ज की गई शिकायत।
कानूनी आधार
INTEGRATED OMBUDSMAN SCHEME, 2026 — RBI द्वारा विनियमित entities की सेवाओं से संबंधित ग्राहक शिकायतों के त्वरित व किफायती (expeditious & cost-effective) निवारण हेतु एक Scheme — जो निम्न प्रावधानों के अंतर्गत जारी की गई है — Banking Regulation Act, 1949 की धारा 35A; RBI Act, 1934 की धारा 45L; Payment and Settlement Systems Act, 2007 की धारा 18; तथा Credit Information Companies (Regulation) Act, 2005 की धारा 11।
मुख्य विशेषताएं (Salient Features)
RBI ने Artificial Intelligence उपकरणों के उपयोग हेतु प्रावधान बनाया है ताकि बैंक व जांच एजेंसियां बेहतर व तेज़ तरीके से समन्वय कर सकें।
बैंक ग्राहक एक ही email पते के माध्यम से शिकायत दर्ज कर सकेंगे, दस्तावेज़ जमा कर सकेंगे, स्थिति track कर सकेंगे व feedback दे सकेंगे।
एक बहुभाषी (multilingual) toll-free नंबर भी होगा जो शिकायत निवारण से संबंधित सभी प्रासंगिक जानकारी प्रदान करेगा।
जिन मामलों में RE संतोषजनक व समय पर जानकारी प्रस्तुत करने में विफल रहने के कारण Ombudsman द्वारा उसके विरुद्ध award जारी किया गया हो — ऐसे मामलों में RE को अपील का कोई अधिकार नहीं होगा।
Regulated Entity को यह सुनिश्चित करना होगा कि Scheme की मुख्य विशेषताएं उसके सभी कार्यालयों/शाखाओं में अंग्रेज़ी, हिंदी व क्षेत्रीय भाषा में प्रमुखता से प्रदर्शित हों।
Integrated Ombudsman की सभी लागत RBI द्वारा वहन की जाएगी।
IVRS (Interactive Voice Response System) युक्त Contact Center — Toll Free #14448 — 24x7 उपलब्ध है, जबकि Contact Centre कर्मियों से जुड़ने की सुविधा सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक (सोमवार से शनिवार, राष्ट्रीय अवकाशों को छोड़कर) — अंग्रेज़ी, हिंदी व दस क्षेत्रीय भाषाओं (असमिया, बंगाली, गुजराती, कन्नड़, मराठी, मलयालम, ओड़िया, पंजाबी, तेलुगु व तमिल) में उपलब्ध है।
Deputy Ombudsman व FAQs
Deputy Ombudsman कौन है? — एक वरिष्ठ अधिकारी, जिसे RBI Ombudsman को शिकायतों के निवारण व Scheme के तहत सौंपे गए कुछ कार्यों में सहायता हेतु RBI द्वारा नियुक्त किया जाता है। नियुक्ति एक बार में अधिकतम 3 वर्ष हेतु होगी।
क्या शिकायत/मुआवजे की राशि पर कोई सीमा है? — RB-IOS 2026 के तहत जिस विवादित लेनदेन की राशि पर शिकायत/शिकायत उठाई जा सकती है, उस पर कोई सीमा नहीं है। हालांकि, शिकायतकर्ता को हुई किसी परिणामी हानि (consequential loss) हेतु RBI Ombudsman के पास निर्धारित सीमा तक मुआवज़ा देने की शक्ति होगी।
क्या मानसिक पीड़ा व उत्पीड़न हेतु मुआवज़ा मांगा जा सकता है? — हां, RBI Ombudsman के पास शिकायतकर्ता के समय की हानि, हुए खर्च, उत्पीड़न/मानसिक पीड़ा हेतु ₹3 लाख तक मुआवज़ा देने की शक्ति है।
क्या शिकायत किसी भी चरण में वापस ली जा सकती है? — हां।
क्या Deputy Ombudsman किसी शिकायत को अस्वीकार कर सकता है? — Deputy Ombudsman केवल निम्न आधारों पर शिकायत अस्वीकार कर सकता है — a) शिकायत RB-IOS 2026 के Clause 10 के तहत maintainable न हो b) शिकायत सुझाव देने या मार्गदर्शन/स्पष्टीकरण मांगने की प्रकृति की हो।
क्या RBI Ombudsman के असंतोषजनक निर्णय पर आगे कोई उपाय उपलब्ध है? — हां, RB-IOS 2026 शिकायतकर्ता हेतु एक अपीलीय तंत्र प्रदान करती है — Appellate Authority की शक्तियां Scheme लागू करने वाले RBI विभाग के प्रभारी Executive Director में निहित हैं।
शिकायत दर्ज करने हेतु कोई शुल्क है? — कोई शुल्क नहीं।
किस भाषा में शिकायत दर्ज की जा सकती है? — Online portal — 2 भाषाओं में (हिंदी व अंग्रेज़ी); Physical व email शिकायत किसी भी भाषा में दर्ज की जा सकती है।
क्या शिकायत की real-time tracking संभव है? — हां।
जागरूकता हेतु RBI के प्रयास
"RBI Kehta Hai" नारे के साथ जागरूकता अभियान चलाया गया, जो RBI की वेबसाइट https://rbikehtahai.rbi.org.in/ पर उपलब्ध है।
RBI की वेबसाइट व CMS portal दोनों पर जागरूकता संबंधी संदेश दिए गए हैं — इसमें mobile apps/UPI/QR codes आदि का उपयोग करने वाली cyber-crime जागरूकता शामिल है।
अनधिकृत entities द्वारा अवैध जमा संग्रहण (illegal deposit collection) संबंधी जागरूकता संदेश Sachet Portal (https://sachet.rbi.org.in) पर उपलब्ध हैं।
विभिन्न multimedia चैनलों पर, prime time सहित, संदेश प्रसारित किए जाते हैं।
RBI ने दो पुस्तिकाएं जारी की हैं — 'BE(A)WARE' (धोखेबाजों द्वारा प्रयुक्त सामान्य तरीके व विभिन्न वित्तीय लेनदेन करते समय बरती जाने वाली सावधानियां), तथा 'Raju and the Forty Thieves' (धोखेबाजों द्वारा प्रयुक्त विभिन्न तरीकों की झलक देने वाली 40 कहानियां, जो ऐसी घटनाओं से बचाव हेतु सरल Do's & Don'ts भी बताती हैं)।
अध्याय 17: PM सामाजिक सुरक्षा योजनाएं, NPS, FASTag, GST व e-Stamping
Pradhan Mantri Jeevan Jyoti Bima Yojana (PMJJBY)
भाग लेने वाले बैंकों में 18 से 50 वर्ष आयु के सभी individual बैंक खाताधारक इसमें शामिल होने के पात्र हैं।
Cover अवधि 1 जून से 31 मई तक (एक वर्ष) होती है।
सदस्य की किसी भी कारण से मृत्यु पर ₹2 लाख देय है (Life Insurance Cover)।
Premium — ₹436/- प्रति वर्ष प्रति सदस्य।
Lien Period — नामांकन की तिथि से 30 दिन (दुर्घटना के मामले में Lien लागू नहीं, claim देय होगा)।
Pradhan Mantri Suraksha Bima Yojana (PMSBY)
दोनों आंखों की पूर्ण व अपूरणीय क्षति (Total & Irrecoverable Loss), या दोनों हाथों/पैरों के उपयोग की क्षति — ₹2 लाख।
Premium — ₹20/- प्रति वर्ष प्रति सदस्य।
PMJJBY व PMSBY — महत्वपूर्ण बिंदु
पहली बार नामांकन कराने वाले subscribers हेतु — जोखिम (risk), premium के auto-debit की तिथि से शुरू होता है। हालांकि, नामांकन की तिथि से पहले 30 दिन (lien period) के दौरान होने वाली मृत्यु (दुर्घटना को छोड़कर) पर insurance cover उपलब्ध नहीं होगा व कोई claim स्वीकार्य नहीं होगा।
PMSBY व PMJJBY, प्रधानमंत्री द्वारा 09/05/2015 को लॉन्च की गईं।
यह योजना Public Sector General Insurance Companies (PSGICs) व अन्य इच्छुक general insurance companies के माध्यम से, भाग लेने वाले बैंकों के सहयोग से, प्रस्तुत/प्रशासित की जाती है। भाग लेने वाले बैंक अपने खाताधारकों/subscribers हेतु योजना लागू करने के लिए किसी भी ऐसी general insurance company को नियुक्त करने हेतु स्वतंत्र हैं।
Master Policy Holder — भाग लेने वाला बैंक; Claim Settlement — Insurance Company द्वारा अंतिम रूप दिया जाता है।
पूर्ण भरे claim form को insurer तक भेजने की अधिकतम समय-सीमा बैंक/डाकघर हेतु 7 दिन है। PMSBY/PMJJBY के तहत claim, master policy जारी करने वाली insurance company द्वारा बैंक/डाकघर से प्राप्ति के 7 दिन के भीतर प्रोसेस किया जाएगा।
NRI — भारत में स्थित किसी बैंक शाखा में पात्र खाता रखने वाला कोई भी NRI, इस खाते के माध्यम से PMSBY/PMJJBY cover खरीदने का पात्र है (शर्तों के अधीन)। परन्तु claim उत्पन्न होने पर, लाभ केवल भारतीय मुद्रा में लाभार्थी/nominee को भुगतान किया जाएगा।
PMJJBY — Premium का बंटवारा (Appropriation)
PMSBY — Premium का विभाजन
1) Insurance Company को देय Insurance Premium — ₹20/- प्रति वर्ष प्रति सदस्य।
2) Business Correspondents/agents आदि को insurer द्वारा देय Commission — ₹1/- प्रति सदस्य (केवल नए नामांकनों हेतु)।
3) भाग लेने वाले बैंक को insurer द्वारा देय Administrative Expenses — ₹1/- प्रति वर्ष प्रति सदस्य।
Atal Pension Yojana (APY)
APY में शामिल होने की न्यूनतम आयु 18 वर्ष व अधिकतम आयु 40 वर्ष है।
Subscribers हेतु निश्चित पेंशन — ₹1000 से ₹5000 तक।
मुख्यतः असंगठित क्षेत्र (unorganized sector) के श्रमिकों हेतु लक्षित।
Subscribers, APY में मासिक/तिमाही/छमाही आधार पर योगदान कर सकते हैं।
APY हेतु Savings Account आवश्यक है।
APY — गारंटीड न्यूनतम पेंशन
प्रत्येक APY subscriber को 60 वर्ष की आयु के बाद, मृत्यु तक, भारत सरकार-गारंटीड न्यूनतम पेंशन मिलेगी — ₹1000, ₹2000, ₹3000, ₹4000 या ₹5000 प्रति माह (चुने गए विकल्प अनुसार)।
1 अक्टूबर 2022 से — कोई भी नागरिक जो income-tax payer है या रहा है, APY में शामिल होने का पात्र नहीं होगा।
Contribution Frequency — मासिक/तिमाही/छमाही।
Investment guidelines/प्रशासन — PFRDA द्वारा।
Subscriber को PRAN नंबर जारी किया जाता है; शामिल होने हेतु Aadhaar अनिवार्य है।
पेंशन 60 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद शुरू होती है।
Subscriber द्वारा स्वैच्छिक निकास (Voluntary Exit) पर — CBS system अनुरोध दर्ज होने के T+2 दिन के भीतर सत्यापित करेगा, तथा exit अनुरोध जमा व सत्यापित होने के बाद NPS system ग्राहक के बैंक खाते में राशि credit करेगा।
Government Business — Commission Income
सरकारी व्यवसाय (PPF व Senior Citizen Saving Scheme सहित) हेतु Commission दरें — Receipt (Electronic) — ₹12/लेनदेन; अन्य भुगतान — 7 पैसे प्रति ₹100 turnover।
गलत तरीके से settle किए गए agency commission claims पर Agency Banks को RBI द्वारा अधिसूचित Bank Rate +2% की दर से penal interest देना होगा।
National Pension System (NPS)
भारत सरकार ने 1 जनवरी 2004 से सेवा में शामिल होने वाले केंद्र सरकार कर्मचारियों हेतु NPS शुरू किया। 1 मई 2009 को, स्वैच्छिक आधार पर, यह भारत के सभी नागरिकों के लिए उपलब्ध कराया गया।
18-70 वर्ष आयु वर्ग का कोई भी व्यक्तिगत भारतीय नागरिक (निवासी व अनिवासी दोनों) NPS में शामिल हो सकता है (NPS आवेदन जमा करने की तिथि अनुसार)। आवेदक वेतनभोगी या स्वरोजगार वाला हो सकता है।
PFRDA — पेंशन क्षेत्र के नियामक (regulator) के रूप में गठित (subscriber को PRAN नंबर जारी होता है)।
NPS, व्यक्तिगत सदस्यों हेतु बनाए गए Personal Retirement Accounts (PRAs) पर आधारित है — Tier I account (Pension Account) व Tier II account (Investment)।
NPS, subscriber के कार्यरत रहने के दौरान PRA में बचत जमा करता है व सेवानिवृत्ति पर संचित राशि से जीवन भर की पेंशन खरीदने में सहायता करता है।
Age Group — 0 से 18, 18 से 60, 60 से आगे। NPS का लक्ष्य पर्याप्त corpus बनाना है ताकि subscriber सेवानिवृत्ति के बाद Annuity खरीद सके।
Tax लाभ — Income Tax Act की धारा 80 CCD(1) के अंतर्गत, धारा 80C के तहत कुल ₹1.50 लाख की सीमा के भीतर।
NPS — Tier I व Tier II Account
Tier-I Account — इसे "Pension Account" भी कहा जाता है। आवेदक अपनी सेवानिवृत्ति बचत इस conditional व restricted-withdrawable खाते में जमा करता है।
Tier-II Account — यह एक स्वैच्छिक (voluntary) बचत सुविधा है, जहाँ subscriber बहुत कम लागत पर fund management सुविधा प्राप्त कर सकता है (यह सेवानिवृत्ति खाता नहीं है व आवेदक इस खाते में योगदान के विरुद्ध कोई tax लाभ claim नहीं कर सकता)।
NPS Vatsalya
NPS Vatsalya — 18 सितंबर 2024 को लॉन्च, PFRDA द्वारा विनियमित व प्रशासित एक Contributory Pension Scheme — विशेष रूप से 18 वर्ष तक के सभी भारतीय नाबालिग नागरिकों हेतु डिज़ाइन की गई।
इस योजना के तहत, माता-पिता नाबालिग के लिए न्यूनतम ₹250 का निवेश कर सकते हैं — कोई ऊपरी सीमा नहीं।
बाद के योगदान — प्रति वर्ष न्यूनतम ₹250 आवश्यक, अधिकतम राशि पर कोई सीमा नहीं।
जब नाबालिग 18 वर्ष की आयु प्राप्त करता है, तो NPS Vatsalya खाता निर्बाध रूप से NPS Tier-1 (All Citizen) मॉडल में परिवर्तित हो जाता है।
इसमें तीन प्रमुख निवेश विकल्प हैं (जिसमें Auto Choice शामिल है)। 18 वर्ष से कम आयु के NRI व OCI भी इस योजना में शामिल हो सकते हैं।
NPS Vatsalya — 18 वर्ष पर Exit व निकासी
18 वर्ष की आयु प्राप्त होने पर Exit — Subscriber, majority प्राप्त करने की तिथि से 3 वर्ष तक योजना में बना रह सकता है, जब तक कि वह योजना से बाहर निकलने या All Citizen Model/किसी अन्य लागू NPS मॉडल में स्थानांतरित होने का विकल्प न चुने।
संचित corpus का 80% तक एकमुश्त (lump sum) निकाला जा सकता है, तथा शेष राशि annuity plan में पुनर्निवेशित (reinvest) की जानी चाहिए।
यदि कुल corpus ₹8 लाख से कम हो, तो खाते में जमा संपूर्ण corpus एकमुश्त निकाला जा सकता है।
यदि 18 से 21 वर्ष की आयु के बीच कोई विकल्प नहीं चुना जाता, तो अवधि समाप्त होने के बाद खाता स्वतः उसी Pension Fund के Multiple Schemes Framework (MSF) के तहत उच्च-जोखिम variant (अधिक equity exposure) में स्थानांतरित माना जाएगा।
NPS Vatsalya में नामांकन को बढ़ावा देने हेतु — Anganwadi, ASHA, Bank Sakhis व अन्य ऐसे community-level कर्मियों (सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त) को नामांकन प्रोत्साहित करने हेतु ₹100 तक का incentive देय है।
NPS Vatsalya — आंशिक निकासी (Partial Withdrawal) की शर्तें
a) Subscriber/guardian, खाता खोलने की तिथि से योजना में निर्धारित न्यूनतम अवधि पूरी होने के बाद ही आंशिक निकासी का पात्र होगा।
b) एक निर्धारित अधिकतम राशि (उस पर अर्जित returns को छोड़कर) आंशिक रूप से निकाली जा सकती है — यह सुविधा शिक्षा, निर्दिष्ट बीमारी व विकलांगता हेतु घोषणा (declaration) के आधार पर उपलब्ध है (अधिकतम 3 बार)।
c) Subscriber/guardian, नाबालिग के 18 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक की अवधि में खाते से अधिकतम 2 आंशिक निकासी ले सकता है।
d) इसके अलावा, 18 वर्ष की आयु प्राप्त होने पर व निर्धारित KYC आवश्यकताएं पूरी होने पर, subscriber 18 से 21 वर्ष की आयु के बीच अधिकतम 2 और आंशिक निकासी का पात्र होगा।
NPS Vatsalya — आवश्यक दस्तावेज़
नाबालिग की जन्मतिथि का प्रमाण — Birth Certificate, School Leaving Certificate, Matriculation Certificate, PAN या Passport द्वारा।
Guardian का KYC — पहचान व पते का प्रमाण — Aadhaar, Driving License, Passport, Voter ID Card, NREGA Job Card, या National Population Register दस्तावेज़।
Guardian का PAN या Rule 114B अनुसार Form 60 घोषणा।
यदि guardian NRI/OCI है, तो नाबालिग का NRE/NRO बैंक खाता (एकल या संयुक्त)।
Tax Relief — Union Budget 2025 की एक प्रमुख घोषणा — NPS Vatsalya pension plan को धारा 80CCD(1B) के तहत tax relief का विस्तार। इससे इस योजना के निवेशकों को अतिरिक्त tax बचत का लाभ मिलेगा।
Unified Pension Scheme (UPS)
UPS, कम से कम 10 वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद सेवानिवृत्त होने वाले सरकारी कर्मचारियों हेतु न्यूनतम ₹10,000 प्रति माह पेंशन की गारंटी देता है।
कम से कम 25 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके सरकारी कर्मचारी अपने औसत मूल वेतन का एक प्रतिशत पेंशन के रूप में प्राप्त करने के पात्र हैं।
FASTag
FASTag — एक ऐसा उपकरण है जो वाहन के चलते समय ही सीधे toll भुगतान करने हेतु Radio Frequency Identification (RFID) तकनीक का उपयोग करता है।
NPCI ने भारतीय बाज़ार की electronic tolling आवश्यकताओं हेतु National Electronic Toll Collection (NETC) कार्यक्रम विकसित किया है।
FASTag की असीमित वैधता (unlimited validity) होती है — जब तक tag reader द्वारा पढ़ा जा सकता है व उससे छेड़छाड़ (tamper) न हुई हो, तब तक वही FASTag उपयोग किया जा सकता है (प्रारंभिक वैधता 5 वर्ष है, उपयोग अनुसार tag को recharge/top-up ही करना होता है)।
Forceful FASTag Closure — यदि ग्राहक अपने पुराने सक्रिय tags बंद नहीं करता, तो सिस्टम, वाहन पर नया tag जारी होने के 15 दिन के भीतर पुराने सक्रिय tags को स्वतः निलंबित (suspend) कर देगा।
FASTag आवेदन हेतु दस्तावेज़ — वाहन का Registration Certificate (RC); आवेदन फॉर्म में सूचीबद्ध KYC दस्तावेज़ (मूल व प्रति दोनों)।
क्षतिग्रस्त/फटे/अपठनीय tag को उसी channel (CBS/Online) से बदला जाता है, जिससे इसे खरीदा गया था — replacement हेतु ₹100 शुल्क लागू है।
FASTag बंद होने के बाद शेष राशि का refund ग्राहक के खाते में भेजा जाता है — TAG बंद होने की पुष्टि व सभी toll लेनदेन के settlement के बाद refund की TAT 15 दिन है।
FASTag Annual Pass
FASTag पर activate किया गया Annual Pass — निजी कार/जीप/वैन (केवल private non-commercial वाहनों हेतु) को निर्दिष्ट National Highway (NH) व National Expressway (NE) toll plazas पर 1 वर्ष या 200 यात्राओं (जो भी पहले हो) तक बिना प्रति-यात्रा शुल्क के मुफ्त आवागमन की अनुमति देता है।
Annual Pass 15 अगस्त 2025 से प्रभावी है।
यह पास वाहन व संबद्ध FASTag की पात्रता सत्यापित करने के बाद activate होता है — सफल सत्यापन पर उपयोगकर्ता को आधार वर्ष 2025-26 हेतु Rajmargyatra mobile app या NHAI website के माध्यम से ₹3,000 का भुगतान करना होगा।
Point-based fee plazas में — प्रत्येक crossing को एक यात्रा माना जाता है; round trip (आना-जाना) दो यात्राएं मानी जाती है।
Closed Tolling fee plazas में — प्रवेश व निकास का एक जोड़ा एक यात्रा माना जाता है।
FASTag — Colour Code व शुल्क
GST (Goods and Services Tax)
GST नंबर (GSTIN) — Goods and Services Tax Identification Number — GST हेतु पंजीकृत हर करदाता को दिया गया एक विशिष्ट 15-अंकों का नंबर।
GST की दरें (नई दरें 22 सितंबर 2025 से लागू) — i. आवश्यक वस्तुओं व खाद्य पदार्थों हेतु 5% स्लैब ii. सामान्य वस्तुओं व सेवाओं (automobiles, electronics सहित) हेतु 18% स्लैब iii. Luxury व sin goods (जैसे तंबाकू उत्पाद) हेतु विशेष उच्च स्लैब — 40%।
GST के घटक — CGST (केंद्रीय GST), SGST (राज्य GST/UT GST), IGST (Integrated GST)।
GST 1 जुलाई 2017 को औपचारिक रूप से लागू किया गया।
E-Stamping (गैर-न्यायिक Stamp Duty का भुगतान)
यह एक Internet-आधारित application है, जो stamp papers प्राप्त किए बिना ही stamp duty भुगतान की सुविधा देता है।
यह सुनिश्चित करता है कि जनता द्वारा भुगतान की गई stamp duty सुरक्षित व विश्वसनीय माध्यम से सरकार तक सुरक्षित पहुंचे।
यह कागज़ व प्रक्रिया संबंधी धोखाधड़ी को रोकता है व stamp paper घोटाले से बचाता है।
आवश्यक दस्तावेज़ — ग्राहक को e-stamping हेतु आवेदन फॉर्म भरना होता है। भुगतान नकद, Demand Draft, Pay Order, transfer, RTGS व NEFT के माध्यम से किया जा सकता है।
e-Stamping एक computer-आधारित application व सरकार को गैर-न्यायिक stamp duty भुगतान का एक सुरक्षित तरीका है — यह भारत सरकार द्वारा नियुक्त एकमात्र Central Record Keeping Agency (CRA) के माध्यम से संचालित है।
CBDT अधिसूचना अनुसार — भुगतान की विधि चाहे जो भी हो, ₹2,00,000 से अधिक के लेनदेन हेतु PAN आवश्यक होगा।
अध्याय 18: भारतीय मुद्रा व Clean Note Policy
भारतीय मुद्रा — परिचय
भारतीय मुद्रा को Indian Rupee (INR) कहा जाता है। एक रुपये में 100 पैसे होते हैं। भारतीय रुपये का प्रतीक ₹ है (डिज़ाइनर — D. Udaya Kumar)।
यह डिज़ाइन देवनागरी अक्षर "र" (ra) व लैटिन बड़े अक्षर "R" दोनों से मिलता-जुलता है, जिसके ऊपरी भाग में दोहरी क्षैतिज रेखा (double horizontal line) है।
Legal Tender — ऐसा सिक्का या बैंक नोट जो ऋण या दायित्व के निर्वहन (discharge) हेतु कानूनी रूप से देय (tenderable) हो।
नोट व सिक्कों का उत्पादन/ढलाई
बैंक नोट 4 currency presses में छापे जाते हैं — इनमें से 2 भारत सरकार के स्वामित्व में हैं, इसके Corporation Security Printing and Minting Corporation of India Ltd. (SPMCIL) के माध्यम से, तथा 2 RBI के स्वामित्व में हैं, इसकी पूर्ण-स्वामित्व वाली subsidiary Bharatiya Reserve Bank Note Mudran Private Ltd. (BRBNMPL) के माध्यम से।
SPMCIL की currency presses — नासिक (पश्चिम भारत) व देवास (मध्य भारत) में हैं। BRBNMPL की दो presses — मैसूरु (दक्षिण भारत) व साल्बोनी (पूर्वी भारत) में हैं।
सिक्के, SPMCIL के स्वामित्व वाली 4 mints में ढाले जाते हैं — ये मुंबई, हैदराबाद, कोलकाता व नोएडा में स्थित हैं। RBI Act की धारा 38 के अनुसार सिक्के केवल RBI के माध्यम से ही प्रचलन हेतु जारी किए जाते हैं।
Currency Chest व Small Coin Depot
बैंक नोटों व रुपये के सिक्कों के वितरण को सुविधाजनक बनाने हेतु, RBI ने चुनिंदा scheduled banks को Currency Chest स्थापित करने हेतु अधिकृत किया है — ये भंडार गृह हैं जहाँ RBI की ओर से नोट व सिक्के, उनके operation क्षेत्र की शाखाओं में वितरण हेतु stock किए जाते हैं। 31/03/2026 तक 2599 currency chests थे।
Small Coin Depot — जैसे ₹1 से कम मूल्य के सिक्के अपने operation क्षेत्र की शाखाओं तक पहुंचाना। 31/03/2026 तक 2119 small coin depots थे।
RBI द्वारा अब तक छापा गया सबसे उच्च मूल्यवर्ग का नोट — 1938 में ₹10,000 का नोट था, जिसे जनवरी 1946 में विमुद्रीकृत (demonetize) किया गया। ₹10,000 का नोट पुनः 1954 में लाया गया — इन नोटों को 1978 में विमुद्रीकृत किया गया।
भारत में बैंक नोट छापने हेतु वर्तमान में प्रयुक्त कागज़ 100% कपास (cotton) से बना है।
भारतीय बैंक नोटों के भाषा पैनल (Language Panel) में — नोट के केंद्र में प्रमुखता से दिखाई गई हिंदी व नोट के पीछे अंग्रेज़ी के अतिरिक्त — 15 भाषाएं प्रदर्शित होती हैं।
Coinage Act, 2011 के तहत ₹1000 तक के मूल्यवर्ग में सिक्के जारी किए जा सकते हैं।
Star Series Banknote व Design निर्णय
"Star Series" नंबरिंग प्रणाली — 100 नोटों के packet में serially numbered बैंक नोटों में से किसी दोषपूर्ण रूप से छपे नोट के प्रतिस्थापन (replacement) हेतु अपनाई गई है। Star Series बैंक नोट अन्य नोटों जैसे ही होते हैं, परन्तु number panel में prefixes के बीच एक अतिरिक्त चिह्न — **star (\*)** — होता है।
नए बैंक नोट पर छपने वाली आकृति कौन तय करता है? — RBI Act की धारा 25 के अनुसार, बैंक नोटों का design, form व material वही होगा जिसे Central Board की सिफारिशों पर विचार करने के बाद केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत किया जाए।
Security Thread — ₹10, ₹20 व ₹50 मूल्यवर्ग के नोटों में चांदी-रंग की machine-readable security thread सामने की ओर windowed व पीछे की ओर पूर्ण रूप से embedded होती है। यह thread ultraviolet प्रकाश में दोनों तरफ पीले रंग में चमकती (fluoresce) है — प्रकाश के सामने रखने पर यह एक निरंतर रेखा के रूप में दिखाई देती है। ₹100 व उससे अधिक मूल्यवर्ग के नोटों में machine-readable windowed security thread होती है जो अलग-अलग कोणों से देखने पर रंग बदलती (colour-shifting) है।
MANI व अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
MANI (Mobile Aided Note Identifier) — RBI द्वारा लॉन्च किया गया एक mobile application, जो दृष्टिबाधित व्यक्तियों को भारतीय बैंक नोटों का मूल्यवर्ग पहचानने में सहायता करता है।
Non-payable बैंक नोट का क्या होता है? — ऐसे नोट प्राप्त करने वाले बैंकों द्वारा रखे जाते हैं व RBI को भेजे जाते हैं, जहाँ उन्हें नष्ट किया जाता है।
एक रुपये का नोट भारत सरकार का दायित्व भी है, जिस पर Finance Secretary के हस्ताक्षर होते हैं।
क्या RBI द्वारा जारी बैंक नोट किसी असेट (जैसे सोना) से समर्थित हैं? — RBI द्वारा जारी सभी बैंक नोट, RBI Act, 1934 की धारा 33 में परिभाषित assets — जैसे सोना, Government Securities व Foreign Currency Assets — से समर्थित (backed) हैं।
RBI द्वारा जारी प्रत्येक बैंक नोट (₹2, ₹5, ₹10, ₹20, ₹50, ₹100, ₹200, ₹500 व ₹2000) — जब तक प्रचलन से वापस न ले लिया जाए — legal tender बना रहता है।
Currency Note की सुरक्षा विशेषताएं (Security Features)
मुख्य सुरक्षा विशेषताएं — Fluorescence (चमक), Watermark (जल-चिह्न), Latent Image (गुप्त छवि)।
₹2000, ₹500, ₹200, ₹100, ₹50, ₹20 व ₹10 के बैंक नोटों का विस्तृत विवरण, design व सुरक्षा विशेषताओं का 360-डिग्री दृश्य — https://indiancurrency.rbi.org.in पर उपलब्ध है (यह पहले https://paisaboltahai.rbi.org.in को प्रतिस्थापित करता है)।
RBI वर्तमान में अपनी मुद्रा संबंधी कार्रवाइयां 19 Issue Offices के माध्यम से प्रबंधित करता है।
Currency Note पर चित्र (Images/Themes)
Angular Bleed Lines व पहचान चिह्न
दृष्टिबाधित व्यक्तियों की सुविधा हेतु Angular Bleed Lines व पहचान चिह्नों (Identification Marks) के आकार में वृद्धि की गई है — ₹100 में 2 blocks में 4 lines, ₹200 में दो circles के बीच 4 angular bleed lines, ₹500 में 3 blocks में 5 lines, ₹2000 में 7 lines।
हर नोट के सामने की ओर उभरी हुई छपाई (raised print/intaglio) में एक पहचान चिह्न होता है, जिसका आकार अलग-अलग मूल्यवर्ग हेतु अलग होता है — जैसे ₹2000 हेतु क्षैतिज आयत (horizontal rectangle), ₹500 हेतु वृत्त (circle), ₹200 हेतु उभरा हुआ चिह्न "H", व ₹100 हेतु त्रिभुज (triangle)।
जाली नोट (Forged Note)
संदिग्ध जाली नोट, counterfeit note या fake note — ऐसा कोई भी नोट है जिसमें असली भारतीय मुद्रा नोट की विशेषताएं नहीं होतीं।
जाली बैंक नोटों जैसे दस्तावेज़ बनाना या उनका उपयोग करना — Bhartiya Nyaya Sanhita (BNS), 2023 की विभिन्न धाराओं, जिसमें धारा 178 से 182 शामिल हैं, के तहत अपराध है — इसमें अपराध की गंभीरता के आधार पर न्यायालयों द्वारा जुर्माना या 7 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक या दोनों की सज़ा दी जा सकती है।
Clean Note Policy — परिचय व उद्देश्य
हमारे देश में कई लोगों की करेंसी नोट पर कुछ भी लिखने, नोट मोड़ने, या staple करने की बुरी आदत होती है, जिससे नोट खराब होता है व उसकी टिकाऊपन (durability) कम हो जाती है।
ऐसी घटनाओं से बचने हेतु RBI ने करेंसी नोटों की जीवन अवधि बढ़ाने के लिए 2001 में Clean Note Policy निर्देश शुरू किए (कदम 1999 से शुरू हुए)।
उद्देश्य — देश के नागरिकों को अच्छी गुणवत्ता वाले currency notes व coins उपलब्ध कराना; अर्थव्यवस्था में खराब नोटों के प्रचलन से बचना।
Clean Note Policy क्या है? — जनता से अनुरोध किया जाता है कि वे — बैंक नोटों पर staple न करें; बैंक नोटों पर न लिखें/rubber stamp या कोई अन्य चिह्न न लगाएं; बैंक नोटों का उपयोग माला/खिलौने बनाने, pandals/पूजा स्थल सजाने, या सामाजिक आयोजनों में हस्तियों पर उड़ाने (showering) हेतु न करें।
नोटों के प्रकार (Types of Notes)
Soiled Note — सामान्य टूट-फूट (wear & tear) के कारण गंदा हो चुका नोट; इसमें दो टुकड़ों वाला वह नोट भी शामिल है जिसमें दोनों टुकड़े एक ही नोट के हों व पूरा नोट बनाते हों (कोई आवश्यक विशेषता गायब न हो)।
Mutilated Note — ऐसा नोट जिसका कोई भाग गायब हो या जो 2 से अधिक टुकड़ों से बना हो।
Imperfect Note — ऐसा नोट जो पूर्णतः/आंशिक रूप से मिटा हुआ, सिकुड़ा हुआ, धुला हुआ, बदला हुआ या अपठनीय (indecipherable) हो, परन्तु mutilated note नहीं है।
Scribbled Note — जिस पर कुछ लिखा गया हो (राजनीतिक/धार्मिक नारे व संदेश वाले नोट को छोड़कर) — इसे बैंक काउंटर पर स्वीकार किया जा सकता है, परन्तु फिर से circulation हेतु जारी नहीं किया जाता।
Mismatched Note — किसी एक नोट के आधे भाग को किसी दूसरे नोट के आधे भाग से जोड़कर बनाया गया mutilated note — इसकी पहचान number, signature व/या अन्य security features की जांच से की जाती है।
Burnt/Charred/Stuck up Note — जल चुका नोट अपनी कुछ security features खो सकता है। जले व चिपके हुए नोट सामान्य टूट-फूट सहन नहीं कर पाते व अपनी कुछ/सभी security features खो सकते हैं — शाखाओं द्वारा exchange हेतु स्वीकार नहीं किए जाते।
Slogan/Stain वाले नोट व जानबूझकर काटे गए नोट
राजनीतिक स्वरूप के नारे/संदेश लिखे गए किसी भी नोट पर legal tender का दर्जा समाप्त हो जाता है व ऐसे नोट पर claim अस्वीकार कर दिया जाएगा। विरूपित (disfigured) नोट भी RBI Note Refund Rules अनुसार अस्वीकार किए जा सकते हैं।
Scribbling/stain (रंग के दाग सहित) वाले सभी बैंक नोट legal tender बने रहते हैं — ऐसे नोट किसी भी बैंक शाखा में जमा या exchange किए जा सकते हैं।
जो नोट जानबूझकर काटे गए, फाड़े गए, बदले गए या उनसे छेड़छाड़ की गई पाई जाती है — यदि वे भुगतान/exchange value हेतु प्रस्तुत किए जाएं तो उन्हें अस्वीकार किया जाना चाहिए।
Shrink Wrapping — currency notes के bundles की सुरक्षा हेतु उन्हें पतली polymer plastic film (shrink film) से लपेटने की प्रक्रिया।
जो नोट अत्यधिक भंगुर (brittle), जले या अविभाज्य रूप से एक साथ चिपके हुए हों, व इसलिए सामान्य हैंडलिंग सहन न कर सकें — उन्हें शाखाओं द्वारा exchange हेतु स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसे नोट अपने बैंक खाते के विवरण (a/c no, branch name, IFSC) के साथ Insured Post/Registered Parcel द्वारा RBI के Issue Office भेजे जा सकते हैं — adjudicated मूल्य खाते में credit होगा।
RBI (Note Refund) Rules, 2009
Delegation of Powers — (a) RBI Act, 1934 की धारा 28 को धारा 58(2) के साथ पढ़ने पर — किसी भी व्यक्ति को GOI या RBI से किसी खोए, चोरी हुए, mutilated या imperfect currency/बैंक नोट का मूल्य वसूलने का अधिकार नहीं है। हालांकि, mutilated आदि नोटों का मूल्य एक कृपा (grace) के रूप में refund किया जा सकता है।
(b) जनता की सुविधा हेतु — सभी बैंक शाखाओं को RBI (Note Refund) Rules, 2009 (संशोधन नियम 2018) के Rule 2(j) के तहत mutilated/defective नोटों को निःशुल्क exchange करने की शक्तियां दी गई हैं।
RBI Act, 1934 (RBI Act) की Preamble व धारा 45 तथा Banking Regulation Act, 1949 की धारा 35A के अनुसार, RBI मुद्रा प्रबंधन (currency management) के भाग के रूप में Clean Note Policy के उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु दिशानिर्देश/निर्देश जारी करता है।
Soiled Notes का Exchange
कम संख्या में प्रस्तुत नोट — जहाँ किसी व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत नोटों की संख्या 20 पीस तक व अधिकतम मूल्य ₹5000/दिन तक हो, वहाँ शाखा को counter पर निःशुल्क exchange करना चाहिए।
बड़ी संख्या में (bulk) प्रस्तुत नोट — जहाँ किसी व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत नोटों की संख्या 20 पीस या मूल्य ₹5000/दिन से अधिक हो, वहाँ शाखा receipt के विरुद्ध स्वीकार कर सकती है, राशि बाद में credit की जाएगी। भुगतान की संभावित तिथि receipt पर ही बता दी जाएगी, जो 7 दिन से अधिक नहीं होगी।
Mutilated Notes की Adjudication
₹50 से कम (₹20 तक) मूल्यवर्ग के नोट — यदि प्रस्तुत नोट के सबसे बड़े अखंड टुकड़े (single largest undivided piece) का क्षेत्रफल नोट के क्षेत्रफल के 50% से अधिक हो, तो पूर्ण मूल्य (full value) मिलेगा। यदि यह 50% या उससे कम हो, तो claim अस्वीकार किया जाएगा।
प्राप्त नोटों की acknowledgment ग्राहक को DN1 Form में दी जाती है; शाखा द्वारा भौतिक रूप से DN2 Register (mutilated notes प्राप्त, भुगतान व अस्वीकार का रजिस्टर) से सत्यापित किया जाता है।
₹50 व अधिक मूल्यवर्ग के नोट — adjudication —
Non-Chest Branches में Notes का निपटान
कम संख्या में प्रस्तुत नोट — जहाँ किसी व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत नोटों की संख्या 10 पीस तक हो, वहाँ non-chest शाखाओं को सामान्यतः NRR 2009 के Part III में निर्धारित प्रक्रिया अनुसार adjudicate करके counter पर exchange value का भुगतान करना चाहिए।
Bulk में प्रस्तुत नोट — जहाँ किसी व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत नोटों की संख्या 10 पीस से अधिक हो परन्तु मूल्य ₹5,000 से अधिक न हो, वहाँ बैंक शाखाएं receipt के विरुद्ध स्वीकार करेंगी (राशि बाद में credit होगी), या तेंडरर को अपने बैंक खाते के विवरण सहित insured post द्वारा नज़दीकी currency chest शाखा को नोट भेजने या वहाँ व्यक्तिगत रूप से exchange कराने की सलाह दी जाएगी।
Insured post द्वारा mutilated notes प्राप्त करने वाली currency chest branches, नोट प्राप्ति के 30 कैलेंडर दिन के भीतर भेजने वाले के खाते में electronic माध्यम से exchange value credit करेंगी।
यदि exchange हेतु प्रस्तुत soiled/mutilated/imperfect नोटों का मूल्य ₹50,000 से अधिक हो, तो बैंकों से सामान्य सावधानियां बरतने की अपेक्षा की जाती है।
Scribbled Notes का उपचार व Mismatched Note का भुगतान
राजनीतिक/धार्मिक स्वरूप के नारे/संदेश लिखे गए नोट पर legal tender का दर्जा समाप्त हो जाता है व claim, NRR 2009 के Rule 6(3)(iii) के तहत अस्वीकार किया जाएगा। इसी तरह, विरूपित/खराब किए गए नोट भी Rule 6(3)(ii) के तहत अस्वीकार किए जा सकते हैं।
जनता से प्राप्त ऐसे नोट पुनः circulation हेतु जारी नहीं किए जा सकते — इन्हें RBI कार्यालयों को आगे भेजने हेतु currency chest में remit किया जा सकता है।
Scribbling/stain (रंग के दाग सहित) वाले सभी बैंक नोट legal tender बने रहते हैं — इन्हें किसी भी बैंक शाखा में जमा/exchange किया जा सकता है।
Mismatched Note का भुगतान — a) ₹20 तक के मूल्यवर्ग के नोटों में — प्रस्तुत किए गए दो टुकड़ों में से बड़े टुकड़े का क्षेत्रफल मापा व Mutilated Note के प्रावधान अनुसार adjudicate किया जाएगा, छोटे टुकड़े को नज़रअंदाज़ किया जाएगा। b) यदि दोनों टुकड़ों में से कोई भी निर्धारित न्यूनतम क्षेत्रफल पूरा नहीं करता, तो claim अस्वीकार होगा। c) ₹50 व अधिक मूल्यवर्ग के मामले में — दोनों टुकड़ों को दो अलग-अलग claim के रूप में माना व निपटाया जाएगा।
PAY/PAID/REJECT Stamps
Mutilated notes को adjudicate करने के बाद, Prescribed Officer को dated 'PAY'/'PAID'/'REJECT' स्टाम्प पर हस्ताक्षर करके अपना आदेश दर्ज करना आवश्यक है। इन स्टाम्प्स पर संबंधित बैंक व शाखा का नाम भी होना चाहिए, तथा दुरुपयोग से बचने हेतु ये "Prescribed Officer" की अभिरक्षा में रखे जाने चाहिए।
Prescribed Officer को अपना pay order लाल स्याही (RED Ink) में दर्ज करना चाहिए।
अध्याय 19: Currency Chest प्रबंधन (नकद संचालन, प्रेषण व दंड)
नकद प्रबंधन — मूल बातें
नकद (Cash) को Head Cashier व Cash Incharge/Incumbent Incharge की संयुक्त अभिरक्षा (joint custody) में रखा जाता है — Double Lock Cash Safe में।
मुख्य क्षेत्र — Cash Remittance (नकद प्रेषण), Checking of Cash Balances (बैलेंस की जांच), तथा शाखा की Cash Retention Limit (नकद रखने की सीमा)।
RBI को Soiled Notes का प्रेषण (Remittance)
RBI को soiled notes की सभी remittances अनिवार्य रूप से Note Sorting Machine से पुनः गिनी व sort की जानी चाहिए तथा reject pocket में मिले संदिग्ध नोटों को remittance के साथ जाने वाले अधिकारी द्वारा हाथ से सत्यापित किया जाना चाहिए।
Soiled notes — प्रत्येक समान मूल्यवर्ग के 1000 पीस के bundles में remit किए जाने चाहिए, न कि 100-100 के 10 packets में (adjudicated notes को छोड़कर)।
निम्न मूल्यवर्ग के नोट (₹10, ₹20, ₹50) — अगली सूचना तक, 50,000 पीस के गुणकों में RBI भेजे जाते हैं।
RBI को Soiled Notes Remittance के लाभ — ₹50 व उससे कम मूल्यवर्ग की soiled notes remittance पर RBI द्वारा ₹2/packet का incentive दिया जाता है।
Currency chest में जमा/निकासी की न्यूनतम राशि ₹50,000, व इसके बाद ₹10,000 के गुणकों में।
Full/Half Value Notes की Remittance नियम
Currency Chests को full value paid notes, RBI के Issue Department को chest remittance मानते हुए, soiled notes remittance के साथ एक अलग sealed cover में भेजना होगा।
Half Value Paid Notes/Rejected Notes, अलग से sealed cover में पैक करके soiled notes remittance के साथ RBI भेजे जा सकते हैं, या Registered/Insured Post द्वारा अलग sealed cover में भेजे जा सकते हैं।
Half Value Paid Notes/Rejected Notes को soiled notes के साथ नहीं मिलाया जाना चाहिए व Invoice के अंत में अलग से दर्शाया जाना चाहिए।
2005 से पहले जारी सभी पुरानी series के बैंक नोट, Soiled Notes के रूप में RBI को remit किए जाने चाहिए।
Scribbled Bank Notes को soiled notes माना जाए व RBI को remit किया जाए।
RBI को soiled note remittances को chest द्वारा 'withdrawal' के रूप में नहीं दर्शाया जाना चाहिए। यदि ऐसी remittances गलती से 'withdrawal' के रूप में रिपोर्ट की जाती हैं, तो remittance के मूल्य व गलत रिपोर्टिंग की अवधि की परवाह किए बिना ₹50,000 का penalty लगाया जाएगा।
कमी (Shortage) पर दंड
i. ₹50 तक के मूल्यवर्ग के नोटों हेतु — हानि के अतिरिक्त ₹50/पीस।
ii. ₹100 व उससे अधिक मूल्यवर्ग के नोटों हेतु — हानि के अतिरिक्त, मूल्यवर्ग की राशि के बराबर/पीस।
iii. सभी मूल्यवर्ग के सिक्कों हेतु — हानि के अतिरिक्त, मूल्यवर्ग की राशि के बराबर/पीस।
कमी का पता चलते ही, पीस की संख्या की परवाह किए बिना, हानि की वसूली व penalty तुरंत लगाई जाएगी।
Soiled note remittances व currency chest balances में पाए गए mutilated notes (जानबूझकर काटे गए व built-up notes सहित) — मूल्यवर्ग की परवाह किए बिना हानि के अतिरिक्त ₹50/पीस।
Penal Interest की दर — देरी से रिपोर्टिंग/गलत रिपोर्टिंग/रिपोर्टिंग न करने/chest balances में अपात्र राशि शामिल करने की अवधि हेतु प्रचलित Bank Rate से 2% अधिक दर पर लगाई जाएगी (T+0 आधार पर गणना)।
Operational Guidelines के गैर-अनुपालन पर दंड (RBI अधिकारियों द्वारा पहचाने जाने पर)
उदाहरण — a) CCTV का काम न करना/गैर-अनुपालन b) शाखा का नकद/दस्तावेज़ strong room (CC vault) में रखना c) नोट sorting हेतु Note Sorting Machines (NSMs) का उपयोग न करना (₹100 व उससे अधिक मूल्यवर्ग के counter पर प्राप्त या chest/RBI को remit किए जाने वाले नोटों की sorting हेतु उपयोग न करना) d) currency chest balances का surprise verification न करना — (i) संचालन से असंबद्ध अधिकारियों द्वारा द्विमासिक (bi-monthly) अंतराल पर, व (ii) Controlling Office के अधिकारियों द्वारा छमाही (six-monthly) अंतराल पर।
Penalty — 1) प्रत्येक अनियमितता (irregularity) की घटना हेतु ₹5,000; लगातार निरीक्षण चक्रों में या उससे पहले अनियमितता की पुनरावृत्ति (repetition) होने पर penalty बढ़ाकर ₹10,000 कर दी जाएगी, जो तुरंत लगाई जाएगी।
किसी भी ATM में महीने में 10 घंटे से अधिक cash-out रहने पर प्रति ATM ₹10,000 का flat penalty लगेगा।
सभी currency chest diversions (एक ही बैंक के chests के बीच व अलग-अलग बैंकों के chests के बीच दोनों) — CyM-CC Portal के 'Diversion Module' के माध्यम से रिपोर्ट किए जाने चाहिए। Diversion भेजने वाला CC entry initiate करेगा, प्राप्त करने वाला CC उसे acknowledge करेगा। Diversions को deposit/withdrawal के रूप में रिपोर्ट नहीं किया जाना चाहिए — ऐसी गलत रिपोर्टिंग पर ₹50,000 का penalty लगेगा।
Agreement के उल्लंघन/सेवा में कमी पर दंड
उदाहरण — a) stock होने के बावजूद जनता को counter पर सिक्के जारी न करना b) जनता द्वारा प्रस्तुत soiled/mutilated/imperfect नोटों को exchange करने से मना करना c) अन्य बैंकों/linked branches को सुविधाओं/सेवाओं से वंचित करना d) जनता व linked बैंक शाखाओं द्वारा प्रस्तुत निम्न मूल्यवर्ग (₹50 व उससे कम) के नोटों को exchange/जमा हेतु स्वीकार न करना e) currency chest शाखाओं द्वारा तैयार re-issuable packets में RBI द्वारा mutilated, built-up, counterfeit notes पाया जाना।
Penalty — 1) agreement के किसी भी उल्लंघन या सेवा में कमी हेतु ₹10,000 2) यदि किसी कैलेंडर वर्ष में agreement के उल्लंघन की 5 से अधिक घटनाएं हों, तो ₹5 लाख — यह Penalty तुरंत लगाई जाएगी।
अनियमितता की प्रकृति तय करने वाला Competent Authority — उस Regional Office के Issue Department के Officer-in-Charge होंगे जिनके अधिकार क्षेत्र में defaulting currency chest/बैंक शाखा स्थित है।
Re-issuable Notes — रंग कोडिंग
Re-issuable notes के लिए — White (सफेद) रंग का उपयोग होता है।
मूल्यवर्ग अनुसार रंग कोडिंग — क्षेत्रीय functionaries की सुविधा हेतु, प्रत्येक मूल्यवर्ग हेतु रंग, संबंधित Currency Note के रंग के अनुसार चुना जाता है (जैसे ₹500 — Stone Grey, ₹50 — Fluorescent Blue)।
Counterfeit Note Detection — दिशानिर्देश
RBI, Banking Regulation Act, 1949 की धारा 35A व धारा 56 के तहत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, यह संतुष्ट होकर कि सार्वजनिक हित में ऐसा करना आवश्यक व उपयुक्त है, यह Directions जारी करता है।
Counter पर प्रस्तुत बैंक नोटों की मशीनों द्वारा प्रामाणिकता (authenticity) जांची जानी चाहिए।
Counterfeit नोटों के लिए ग्राहक के खाते में कोई credit नहीं दिया जाना चाहिए।
किसी भी स्थिति में, counterfeit नोट न तो तेंडरर को वापस किए जाने चाहिए, न ही बैंक शाखाओं/treasuries द्वारा नष्ट किए जाने चाहिए।
Counterfeit Notes को Impound करने का अधिकार — 1) सभी बैंक 2) Reserve Bank of India के Issue Offices।
ATM dispensations/counter पर disbursement में पाए गए Counterfeit नोटों हेतु प्रति घटना ₹10,000 का monetary penalty लगाया जाएगा।
रिपोर्टिंग — Counterfeit Notes
बैंक की सभी शाखाओं द्वारा पहचाने गए Counterfeit Notes का data मासिक आधार पर निर्धारित प्रारूप (Annex IV) में — महीने के दौरान बैंक शाखाओं में पहचाने गए Counterfeit Notes का विवरण दिखाते हुए — संकलित (compile) करके, अगले महीने की 7 तारीख तक संबंधित कार्यालयों को भेजा जाना चाहिए।
बैंक की मासिक consolidated report/FIR की एक प्रति बैंक के Head Office में गठित Forged Note Vigilance (FNV) Cell को भेजी जानी चाहिए।
Counterfeit नोट पर "COUNTERFEIT BANKNOTE" की मुहर, 5cm x 5cm के uniform आकार में लगाई जाएगी।
प्रत्येक impound किए गए नोट को प्रमाणीकरण (authentication) सहित एक अलग रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा।
प्रत्येक बैंक, Counterfeit Note detection से जुड़ी सभी गतिविधियों हेतु संपर्क बिंदु के रूप में कार्य करने हेतु जिलावार एक Nodal Bank Officer नामित करेगा व इसकी सूचना संबंधित RBI Issue Office व पुलिस प्राधिकरणों को देगा।
पुलिस को रिपोर्टिंग व सुरक्षा
एक ही लेनदेन में 4 पीस तक Counterfeit Notes पहचाने जाने पर — Nodal Bank Officer द्वारा महीने के अंत में संदिग्ध Counterfeit Notes सहित एक consolidated report (Annex III) पुलिस प्राधिकरण/Nodal Police Station को भेजी जानी चाहिए।
एक ही लेनदेन में 5 या अधिक पीस Counterfeit Notes पहचाने जाने पर — Nodal Bank Officer द्वारा Counterfeit Notes तुरंत स्थानीय पुलिस प्राधिकरण/Nodal Police Station को FIR (निर्धारित प्रारूप Annex IV में) दाखिल करके जांच हेतु आगे भेजी जानी चाहिए।
पुलिस प्राधिकरणों से प्राप्त Counterfeit Notes का संरक्षण — शाखाओं में इनका सत्यापन संबंधित बैंक कार्यालय के Officer-in-Charge द्वारा छमाही आधार पर (31 मार्च व 30 सितंबर) किया जाना चाहिए। इन्हें पुलिस प्राधिकरणों से प्राप्ति की तिथि से 3 वर्ष तक संरक्षित रखा जाना चाहिए।
बैंक का FNV Cell, RBI को data रिपोर्ट करेगा — प्रत्येक छमाही (मार्च व सितंबर के अंत में) की समाप्ति से एक पखवाड़े (fortnight) के भीतर, निर्धारित प्रारूप (Annex V) में email द्वारा, RBI के Chief General Manager, Department of Currency Management को status report प्रस्तुत करेगा।
Strong Room संबंधी प्रक्रिया
Strong room को नकद निकालने/जमा करने हेतु खोलने से पहले, शाखा का मुख्य द्वार बंद कर दिया जाना चाहिए, व नकद से असंबद्ध व्यक्तियों को strong room तक पहुंच की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
Strong room में प्रवेश करने के बाद व cash safe खोलने से पहले, strong room का grill door अंदर से बंद किया जाना चाहिए।
इसलिए यह निर्णय लिया गया है कि ₹100 व उससे अधिक मूल्यवर्ग के बैंक नोट, बैंकों द्वारा counter/ATM के माध्यम से केवल तभी पुनः जारी (re-issue) किए जाएं जब इन बैंक नोटों की प्रामाणिकता/genuineness व fitness note sorting machines द्वारा उचित रूप से जांची गई हो।
2005 से पहले जारी सभी पुरानी series के बैंक नोट पूरी तरह से circulation से वापस लिए जाएंगे व ATM या counter लेनदेन के जरिए पुनः जारी नहीं किए जाएंगे। ऐसे नोट sort करके Linkage Scheme के तहत currency chests में जमा किए जाएंगे या disposal हेतु निकटतम RBI Issue Office भेजे जाएंगे।
नकद प्रेषण (Remittance) — नियम
₹20 लाख से अधिक की remittance केवल Cash Van/CCV (Customized Cash Vans) के माध्यम से ही की जाएगी।
₹5 लाख से अधिक की remittances हेतु container के लिए dual keys का उपयोग किया जा सकता है — ऐसे मामलों में दोनों चाबियां क्रमशः SWO व remittance के साथ जाने वाले अधिकारी द्वारा रखी व साथ ले जाई जानी चाहिए।
Remittance के विस्तृत विवरण वाला एक note, जो Head Cashier व Cash Incharge द्वारा प्रमाणित (authenticated) हो, की 3 प्रतियां तैयार की जाएंगी — एक प्रति box में रखी जाएगी, दूसरी remittance के साथ जाने वाले अधिकारी को दी जाएगी, तथा तीसरी संबंधित voucher के साथ लगाई जाएगी।
नकद प्रेषण — सुरक्षा प्रावधान
सिविल अशांति (civil unrest), दंगे, अशांति व अस्थिर परिस्थितियों के दौरान शाखा से कोई नकद बाहर नहीं भेजी जानी चाहिए। जहाँ परिस्थितियां सामान्य हों, वहाँ ऐसी remittance की जा सकती है।
बैंक की मौजूदा Banker Indemnity Insurance Policy के अनुसार उचित escort व सुरक्षा प्रबंध उपलब्ध होने चाहिए।
नकद के बक्सों (cash boxes) को वाहन की body में lock व iron chain से उचित रूप से सुरक्षित किया जाना चाहिए।
नकद की सुरक्षा करने वाले सशस्त्र गार्ड्स (Armed Guards) को नकद की loading व unloading के दौरान बंदूक के साथ किसी सामरिक स्थान (vantage point) पर तैनात होकर सतर्क रहना चाहिए। उन्हें नकद के बक्से ढोने हेतु उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
जहाँ कोई transport (बैंक का या किराए का) उपलब्ध न हो व भेजने वाले कार्यालय व प्राप्त करने वाले कार्यालय के बीच दूरी कम हो, वहाँ remittance पैदल भेजी जा सकती है — ऐसे मामलों में remittance ₹2 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए।
Escort Team की संरचना
RIT (Remittance in Transit) Entries का समायोजन
"Remittance in Transit" संबंधी बकाया entries पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने हेतु एक register शुरू किया गया है, जिसमें विवरण, समायोजन की तिथि, Accountant/Manager के initials, progressive balance व समायोजन हेतु उठाए गए कदम दर्ज किए जाते हैं।
Currency Chests को अपने सभी लेनदेन CyM-CC portal के माध्यम से उसी दिन शाम 7 बजे तक अनिवार्य रूप से रिपोर्ट करने होंगे।
Chests में नकद हैंडलिंग संचालन CCTV में कैद (capture) किए जाएंगे व इनकी रिकॉर्डिंग कम से कम 90 दिन तक संरक्षित रखी जाएगी।
विभिन्न Incentives
a. Soiled notes का exchange — ₹50 तक के soiled notes के exchange हेतु ₹2/packet।
b. Mutilated notes का Adjudication — ₹2/piece।
c. Counter पर सिक्कों का वितरण (Distribution of Coins) — i. counter पर सिक्कों के वितरण हेतु ₹65/bag ii. यह incentive currency chest से net withdrawal के आधार पर, बैंकों से claim की प्रतीक्षा किए बिना दिया जाएगा iii. बैंकों को यह सुनिश्चित करने हेतु checks & balances प्रणाली अपनानी चाहिए कि सिक्के retail ग्राहकों को छोटी मात्रा में वितरित हों, bulk में नहीं iv. सिक्कों का वितरण RBI के Regional Offices द्वारा currency chest निरीक्षण/शाखाओं की incognito visits के माध्यम से सत्यापित किया जाएगा।
Rural व Semi-urban क्षेत्रों में सिक्का वितरण हेतु, Concurrent Auditor Certificate प्रस्तुत करने पर, अतिरिक्त ₹10/bag का incentive मिलेगा।
Currency Chest में नकद जमा करने हेतु Non-Linkage शाखाओं के लिए Service Charges — बड़े आधुनिक CC हेतु ₹11/100 पीस, अन्य CC हेतु ₹8/100 पीस।
Coin Vending Machines की स्थापना
मौजूदा incentive स्तर — a) पूंजीगत व्यय (capital expenditure) का reimbursement — Urban/Metro केंद्रों हेतु 50%, Rural व Semi-urban केंद्रों हेतु 75% b) Revenue cost का reimbursement — currency chest रखने वाले commercial banks पर लागू ₹25/bag दर पर — अब यह सभी scheduled commercial banks (urban co-op banks व RRBs सहित, चाहे वे currency chest रखते हों या नहीं) पर लागू होगा।
Incentive गणना हेतु 'एक Bag' की परिभाषा — I. 50 पैसे के 5000 सिक्के II. ₹1, ₹2 या ₹5 के 2500 सिक्के III. ₹10 या ₹20 के 2000 सिक्के — इनमें से कोई भी एक "bag" माना जाएगा।
Soiled Notes Remittance में Counterfeit Notes — Penalty संरचना
₹100+ मूल्यवर्ग हेतु CPM आधारित Penalty — CPM < 5: notional value का 100%; 5 ≤ CPM < 20: notional value का 150%; CPM ≥ 20: notional value का 200%।
CPM फॉर्मूला = (₹100+ मूल्यवर्ग में counterfeit notes की संख्या × 10,00,000) ÷ (remittance में ₹100+ मूल्यवर्ग के कुल पीस की संख्या)।
Currency Chest — सत्यापन (Verification) समय-सारणी
Visit की रिपोर्ट/स्थिति, visit के 15 दिन के भीतर नियमित आधार पर GBD (Operations) को प्रस्तुत की जानी चाहिए।
अध्याय 20: कानूनी प्रकार के ग्राहक व Beneficial Owner
Customer Identification Procedure — CDD की अवधारणा
इसका अर्थ है Client Due Diligence उपायों का पालन करना — अर्थात ग्राहक व Beneficial Owner की पहचान करना व सत्यापित करना।
Customer — KYC के दृष्टिकोण से, customer वह व्यक्ति है जो बैंक के साथ किसी वित्तीय लेनदेन/गतिविधि में संलग्न है।
Beneficial Owner — वह प्राकृतिक व्यक्ति(यां) है/हैं, जो स्वामित्व/नियंत्रणकारी स्वामित्व हित (controlling ownership interest) के लाभ प्राप्त करते हैं।
Identity क्या है? — Identity का सामान्य अर्थ है ऐसे गुणों (attributes) का समूह जो मिलकर किसी 'natural' या 'legal' व्यक्ति की विशिष्ट पहचान स्थापित करते हैं — इन्हें "identifiers" कहा जाता है, जो दो प्रकार के हैं — (A) Primary Identifiers (पूरा नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि, पासपोर्ट नंबर, वोटर ID, driving license, PAN नंबर) — विशिष्ट पहचान स्थापित करने में सहायक; (B) Secondary Identifiers (पता, स्थान, राष्ट्रीयता आदि) — पहचान को और परिष्कृत करने में सहायक। ग्राहक पहचान एक सतत (ongoing) प्रक्रिया है, केवल आवेदन के समय तक सीमित नहीं।
CIP कब आवश्यक होती है
गैर-खाताधारक (non-account based) ग्राहक हेतु लेनदेन करते समय, जहाँ राशि ₹50,000 के बराबर या अधिक हो।
जब बैंक को विश्वास हो कि कोई ग्राहक (खाताधारक या walk-in) जानबूझकर किसी लेनदेन को ₹50,000 की सीमा से कम की कई लेनदेन में विभाजित (structuring) कर रहा है।
बैंक यह सुनिश्चित करेगा कि खाता खोलते समय "introduction" (परिचय) नहीं मांगा जाए।
Account-based संबंध की शुरुआत — अर्थात जब कोई ग्राहक बैंक में खाता खोलने हेतु आता है।
गैर-खाताधारक ग्राहकों हेतु कोई भी International Money Transfer संचालन करते समय।
जब Customer Identification Data की प्रामाणिकता या पर्याप्तता (adequacy) को लेकर संदेह हो।
Third Party Products बेचते समय।
सामान्य व्यवहार के रूप में, Customer Identification Procedure हेतु स्वीकार किए गए दस्तावेज़ ग्राहक द्वारा स्वयं-प्रमाणित (self-attested) होने चाहिए।
CIP — Beneficial Owner
किसी ऐसे व्यक्ति का खाता खोलते समय जो प्राकृतिक व्यक्ति (Individual) नहीं है — जैसे Company, Partnership Firms, Trusts, HUF, Body of Individuals आदि — customer due diligence प्रक्रिया पूरी करने हेतु Beneficial Owner(s) की पहचान की जानी चाहिए।
Demat/Trading Account — Exchange पर trading हेतु अनिवार्य KYC attributes — सभी Demat खाताधारकों को अपने Demat accounts से trading/investing जारी रखने हेतु 6 KYC attributes को अनिवार्य रूप से अद्यतन करना होगा।
Company के प्रकार
Incorporation के आधार पर — Statutory Companies, Registered Companies।
Liability के आधार पर — Companies Limited by Shares, Unlimited Companies।
Membership के आधार पर — Private Limited Company, Public Limited Company।
Shareholding के आधार पर — Holding Companies, Subsidiary Companies।
Company (Companies Act, 2013)
1) Company एक juristic person है (भारतीय Companies Act द्वारा निर्मित) — इसकी corporate personality इसे बनाने वाले सभी सदस्यों से अलग होती है।
2) Ministry of Corporate Affairs (MCA) मुख्यतः Companies Act 2013 के प्रशासन से संबंधित है।
3) Board of Directors — प्रत्येक कंपनी में directors के रूप में individuals की एक Board of Directors होनी चाहिए — अधिकतम 15 directors (विशेष प्रस्ताव पारित करके कंपनी इससे अधिक directors नियुक्त कर सकती है)।
किसी व्यक्ति को अधिकतम 10 public companies में director के रूप में नियुक्त किया जा सकता है।
Company — सदस्य व Directors की संख्या
Public Company के शेयर स्वतंत्र रूप से हस्तांतरणीय (freely transferable) होते हैं।
Private Company के शेयरों में हस्तांतरण के अधिकार पर प्रतिबंध होता है।
किसी कंपनी में directors की अधिकतम संख्या की कोई सीमा होना आवश्यक नहीं है — अधिकतम संख्या की सीमा कंपनी द्वारा अपने Articles of Association में तय की जानी चाहिए।
Small Company की परिभाषा (Companies Act, 2013 की धारा 2(85), 01/12/2025 से संशोधित) — कंपनी "Small Company" तभी मानी जाएगी जब — a) Paid-up share capital ₹10 करोड़ से कम या बराबर, तथा b) Turnover ₹100 करोड़ से कम या बराबर हो। (Ministry of Corporate Affairs ने Companies (Specification of Definition Details) Amendment Rules, 2025 अधिसूचित करके Small Company निर्धारित करने के वित्तीय मानदंडों में संशोधन किया है)।
Company खाता खोलने हेतु आवश्यक दस्तावेज़
1) Memorandum of Association (MOA) 2) Articles of Association (AOA) 3) Certificate of Incorporation 4) PAN।
5) Board of Directors का प्रस्ताव (resolution) व अपने managers/officers/employees को इसकी ओर से लेनदेन हेतु दिया गया power of attorney।
6) पंजीकृत कार्यालय (registered office) व व्यवसाय का मुख्य स्थान (यदि अलग हो)।
7) निम्न के संबंध में — व्यक्तिगत ग्राहक हेतु आवश्यक दस्तावेज़ (पूर्व अध्याय में चर्चित) एकत्रित किए जाएं — a) कंपनी की ओर से लेनदेन हेतु attorney रखने वाले प्राकृतिक व्यक्ति b) कंपनी के Beneficial Owner के रूप में पहचाने गए प्राकृतिक व्यक्ति।
Certificate of Incorporation व MOA
Certificate of Incorporation — कंपनी/corporation के गठन से संबंधित एक कानूनी दस्तावेज़/License है — इसे कंपनी का 'birth certificate' भी कहा जाता है, Registrar of Companies द्वारा जारी किया जाता है।
Memorandum of Association (MOA) [Section 2(56)] — यह कंपनी की शक्तियों को सीमित करता है व उसके वैधता (validity) के दायरे व शक्तियों को रेखांकित करता है। इसमें निम्न शामिल हैं — (a) कंपनी का नाम ("Limited" या "Private Limited" के साथ समाप्त होने वाला) (b) पंजीकृत कार्यालय का राज्य (c) कंपनी के उद्देश्य (Objects) (d) सदस्यों का दायित्व (Liability) (e) Share Capital का विवरण।
Articles of Association (AOA)
AOA [Section 2(5)] — परिभाषा: कंपनी के संचालन हेतु आंतरिक विनियम व by-laws।
Section 5(1) — इसमें कंपनी के प्रबंधन (management) हेतु विनियम शामिल होने चाहिए।
महत्व — यह कंपनी के governing body के दायित्वों, अधिकारों व शक्तियों को नियंत्रित करता है, व व्यावसायिक संचालन के तरीके व स्वरूप को रेखांकित करता है।
AOA में शामिल हैं — shareholders/guarantors का सीमित दायित्व; निर्णय कैसे लिए जाते हैं व company directors की शक्तियां; shareholders/members के अधिकार व जिम्मेदारियां; board meetings व general meetings हेतु आवश्यकताएं; dividend की स्वीकृति व जारी करने की प्रक्रिया; company officers की hiring व removal की प्रक्रिया; company shares जारी करने व हस्तांतरण की प्रक्रिया; सरकार के साथ पंजीकरण व corporate क्षेत्र में कानूनी दर्जा प्राप्त करने की प्रक्रिया।
पदानुक्रम (Hierarchy) — AOA, MOA व Companies Act के अधीनस्थ (subordinate) है। किसी टकराव (conflict) की स्थिति में, MOA के प्रावधान प्रभावी होंगे।
Beneficial Owner (Controlling Ownership)
Beneficial Owner वह प्राकृतिक व्यक्ति(यां) है/हैं, जो अकेले या मिलकर कार्य करते हुए Controlling Ownership Interest रखते हैं, या अन्य साधनों द्वारा नियंत्रण (control) रखते हैं।
Controlling Ownership Interest का अर्थ है — कंपनी/trust/institute के शेयरों, capital या profits के एक निश्चित प्रतिशत का स्वामित्व/उस पर हक (entitlement)।
Control में शामिल है — अधिकांश directors नियुक्त करने का अधिकार, या shareholding, management rights, shareholders agreements या voting agreements के आधार पर प्रबंधन/नीतिगत निर्णयों को नियंत्रित करने का अधिकार।
बैंक यह सुनिश्चित करेगा कि Non-Profit Organizations वाले ग्राहकों के मामले में, ऐसे ग्राहकों का विवरण NITI Aayog के DARPAN Portal पर पंजीकृत हो।
Partnership Firm — आवश्यक दस्तावेज़
1) Registration Certificate 2) Partnership Deed (Registered) 3) Firm का PAN।
4) यदि firm का खाता उसके किसी Manager, officer या employee द्वारा संचालित किया जाना है, तो यह account opening form पर उल्लिखित होना चाहिए — ऐसे Manager/officer/employee को firm की ओर से लेनदेन हेतु दिए गए power of attorney की प्रति भी प्राप्त की जानी चाहिए।
5) सभी partners के नाम।
6) निम्न के संबंध में व्यक्तिगत ग्राहक हेतु आवश्यक दस्तावेज़ एकत्रित किए जाएं — a) firm की ओर से लेनदेन हेतु attorney रखने वाले प्राकृतिक व्यक्ति b) Partnership Firm के Beneficial Owner के रूप में पहचाने गए प्राकृतिक व्यक्ति।
Partnership Firm — विशेष नियम
दिवालिया Partner (Insolvent Partner) — किसी दिवालिया घोषित partner द्वारा हस्ताक्षरित cheques का भुगतान तब तक नहीं किया जाना चाहिए जब तक इसकी पुष्टि अन्य solvent partners द्वारा न की जाए।
Partner की Lunacy — किसी partner की lunacy के बाद भी, अन्य partners द्वारा हस्ताक्षरित cheques का भुगतान किया जा सकता है। हालांकि, विक्षिप्त (lunatic) partner द्वारा हस्ताक्षरित cheque को अवैतनिक (unpaid) लौटाया जाना चाहिए।
अशिक्षित Partner (Illiterate Partner) — अशिक्षित partner को खाता संचालित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
Partners की मृत्यु/दिवालियापन/सेवानिवृत्ति — एक या अधिक partners की मृत्यु, दिवालियापन या सेवानिवृत्ति पर firm स्वतः भंग (dissolve) हो जाती है, जब तक कि partnership deed में इस आशय का विशेष प्रावधान न हो कि शेष partners ऐसी परिस्थिति में partnership जारी रखेंगे। इसके लिए कोई सार्वजनिक सूचना (public notice) आवश्यक नहीं है।
याद रखें (Remember)
अपंजीकृत (Unregistered) trusts/partnership firms को "Unincorporated Association" शब्द के अंतर्गत शामिल किया जाएगा।
"Body of Individuals" शब्द में societies भी शामिल हैं।
जहाँ Company, Partnership या Unincorporated Association/Body of Individuals के मामले में, निर्धारित शर्तों अनुसार कोई Natural Person पहचाना न जा सके, वहाँ Beneficial Owner वह relevant प्राकृतिक व्यक्ति होगा जो Senior Managing Official/पद पर हो।
Trust — आवश्यक दस्तावेज़
1) Registration Certificate 2) Trust Deed (Registered) 3) PAN/Form-60।
4) लाभार्थियों (beneficiaries), trustees, settlor, protector (यदि कोई हो), व trust के authors के नाम।
5) यदि Trust का खाता इसके कुछ ही trustees द्वारा संचालित किया जाना है (सभी द्वारा नहीं), तो यह account opening form पर उल्लिखित होना चाहिए — ऐसे trustees को दिए गए power of attorney की प्रति भी प्राप्त की जानी चाहिए।
6) निम्न के संबंध में व्यक्तिगत ग्राहक हेतु आवश्यक दस्तावेज़ एकत्रित किए जाएं — a) attorney रखने वाले प्राकृतिक व्यक्ति b) Beneficial Owner के रूप में पहचाने गए प्राकृतिक व्यक्ति।
Trust — Beneficial Owner व परिभाषाएं
Trust के मामले में, Beneficial Owners निम्न हैं — (i) Trust का author (ii) Trustees (iii) Trust में 10% या अधिक हित (interest) रखने वाले beneficiaries (iv) Trust पर अंतिम प्रभावी नियंत्रण (ultimate effective control) रखने वाला कोई अन्य प्राकृतिक व्यक्ति।
Trustee — जो व्यक्ति विश्वास (confidence) स्वीकार करता है, उसे 'Trustee' कहा जाता है।
Beneficiary — जिस व्यक्ति के लाभ हेतु विश्वास स्वीकार किया जाता है, उसे 'Beneficiary' कहा जाता है।
Author of the Trust — जो व्यक्ति विश्वास व्यक्त करता है/घोषित करता है, वह 'Author of the Trust' है।
Trusts, Indian Trust Act, 1882 द्वारा शासित होते हैं। Trust किसी भी वैध उद्देश्य हेतु बनाया जा सकता है।
Private Trusts — एक या अधिक निश्चित (ascertained) व्यक्तियों के लाभ हेतु गठित; Indian Trusts Act, 1882 द्वारा शासित।
सार्वजनिक Trusts — किसी वर्ग या आम जनता के लाभ हेतु बनाए गए Trust; सामान्यतः ऐसे Trust charitable, educational, religious या scientific उद्देश्यों हेतु बनाए जाने चाहिए।
Proprietorship Firm — आवश्यक दस्तावेज़
Proprietor के KYC दस्तावेज़ों के अतिरिक्त, proprietary firm के नाम पर निम्न में से कोई दो दस्तावेज़ (concern के नाम, पते व गतिविधि का प्रमाण) —
Registration Certificate (पंजीकृत concern के मामले में); Shop & Establishment Act के तहत नगरपालिका प्राधिकरण द्वारा जारी Certificate/License; Sales व Income Tax Returns; CST/VAT Certificate; Sales Tax/Service Tax/Professional Tax प्राधिकरणों द्वारा जारी Certificate/registration document; statute के तहत गठित किसी professional body द्वारा proprietary concern के नाम जारी License/practice का certificate।
पूर्ण Income Tax Return (केवल acknowledgement नहीं), जिसमें sole proprietor के नाम ऐसे दस्तावेज़ शामिल हों जिनमें firm की आय दर्शाई गई हो, विधिवत रूप से Income Tax प्राधिकरणों द्वारा प्रमाणित/acknowledged हो।
Unincorporated Association/Body of Individuals (Societies) — आवश्यक दस्तावेज़
1) ऐसी association या body of individuals की managing body का resolution।
2) इसकी ओर से लेनदेन हेतु दिया गया power of attorney।
3) Unincorporated Association या Body of Individuals का PAN/Form-60।
4) ऐसी जानकारी जो बैंक को ऐसी association/body of individuals का कानूनी अस्तित्व सामूहिक रूप से स्थापित करने हेतु आवश्यक हो।
5) निम्न के संबंध में व्यक्तिगत ग्राहक हेतु आवश्यक दस्तावेज़ एकत्रित किए जाएं — a) attorney रखने वाले प्राकृतिक व्यक्ति b) Beneficial Owner के रूप में पहचाने गए प्राकृतिक व्यक्ति।
Juridical Persons (अन्य, जो पहले शामिल न हों) — आवश्यक दस्तावेज़
जैसे societies, universities व village panchayats जैसी local bodies, या जो ऐसे juridical person/individual/trust की ओर से कार्य करने का दावा करता हो — निम्न दस्तावेज़ों (या समकक्ष e-documents) की प्रमाणित प्रतियां प्राप्त व सत्यापित की जानी चाहिए —
1) entity की ओर से कार्य करने हेतु अधिकृत व्यक्ति का नाम दर्शाने वाला दस्तावेज़।
2) ऐसी जानकारी जो बैंक को ऐसे juridical persons का कानूनी अस्तित्व सामूहिक रूप से स्थापित करने हेतु आवश्यक हो।
3) व्यक्तिगत ग्राहक हेतु आवश्यक दस्तावेज़ — a) attorney रखने वाले प्राकृतिक व्यक्ति b) Beneficial Owner के रूप में पहचाने गए प्राकृतिक व्यक्ति।
HUF — आवश्यक दस्तावेज़
1) HUF व इसके Karta की घोषणा (Beneficial Owner — KARTA)।
2) PAN/Form 60।
3) Karta व सभी Major Coparceners के संबंध में — व्यक्तियों हेतु (पूर्व अध्याय में चर्चित) आवश्यक दस्तावेज़ एकत्रित किए जाएं।
HUF — विस्तृत जानकारी
HUF का अर्थ है Hindu Undivided Family — जिसमें परिवार के सदस्य मिलकर एक HUF बनाते हैं। परिवार का सबसे वरिष्ठ सदस्य Karta कहलाता है, जो HUF के सभी मामलों हेतु उत्तरदायी होता है।
मुख्यतः दो प्रकार के कानूनी स्कूल (schools) हैं जो Hindu Undivided Family को नियंत्रित करते हैं — Mitakshara Law (भारत के अधिकांश भागों में लागू) व Dayabhaga Law (बंगाल व असम राज्यों में लागू)।
कोई बच्चा जन्म के साथ ही स्वतः HUF का सदस्य बन जाता है।
Hindu Undivided Family ('HUF') को Income-tax Act, 1961 की धारा 2(31) के तहत एक 'व्यक्ति (person)' माना जाता है — इसका अपना अलग बैंक खाता व PAN होता है। Act के तहत assessment के प्रयोजन हेतु HUF एक अलग entity है (सामान्यतः इसका दर्जा व्यक्तियों के समूह के रूप में होता है)।
Hindu Law के अनुसार, HUF एक ऐसा परिवार है जिसमें एक common ancestor से वंशानुगत रूप से जुड़े सभी व्यक्ति शामिल होते हैं, तथा उनकी पत्नियां व अविवाहित बेटियां भी शामिल होती हैं। HUF किसी अनुबंध (contract) के तहत नहीं बनाया जा सकता — यह किसी Hindu परिवार में स्वतः बन जाता है।
बौद्ध, जैन व सिख परिवार, यद्यपि Hindu Law द्वारा शासित नहीं होते, फिर भी Act के तहत HUF के रूप में माने जाते हैं।
बेटियां भी (जन्म से समावेशन/inclusion by birth के आधार पर) Co-parceners का दर्जा प्राप्त करती हैं, जबकि पत्नियां केवल members होती हैं।
Karta का दायित्व असीमित (unlimited) होता है व co-parceners का दायित्व संयुक्त पारिवारिक संपत्ति (joint family estate) में उनके हिस्से तक सीमित होता है।
HUF Membership
HUF की सदस्यता की कोई सीमा नहीं है — सदस्यता केवल जन्म (Birth) के आधार पर ही शामिल होती है।
Hindu Succession Act, 2005 की धारा 6(1) के अनुसार बेटियों को भी Co-parceners बनाया गया है।
Limited Liability Partnership (LLP)
1) LLP एक वैकल्पिक कॉर्पोरेट व्यावसायिक स्वरूप है जो कंपनी के limited liability व partnership की flexibility दोनों के लाभ देता है। Partners में बदलाव के बावजूद LLP का अस्तित्व जारी रह सकता है।
2) यह अपने नाम पर अनुबंध कर सकती है व संपत्ति रख सकती है।
3) LLP एक body corporate व अपने partners से अलग एक कानूनी entity है।
4) न्यूनतम 2 partners, अधिकतम संख्या पर कोई सीमा नहीं।
5) LLP Act, 2008 अनुसार Audit अनिवार्य है यदि — a) वार्षिक turnover ₹40 लाख से अधिक हो, या b) capital contribution ₹25 लाख से अधिक हो।
LLP — आवश्यक दस्तावेज़
1) LLP Agreement की प्रमाणित प्रति (Designated Partners की सूची व MCA साइट का printout सहित)।
2) Designated Partners का resolution (खाता संचालन हेतु पूर्ण निर्देशों सहित)।
3) LLP का PAN।
4) Certificate of Incorporation।
5) Entity का Address Proof।
6) व्यक्तिगत ग्राहक हेतु आवश्यक KYC दस्तावेज़ एकत्रित किए जाएं।