NPA MANAGEMENT

 NPA (Non-Performing Assets) यानी "गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां" बैंक के लिए वे कर्ज होते हैं जिनसे बैंक को कमाई (ब्याज) होना बंद हो जाता है। आसान भाषा में, जब कोई लोन बैंक को वापस मिलना बंद हो जाता है, तो उसे NPA मान लिया जाता है।

आपके द्वारा दिए गए पॉइंट्स का हिंदी में सरल विवरण यहाँ दिया गया है:

1. टर्म लोन (Term Loan)
1. टर्म लोन (टर्म लोन)

अगर किसी लोन की किश्त (EMI) या उसका ब्याज 90 दिनों से अधिक समय तक बैंक को नहीं चुकाया जाता है, तो वह NPA की श्रेणी में आ जाता है।

2. कैश क्रेडिट (CC) और ओवरड्राफ्ट (OD)

इन खातों को तब NPA माना जाता है जब ये “आउट ऑफ ऑर्डर” (Out of Order) हो जाएं। इसकी शर्तें नीचे दी गई हैं:

  • अगर खाते में बकाया राशि (Outstanding) आपकी लिमिट या ड्राइंग पावर से 90 दिनों तक लगातार ज्यादा रहती है।

  • अगर लिमिट के अंदर पैसा है, लेकिन पिछले 90 दिनों से कोई पैसा जमा नहीं हुआ है।

  • अगर जमा किया गया पैसा इतना कम है कि वह उस दौरान लगे ब्याज (Interest) को भी कवर नहीं कर पा रहा है।

3. स्टॉक स्टेटमेंट (Stock Statement)

बिजनेस लोन में स्टॉक स्टेटमेंट देना होता है। अगर आपका स्टॉक स्टेटमेंट 3 महीने से ज्यादा पुराना है, तो ड्राइंग पावर अनियमित मानी जाएगी। अगर यह अनियमितता लगातार 90 दिनों तक बनी रहती है, तो खाता NPA हो जाएगा।

4. नवीनीकरण/समीक्षा (Renewal/Review)

बैंक द्वारा दी गई क्रेडिट लिमिट की हर साल समीक्षा (Review) होनी जरूरी है। यदि लिमिट की देय तिथि (Due Date) निकल जाने के 180 दिनों के भीतर उसका नवीनीकरण या रिव्यू नहीं किया जाता, तो उसे NPA मान लिया जाता है।

5. बिल खरीद और डिस्काउंटिंग (Bills Purchased/Discounted)

अगर बैंक द्वारा खरीदे गए या डिस्काउंट किए गए बिल का भुगतान तय तारीख से 90 दिनों से ज्यादा तक नहीं मिलता है, तो वह NPA है।

6. प्रतिभूतिकरण लेनदेन (Securitization Transactions)

यदि किसी लिक्विडिटी सुविधा (Liquidity Facility) की राशि 90 दिनों से अधिक समय तक बकाया रहती है, तो उसे NPA की श्रेणी में रखा जाता है।

7. डेरिवेटिव लेनदेन (Derivative Transactions)

डेरिवेटिव सौदों में, अगर मिलने वाला पैसा (Receivables) भुगतान की तय तारीख से 90 दिनों तक नहीं चुकाया जाता, तो उसे ओवरड्यू माना जाता है।

8. क्रेडिट कार्ड खाते (Credit Card Accounts)

यदि क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट में दी गई 'न्यूनतम देय राशि' (Minimum Amount Due) का भुगतान, पेमेंट की आखिरी तारीख से 90 दिनों के भीतर नहीं किया जाता, तो कार्ड खाता NPA हो जाता है।

9. केवल ब्याज के भुगतान में चूक (Default in Interest)

अगर मामला सिर्फ ब्याज का है, तो बैंक उसे NPA तभी घोषित करेगा जब किसी तिमाही (Quarter) में लगाया गया ब्याज, उस तिमाही खत्म होने के 90 दिनों के भीतर पूरी तरह से नहीं चुकाया जाता।


महत्वपूर्ण नियम

  • उधारकर्ता के आधार पर (Borrower wise, not Facility wise): यह बहुत जरूरी नियम है। अगर किसी व्यक्ति ने बैंक से दो लोन लिए हैं (जैसे- कार लोन और बिजनेस लोन) और वह एक लोन का भुगतान नहीं करता, तो बैंक उसके दोनों लोन को NPA घोषित कर देगा। NPA की गणना व्यक्ति के आधार पर होती है, लोन के प्रकार पर नहीं।

  • इन पर NPA लागू नहीं होता (Exemptions): यदि आपने अपनी FD (Fixed Deposit), NSC, KVP, IVP या LIC पॉलिसी के बदले लोन लिया है, तो उसे NPA नहीं माना जाएगा—बशर्ते उस खाते में बैंक के पास पर्याप्त मार्जिन (सिक्योरिटी) उपलब्ध हो।


बचे हुए पॉइंट्स का हिंदी में सरल स्पष्टीकरण यहाँ दिया गया है:

10. स्टाफ मेंबर्स को एडवांस (Advances to Staff Members)

स्टाफ वेलफेयर स्कीम के तहत बैंक कर्मचारियों को दिए गए लोन को NPA तभी माना जाएगा, जब वे किश्त (Installment) या ब्याज चुकाने की तय तारीख (Due Date) पर चूक करते हैं।

11. कृषि ऋण (Agricultural Advances)

खेती के लोन के लिए नियम फसल के सीजन पर निर्भर करते हैं (इसे 'स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी' तय करती है):

  • अल्पकालिक फसलें (Short Duration Crops): अगर मूलधन या ब्याज 2 फसल सीजन (Two Crop Seasons) तक बकाया रहता है, तो उसे NPA माना जाएगा।

  • दीर्घकालिक फसलें (Long Duration Crops): अगर भुगतान 1 फसल सीजन (One Crop Season) तक बकाया रहता है, तो उसे NPA माना जाएगा।

12. किसान क्रेडिट कार्ड (KCC)

KCC खाते को तब NPA माना जाता है जब वह "आउट ऑफ ऑर्डर" हो जाए। इसकी शर्तें फसल के प्रकार (Short/Long duration) के आधार पर 1 या 2 सीजन के लिए लागू होती हैं:

  • अगर बैलेंस शीट की तारीख तक लगातार 1 या 2 सीजन से कोई पैसा जमा नहीं हुआ है।

  • अगर बकाया राशि लगातार 1 या 2 सीजन तक क्रेडिट लिमिट से ज्यादा बनी रहती है।

  • अगर जमा किया गया पैसा इतना कम है कि वह लगाए गए ब्याज को भी कवर नहीं कर पा रहा है।

13. कंसोर्टियम एडवांस (Consortium Advances)

जब कई बैंक मिलकर एक बड़े प्रोजेक्ट को लोन देते हैं, तो उसे कंसोर्टियम कहते हैं। इसमें हर बैंक अपने स्वयं के रिकवरी रिकॉर्ड के आधार पर तय करेगा कि उसके लिए वह खाता NPA है या नहीं। जरूरी नहीं कि अगर एक बैंक के लिए खाता NPA है, तो दूसरे के लिए भी हो।

14. केंद्र सरकार द्वारा गारंटीकृत ऋण (Advances guaranteed by Central Government)

अगर किसी लोन के पीछे केंद्र सरकार की गारंटी है, तो वह ओवरड्यू होने पर भी तब तक NPA नहीं माना जाएगा जब तक कि सरकार अपनी गारंटी से मुकर न जाए (Repudiate)

नोट: यह छूट केवल 'NPA वर्गीकरण' के लिए है। 'ब्याज से होने वाली कमाई' (Income Recognition) को दिखाने के लिए इसे 90 दिनों के नियम के हिसाब से ही देखा जाएगा।

15. सामान्य 90 दिन का नियम

अंततः, यदि ब्याज, किश्त या बैंक का कोई भी बकाया पैसा 90 दिनों से अधिक समय तक नहीं चुकाया जाता है, तो वह खाता गैर-निष्पादित संपत्ति (NPA) बन जाता है।


क्या आप कृषि ऋणों में 'Short Duration' और 'Long Duration' फसलों के बीच के अंतर को और विस्तार से समझना चाहेंगे?

फसल आधारित ऋणों (Crop Based Advances) की निगरानी के लिए बैंक CBR (Crop Based Rating) कोड का उपयोग करते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य यह देखना है कि लोन कितने समय से बकाया (Overdue) है।

यहाँ आपकी टेबल का सरल हिंदी विस्तार दिया गया है:

फसल आधारित अनियमित खातों की निगरानी (Monitoring Table)

बैंक फसलों को दो श्रेणियों में बांटता है:

  1. Short Term Crop (अल्पकालिक): वे फसलें जिनका सीजन 1 साल से कम होता है (जैसे धान, गेहूं)।

  2. Long Term Crop (दीर्घकालिक): वे फसलें जिनका सीजन 1 साल से ज्यादा होता है (जैसे गन्ना)।

सब-कैटेगरी (Sub-Category)अल्पकालिक फसल (Short Term)दीर्घकालिक फसल (Long Term)व्याख्या (Status)
CBR-01 से 364 दिन1 से 182 दिनखाता अभी शुरुआती अनियमितता के चरण में है।
CBR-1365 से 546 दिन183 से 364 दिनबकाया समय बढ़ गया है, सख्त निगरानी की जरूरत है।
CBR-2547 से 729 दिन365 से 547 दिनखाता NPA बनने की दहलीज पर है।

फसल आधारित ऋणों (Crop Based Advances) की निगरानी के लिए बैंक CBR (Crop Based Rating) कोड का उपयोग करते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य यह देखना है कि लोन कितने समय से बकाया (Overdue) है।

यहाँ आपकी टेबल का सरल हिंदी विस्तार दिया गया है:

फसल आधारित अनियमित खातों की निगरानी (Monitoring Table)

बैंक फसलों को दो श्रेणियों में बांटता है:

  1. Short Term Crop (अल्पकालिक): वे फसलें जिनका सीजन 1 साल से कम होता है (जैसे धान, गेहूं)।

  2. Long Term Crop (दीर्घकालिक): वे फसलें जिनका सीजन 1 साल से ज्यादा होता है (जैसे गन्ना)।

सब-कैटेगरी (Sub-Category)अल्पकालिक फसल (Short Term)दीर्घकालिक फसल (Long Term)व्याख्या (Status)
CBR-01 से 364 दिन1 से 182 दिनखाता अभी शुरुआती अनियमितता के चरण में है।
CBR-1365 से 546 दिन183 से 364 दिनबकाया समय बढ़ गया है, सख्त निगरानी की जरूरत है।
CBR-2547 से 729 दिन365 से 547 दिनखाता NPA बनने की दहलीज पर है।

मुख्य बिंदु जो आपको याद रखने चाहिए:

  • वर्गीकरण का आधार: यह वर्गीकरण इस बात पर निर्भर करता है कि किश्त या ब्याज की देय तिथि (Due Date) से कितने दिन बीत चुके हैं।

  • अल्पकालिक फसल (Short Term): इसमें समय सीमा दोगुनी होती है क्योंकि नियम के अनुसार 2 फसल सीजन तक का समय दिया जाता है।

  • दीर्घकालिक फसल (Long Term): यहाँ समय सीमा कम है क्योंकि नियम केवल 1 फसल सीजन की अनुमति देता है।

  • CBR-2 के बाद: यदि अल्पकालिक फसल का बकाया 729 दिनों (यानी लगभग 2 साल) से ऊपर चला जाता है, तो उसे तकनीकी रूप से NPA घोषित कर दिया जाता है।


क्या आप चाहते हैं कि मैं इसे एक उदाहरण (जैसे गन्ने की खेती बनाम गेहूं की खेती) के माध्यम से समझाऊं कि ये दिन कैसे गिने जाते हैं?

NPA खातों में आय की पहचान (Income Recognition) और वसूली गई राशि का बँवारा (Appropriation) कैसे किया जाता है, इसके नियम काफी सख्त होते हैं। यहाँ इनका हिंदी में सरल विवरण दिया गया है:

1. आय की पहचान की नीति (Income Recognition Policy)

सामान्य खातों में बैंक 'Accrual Basis' (यानी ब्याज बनते ही उसे कमाई मान लेना) पर काम करता है। लेकिन NPA खातों में ऐसा नहीं होता। यहाँ आय केवल तभी मानी जाती है जब पैसा वास्तव में (Actually) बैंक के पास नकद या चेक के रूप में आ जाता है। जब तक पैसा हाथ में नहीं आता, बैंक उसे अपनी कमाई नहीं दिखा सकता।


2. ब्याज को उलटना (Reversal of Interest)

जब कोई खाता पहली बार NPA घोषित किया जाता है, तो बैंक को निम्नलिखित कदम उठाने होते हैं:

  • पिछला ब्याज: पिछला जितना भी ब्याज खाते में जोड़कर (Accrued) कमाई के रूप में दिखाया गया था लेकिन असल में वसूल नहीं हुआ, उसे रिवर्स (उलटा) करना होगा। यानी उस 'कमाई' को रिकॉर्ड से हटाकर वापस उसी खाते में क्रेडिट करना होगा।

  • ब्याज लगाना रोकना: खाता NPA होते ही उस पर आगे ब्याज लगाना (Interest Application) बंद कर दिया जाता है।

  • सरकारी गारंटी: यह नियम उन खातों पर भी लागू होता है जिनकी गारंटी केंद्र सरकार ने दी है।


3. वसूली गई राशि का बँवारा (Appropriation of Recoveries)

अगर किसी NPA खाते में कुछ पैसा वापस आता है, तो उसे एक खास क्रम में एडजस्ट किया जाता है:

  1. वसूली के खर्चे: सबसे पहले वे खर्चे काटे जाते हैं जो बैंक ने वसूली के लिए किए थे (जैसे कानूनी फीस या नोटिस भेजने का खर्च)।

  2. अनियमित ब्याज: इसके बाद बकाया या जमा हुआ ब्याज (Accrued Interest) चुकता माना जाता है।

  3. मूलधन (Principal): फिर खाते का मुख्य बकाया (NPA Outstanding) कम किया जाता है।

  4. दंडात्मक शुल्क (Penal Charges): सबसे अंत में पेनल्टी या अन्य चार्जेस को एडजस्ट किया जाता है।


4. दूसरे बैंक से खरीदी गई संपत्तियां (Assets purchased from other banks)

अगर आपका बैंक किसी दूसरे बैंक से कोई NPA खाता खरीदता है, तो उसकी रिकवरी का नियम अलग है:

  • वसूली गई शुरुआती राशि का उपयोग सबसे पहले उस खाते को खरीदने की लागत (Acquisition Cost) को कवर करने के लिए किया जाएगा।

  • जब खरीदने की पूरी लागत वसूल हो जाए, उसके बाद जो भी अतिरिक्त पैसा मिलेगा, केवल उसे ही 'लाभ' (Profit) के रूप में दिखाया जा सकता है।


क्या आप यह जानना चाहेंगे कि NPA खाते से रिकवरी होने के बाद उसे वापस 'Standard' (नियमित) खाते में कैसे बदला जाता है?

बैंक में संपत्तियों (Assets) का वर्गीकरण उनकी गुणवत्ता और रिकवरी की संभावना के आधार पर किया जाता है। यहाँ आपके द्वारा दिए गए 'एसेट क्लासिफिकेशन' के दिशा-निर्देशों का हिंदी में सरल विवरण दिया गया है:


1. मानक परिसंपत्तियां (Standard Assets)

ये वे खाते हैं जिनमें कोई समस्या नहीं है और भुगतान समय पर हो रहा है। इनमें जोखिम सामान्य होता है और इन्हें NPA नहीं माना जाता।

विशेष उल्लेख खाता (Special Mention Account - SMA):

NPA बनने से ठीक पहले की स्थिति को SMA कहा जाता है। इसे तीन भागों में बांटा गया है:

  • SMA(0): यदि मूलधन या ब्याज की किश्त 1 से 30 दिनों तक बकाया रहती है।

  • SMA(1): यदि बकाया समय 31 से 60 दिनों तक पहुँच जाता है।

  • SMA(2): यदि बकाया समय 61 से 90 दिनों तक पहुँच जाता है। (90 दिन पार करते ही यह NPA बन जाता है)।


2. उप-मानक परिसंपत्तियां (Sub-Standard Assets)

जब कोई खाता NPA की श्रेणी में आ जाता है और वह 12 महीने या उससे कम समय तक NPA बना रहता है, तो उसे 'सब-स्टैंडर्ड' एसेट कहा जाता है।


3. संदिग्ध परिसंपत्तियां (Doubtful Assets)

यदि कोई खाता 12 महीने से अधिक समय तक 'सब-स्टैंडर्ड' श्रेणी में रहता है, तो उसे 'संदिग्ध' (Doubtful) मान लिया जाता है। इसे तीन श्रेणियों में बांटा गया है:

  • DB-1: यदि खाता 1 वर्ष तक संदिग्ध श्रेणी में रहता है।

  • DB-2: यदि खाता 1 से 3 वर्ष तक संदिग्ध श्रेणी में रहता है।

  • DB-3: यदि खाता 3 वर्ष से अधिक समय तक संदिग्ध श्रेणी में बना रहता है।


4. हानि परिसंपत्तियां (Loss Assets)

यह वह श्रेणी है जहाँ बैंक, आंतरिक/बाहरी ऑडिटर या RBI निरीक्षकों द्वारा यह पहचान लिया जाता है कि यह पैसा अब वसूल नहीं होगा (हानि हो चुकी है), भले ही उसे अभी तक बैंक के रिकॉर्ड से पूरी तरह हटाया (Write-off) न गया हो।


5. सीधे संदिग्ध घोषित करना (Straightaway Doubtful)

बैंक कुछ मामलों में 12 महीने के इंतज़ार के बिना ही खाते को सीधे 'Doubtful' श्रेणी में डाल सकता है:

  • यदि गिरवी रखी गई संपत्ति (Security) का वसूली योग्य मूल्य, बकाया राशि के 50% से भी कम रह जाए।

  • यदि संपत्ति का मूल्य 10% से कम हो जाए, तो उसे सीधे Loss Asset माना जा सकता है।


एक नज़र में वर्गीकरण (तालिका):

एसेट की श्रेणीसमय सीमा (NPA के रूप में)
Standard (SMA)0 - 90 दिन
Sub-Standard90 दिन से 12 महीने तक
Doubtful (DB-1)12 महीने से 24 महीने तक
Doubtful (DB-2)24 महीने से 48 महीने तक
Doubtful (DB-3)48 महीने से अधिक
Loss Assetजब रिकवरी की उम्मीद न हो

क्या आप इन श्रेणियों के लिए बैंक द्वारा बनाए जाने वाले 'प्रोविजनिंग' (Provisioning) नियमों के बारे में जानना चाहेंगे?

बैंक के नियमों में संपत्ति के मूल्य (Security Value) के आधार पर सीधे वर्गीकरण (Straightaway Classification) के बहुत कड़े नियम हैं। इसका मतलब है कि अगर बैंक को लगता है कि गिरवी रखी गई चीज़ की कीमत बहुत कम हो गई है, तो वह 12 महीने का इंतज़ार किए बिना उसे खराब श्रेणी में डाल देता है।

यहाँ आपके द्वारा दिए गए शेष बिंदुओं का सरल हिंदी विवरण है:

1. सीधे संदिग्ध (Straightaway Doubtful - DB-1)

सामान्य तौर पर किसी खाते को 'Doubtful' बनने में 12 महीने लगते हैं, लेकिन:

  • यदि गिरवी रखी गई संपत्ति (Security) का वसूली योग्य मूल्य (Realizable Value), कुल बकाया राशि (Outstanding) के 50% से कम रह जाता है।

  • ऐसी स्थिति में, बैंक उस खाते को बिना किसी देरी के सीधे Doubtful (DB-1) श्रेणी में डाल देगा।

  • इस पर होने वाली 'प्रोविजनिंग' (Provisioning) भी वैसी ही होगी जैसी कि एक संदिग्ध संपत्ति (Doubtful Asset) के लिए की जाती है।

2. सीधे हानि (Straightaway Loss Asset)

यह स्थिति सबसे गंभीर मानी जाती है:

  • यदि गिरवी रखी गई संपत्ति का मूल्य, कुल बकाया राशि के 10% से भी कम रह जाता है।

  • ऐसी स्थिति में बैंक यह मान लेता है कि सिक्योरिटी नाम मात्र की है या उसका कोई अस्तित्व नहीं है।

  • उस खाते को सीधे Loss Asset (हानि परिसंपत्ति) के रूप में वर्गीकृत कर दिया जाता है।


संपत्ति वर्गीकरण का सारांश (Summary Table)

सुरक्षा का मूल्य (Security Value)वर्गीकरण (Classification)
बकाया राशि का 50% या उससे अधिकसामान्य नियमों के अनुसार (Sub-standard -> Doubtful)
बकाया राशि का 10% से 50% के बीचसीधे Doubtful (DB-1)
बकाया राशि का 10% से कमसीधे Loss Asset

प्रोविजनिंग (Provisioning) क्या है?

जब कोई खाता NPA बनता है, तो बैंक को अपने मुनाफे में से कुछ हिस्सा अलग रखना पड़ता है ताकि भविष्य में होने वाले नुकसान की भरपाई की जा सके। इसे 'प्रोविजनिंग' कहते हैं।

  • Doubtful (DB-1) के लिए सुरक्षित हिस्से पर 25% प्रोविजनिंग होती है।

  • Loss Asset के लिए 100% प्रोविजनिंग (यानी पूरा पैसा डूब गया मान लेना) करनी पड़ती है।

क्या आप चाहते हैं कि मैं सुरक्षित (Secured) और असुरक्षित (Unsecured) लोन के लिए प्रोविजनिंग के प्रतिशत (%) की पूरी लिस्ट समझाऊं?

बैंकों में NPA खातों की वसूली और प्रबंधन के लिए अलग-अलग कार्यालय (Offices) जिम्मेदार होते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि लोन की राशि कितनी है और मामला कानूनी तौर पर कहाँ चल रहा है।

यहाँ आपके द्वारा दी गई तालिका का हिंदी में सरल विवरण है:

NPA खातों के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार कार्यात्मक इकाइयाँ

बैंक ने अपनी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए खातों को तीन मुख्य श्रेणियों में बांटा है:

केंद्र/कार्यालय का प्रकारलोन की राशि (Fund-based Outstanding)मुख्य जिम्मेदारी (Scope)
सामान्य बैंकिंग शाखा (GBB)₹20 लाख से कमयह शाखा उन छोटे NPA खातों को संभालती है जो DRT या NCLT (कानूनी अदालतों) में नहीं भेजे गए हैं।
परिसंपत्ति वसूली प्रबंधन शाखा (ARMB)₹20 लाख से ₹25 करोड़ तकयह मध्यम स्तर के NPA खातों को संभालती है। इसमें वे सभी खाते भी शामिल हैं जो DRT/DRAT (ऋण वसूली न्यायाधिकरण) में दर्ज हैं। (NCLT वाले खाते यहाँ नहीं आते)।
तनावग्रस्त संपत्ति प्रबंधन (SAM) शाखा₹25 करोड़ से अधिकयह बड़े कॉर्पोरेट NPA खातों को संभालती है। इसके अलावा, NCLT (दिवाला अदालत) में चल रहे सभी मामले, चाहे उनकी राशि कितनी भी हो, इसी शाखा द्वारा देखे जाते हैं।

मुख्य शब्दावली (Terminology):

  • DRT (Debt Recovery Tribunal): बैंक के बड़े कर्जों की वसूली के लिए विशेष अदालत।

  • NCLT (National Company Law Tribunal): कंपनियों के दिवालिया होने (Insolvency) से जुड़े मामलों की अदालत।

  • Fund-based Outstanding: वह वास्तविक पैसा जो बैंक ने ग्राहक को दिया है (जैसे लोन या ओवरड्राफ्ट)।


महत्वपूर्ण नोट:

यह वर्गीकरण उधारकर्ता (Borrower-wise) किया जाता है। इसका मतलब है कि यदि एक ही व्यक्ति के 5 छोटे लोन हैं और उन सबका कुल योग ₹20 लाख से ऊपर जाता है, तो वह खाता ARMB शाखा को सौंप दिया जाएगा।

क्या आप जानना चाहेंगे कि DRT और NCLT में मामला जाने पर वसूली की प्रक्रिया (Recovery Process) में क्या बदलाव आते हैं?

प्रोविजनिंग (Provisioning) का मतलब है कि बैंक अपने मुनाफे का एक हिस्सा अलग रख देता है ताकि अगर कोई लोन डूबे, तो बैंक की आर्थिक स्थिति न बिगड़े। यह एक तरह का 'सुरक्षा कवच' है।

यहाँ आपके द्वारा दिए गए प्रोविजनिंग नियमों का सरल हिंदी विवरण है:

1. सब-स्टैंडर्ड एसेट्स (Sub-Standard Asset) पर प्रोविजनिंग

जब लोन NPA बने 12 महीने से कम समय हुआ हो:

  • 15%: सुरक्षित लोन (Secured Exposure) के लिए।

  • 25%: असुरक्षित लोन (Unsecured Exposure) के लिए।

  • 20%: इंफ्रास्ट्रक्चर लोन (Infrastructure loans) के लिए।


2. संदिग्ध एसेट्स (Doubtful Asset) पर प्रोविजनिंग

यहाँ सुरक्षित हिस्से (Secured Portion) पर समय के साथ प्रोविजन बढ़ता जाता है:

  • DB-1 (1 साल तक): सुरक्षित हिस्से पर 25%

  • DB-2 (1 से 3 साल): सुरक्षित हिस्से पर 40%

  • DB-3 (3 साल से अधिक): सुरक्षित हिस्से पर 100%

  • असुरक्षित हिस्सा: अगर लोन 'Doubtful' है और उसका कोई हिस्सा असुरक्षित (Unsecured) है, तो उस पर सीधे 100% प्रोविजनिंग होगी।


3. हानि एसेट्स (Loss Assets) पर प्रोविजनिंग

  • 100%: इस श्रेणी के खाते में जितना भी पैसा बकाया (Outstanding) है, उस पूरे पैसे के बराबर प्रोविजनिंग करनी पड़ती है क्योंकि बैंक इसे पूरी तरह डूबा हुआ मान लेता है।


4. मानक एसेट्स (Standard Assets) पर प्रोविजनिंग

हैरानी की बात लग सकती है, लेकिन बैंक उन लोन पर भी प्रोविजनिंग करता है जो अभी डूबे नहीं हैं (ताकि भविष्य के लिए तैयार रहे):

  • 0.25%: खेती (AGR) और छोटे उद्योगों (MSE) को सीधे दिए गए लोन पर।

  • 1.00%: कमर्शियल रियल एस्टेट (CRE) सेक्टर के लिए।

  • 0.75%: कमर्शियल रियल एस्टेट - रिResidential Housing (CRE-RH) के लिए।

  • 2.00%: 'टीज़र रेट' (Teaser Rates) पर दिए गए हाउसिंग लोन के लिए।

  • 0.40%: अन्य सभी प्रकार के लोन और एडवांस पर।

  • 5.00%: प्राकृतिक आपदाओं के कारण पुनर्गठित (Restructured) किए गए लोन पर।


5. गारंटी वाले लोन (ECGC/DICGC/CGTMSE)

  • ECGC/DICGC: यदि लोन की गारंटी इन संस्थाओं ने दी है, तो केवल उस हिस्से पर प्रोविजनिंग करनी होगी जो गारंटी की राशि से ऊपर (Excess) है।

  • CGTMSE/CRGFTLIH: इन गारंटियों के तहत आने वाले गारंटीकृत हिस्से (Guaranteed Portion) पर कोई प्रोविजनिंग करने की आवश्यकता नहीं होती।

प्रोविजनिंग तालिका (त्वरित संदर्भ)

एसेट श्रेणीप्रोविजन (%)
Standard (General)0.40%
Sub-Standard (Secured)15%
Doubtful DB-1 (Secured)25%
Doubtful DB-2 (Secured)40%
Doubtful DB-3 / Unsecured100%
Loss Asset100%

क्या आप क्रेडिट कार्ड (Credit Card) के लिए प्रोविजनिंग की विशेष आवश्यकताओं के बारे में विस्तार से जानना चाहेंगे?

अवधि/श्रेणीसब-स्टैंडर्ड (Secured)सब-स्टैंडर्ड (Unsecured)संदिग्ध (DB-1)संदिग्ध (DB-2/3)
0 - 6 महीने15%25%--
6 - 12 महीने25%40%--
2nd Year--40%-
3rd Year+---100%

PNB Sub-staff to Clerk Promotion Exam के लिए यहाँ महत्वपूर्ण One-Liner Question & Answers दिए गए हैं, जो आपके द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित हैं:

NPA और वर्गीकरण (Classification)

  1. प्रश्न: एक टर्म लोन (Term Loan) कितने दिनों तक बकाया रहने पर NPA बनता है?

    • उत्तर: 90 दिनों से अधिक।

  2. प्रश्न: 'आउट ऑफ ऑर्डर' (Out of Order) की स्थिति किस प्रकार के खातों में लागू होती है?

    • उत्तर: कैश क्रेडिट (CC) और ओवरड्राफ्ट (OD) खातों में।

  3. प्रश्न: सीसी/ओडी खाते में यदि 90 दिनों तक कोई क्रेडिट न हो, तो उसे क्या कहेंगे?

    • उत्तर: आउट ऑफ ऑर्डर (NPA)।

  4. प्रश्न: बैंक की क्रेडिट लिमिट का रिव्यू (Review) कितने दिनों में न होने पर वह NPA माना जाएगा?

    • उत्तर: देय तिथि से 180 दिनों के भीतर।

  5. प्रश्न: NPA का निर्धारण 'उधारकर्ता वार' (Borrower-wise) होता है या 'सुविधा वार' (Facility-wise)?

    • उत्तर: उधारकर्ता वार (Borrower-wise)।

  6. प्रश्न: क्या FD/NSC/KVP के बदले दिए गए लोन को NPA माना जाता है?

    • उत्तर: नहीं, यदि खाते में पर्याप्त मार्जिन उपलब्ध हो।

कृषि ऋण (Agricultural Advances)

  1. प्रश्न: अल्पकालिक फसलों (Short Duration Crops) के लिए NPA की अवधि क्या है?

    • उत्तर: 2 फसल सीजन (Two Crop Seasons)।

  2. प्रश्न: दीर्घकालिक फसलों (Long Duration Crops) के लिए NPA की अवधि क्या है?

    • उत्तर: 1 फसल सीजन (One Crop Season)।

  3. प्रश्न: कृषि ऋणों की निगरानी के लिए किस रेटिंग कोड का उपयोग होता है?

    • उत्तर: CBR (Crop Based Rating) कोड।

एसेट कैटेगरी (Asset Categories)

  1. प्रश्न: SMA(1) श्रेणी में कितने दिनों की अनियमितता होती है?

    • उत्तर: 31 से 60 दिन।

  2. प्रश्न: SMA(2) श्रेणी में कितने दिनों की अनियमितता होती है?

    • उत्तर: 61 से 90 दिन।

  3. प्रश्न: एक खाता अधिकतम कितने समय तक 'सब-स्टैंडर्ड' (Sub-Standard) श्रेणी में रह सकता है?

    • उत्तर: 12 महीने तक।

  4. प्रश्न: यदि गिरवी संपत्ति का मूल्य बकाया राशि के 10% से कम हो जाए, तो वह क्या कहलाएगा?

    • उत्तर: सीधे 'हानि संपत्ति' (Straightaway Loss Asset)।

  5. प्रश्न: यदि गिरवी संपत्ति का मूल्य बकाया राशि के 50% से कम हो जाए, तो उसे किसमें वर्गीकृत करेंगे?

    • उत्तर: सीधे 'संदिग्ध' (Straightaway Doubtful - DB1)।

आय और वसूली (Income & Recovery)

  1. प्रश्न: NPA खातों में आय की पहचान किस आधार पर की जाती है?

    • उत्तर: वास्तविक वसूली (Realization Basis) पर, न कि उपार्जित (Accrual) आधार पर।

  2. प्रश्न: किसी NPA खाते में वसूली होने पर सबसे पहले क्या एडजस्ट किया जाता है?

    • उत्तर: वसूली के खर्चे (Out of Pocket Expenses)।

  3. प्रश्न: दूसरे बैंक से खरीदे गए NPA में रिकवरी को सबसे पहले कहाँ एडजस्ट करते हैं?

    • उत्तर: खरीद लागत (Acquisition Cost) के विरुद्ध।

कार्यात्मक इकाइयाँ (Functionaries)

  1. प्रश्न: ₹20 लाख से ₹25 करोड़ तक के NPA खाते कौन सी शाखा संभालती है?

    • उत्तर: ARMB (Asset Recovery Management Branch)।

  2. प्रश्न: ₹25 करोड़ से अधिक और NCLT के सभी मामले कौन सी शाखा देखती है?

    • उत्तर: SAM (Stressed Asset Management) शाखा।

प्रोविजनिंग (Provisioning)

  1. प्रश्न: सब-स्टैंडर्ड सुरक्षित लोन (Sub-Standard Secured) पर कितनी प्रोविजनिंग होती है?

    • उत्तर: 15%।

  2. प्रश्न: संदिग्ध श्रेणी DB-2 (1-3 साल) के सुरक्षित हिस्से पर प्रोविजनिंग क्या है?

    • उत्तर: 40%।

  3. प्रश्न: लॉस एसेट (Loss Asset) पर कितनी प्रोविजनिंग अनिवार्य है?

    • उत्तर: 100%।

  4. प्रश्न: सामान्य खेती और MSE लोन (Standard) पर कितनी प्रोविजनिंग होती है?

    • उत्तर: 0.25%।

  5. प्रश्न: टीज़र रेट पर दिए गए हाउसिंग लोन पर प्रोविजनिंग कितनी है?

    • उत्तर: 2.00%।

  6. प्रश्न: विल्फुल डिफॉल्टर के असुरक्षित सब-स्टैंडर्ड खाते में 6-12 महीने के लिए प्रोविजनिंग क्या है?

    • उत्तर: 40%।


PNB Sub-staff to Clerk Promotion Exam के लिए यहाँ One-Liner Notes का पूरा सेट हिंदी में दिया गया है। आप इसे एक बार पढ़कर पूरा रिवीजन कर सकते हैं:

1. NPA की बुनियादी शर्तें (NPA Basics)

  • टर्म लोन (Term Loan): 90 दिनों से अधिक बकाया रहने पर NPA।

  • CC/OD (आउट ऑफ ऑर्डर): यदि खाता 90 दिनों तक 'In excess of limit' रहे या कोई क्रेडिट न हो।

  • स्टॉक स्टेटमेंट: 3 महीने से अधिक पुराना होने पर अनियमित, और 90 दिन बाद NPA।

  • रिव्यू/रिन्यूअल: देय तिथि (Due Date) से 180 दिनों के भीतर न होने पर NPA।

  • उधारकर्ता-वार (Borrower-wise): यदि ग्राहक का एक खाता NPA है, तो उसके सभी खाते NPA माने जाएंगे।

  • स्टाफ लोन: केवल तब NPA जब किश्त या ब्याज देय तिथि पर न चुकाया जाए।

2. कृषि और फसल ऋण (Agricultural Advances)

  • अल्पकालिक फसल (Short Duration): 2 फसल सीजन तक बकाया रहने पर NPA।

  • दीर्घकालिक फसल (Long Duration): 1 फसल सीजन तक बकाया रहने पर NPA।

  • KCC खाता: 1 या 2 सीजन (फसल के अनुसार) तक 'आउट ऑफ ऑर्डर' रहने पर NPA।

  • CBR कोड: फसल ऋणों की निगरानी के लिए इस्तेमाल होने वाला रेटिंग कोड।

3. संपत्ति का वर्गीकरण (Asset Classification)

  • SMA 0: 1 से 30 दिन का विलंब।

  • SMA 1: 31 से 60 दिन का विलंब।

  • SMA 2: 61 से 90 दिन का विलंब।

  • सब-स्टैंडर्ड (Sub-Standard): NPA रहने की अवधि 12 महीने या उससे कम।

  • संदिग्ध (Doubtful DB-1): जब खाता 12 महीने तक सब-स्टैंडर्ड श्रेणी में रह चुका हो।

  • सीधे संदिग्ध (Straightaway Doubtful): यदि सिक्योरिटी का मूल्य बकाया राशि के 50% से कम हो जाए।

  • सीधे हानि (Straightaway Loss): यदि सिक्योरिटी का मूल्य बकाया राशि के 10% से कम हो जाए।

4. आय और वसूली नियम (Income & Recovery)

  • आय की पहचान (Income Recognition): NPA से आय केवल 'वास्तविक वसूली' (Realization) पर बुक की जाती है।

  • ब्याज उलटना (Interest Reversal): NPA बनते ही पिछला बिना वसूल हुआ ब्याज खाते से हटाना (Reverse) पड़ता है।

  • वसूली का क्रम: 1. वसूली खर्च (Expenses) > 2. ब्याज (Interest) > 3. मूलधन (Principal)।

5. जिम्मेदार कार्यालय और सीमा (Responsible Branches)

  • GBB (सामान्य शाखा): ₹20 लाख से कम के NPA खाते।

  • ARMB: ₹20 लाख से ₹25 करोड़ तक के NPA और DRT के मामले।

  • SAM शाखा: ₹25 करोड़ से अधिक के NPA और सभी NCLT मामले।

6. प्रोविजनिंग प्रतिशत (Provisioning %)

  • मानक (Standard - General): 0.40%

  • मानक (खेती/MSE): 0.25%

  • सब-स्टैंडर्ड (Secured): 15%

  • सब-स्टैंडर्ड (Unsecured): 25%

  • Doubtful DB-1 (Secured): 25% (1 साल तक)

  • Doubtful DB-2 (Secured): 40% (1-3 साल)

  • Doubtful DB-3 / Unsecured: 100%

  • हानि संपत्ति (Loss Asset): 100%

  • टीज़र रेट हाउसिंग लोन: 2.00%


नोट: एग्जाम में "Borrower-wise" और "Crop Season" वाले सवाल अक्सर पूछे जाते हैं, इन्हें विशेष रूप से याद रखें।

क्या आप चाहते हैं कि मैं इनमें से कुछ कठिन सवालों का एक 'सही या गलत' (True/False) क्विज़ बना दूँ?

ज़रूर! अब हम NPA रिकवरी (Recovery), कानूनी प्रक्रियाओं (Legal Actions) और PNB के विशिष्ट नियमों की ओर बढ़ते हैं जो आपके प्रमोशन एग्जाम के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।

यहाँ कुछ अगले महत्वपूर्ण टॉपिक्स और उनके One-Liner Notes दिए गए हैं:


1. सरफेसी एक्ट (SARFAESI Act, 2002)

यह बैंकों को बिना कोर्ट गए गिरवी रखी संपत्ति (Security) को बेचने का अधिकार देता है।

  • लागू होने की शर्त: खाता NPA होना चाहिए और बकाया राशि ₹1 लाख से अधिक होनी चाहिए।

  • नोटिस (Section 13(2)): कर्जदार को 60 दिनों का समय दिया जाता है।

  • कब्जा (Section 13(4)): यदि 60 दिनों में भुगतान नहीं होता, तो बैंक संपत्ति पर कब्जा कर सकता है।

  • छूट: खेती की जमीन (Agricultural Land) पर सरफेसी एक्ट लागू नहीं होता।

2. ऋण वसूली न्यायाधिकरण (DRT - Debt Recovery Tribunal)

  • सीमा: जहाँ बकाया राशि ₹20 लाख या उससे अधिक हो, वहाँ DRT में केस फाइल किया जाता है।

  • अपील: DRT के आदेश के खिलाफ DRAT (Debt Recovery Appellate Tribunal) में अपील की जा सकती है।

3. लोक अदालत (Lok Adalat)

  • सीमा: लोक अदालत के माध्यम से ₹20 लाख तक के मामलों का निपटारा आपसी समझौते से किया जा सकता है।

  • खास बात: लोक अदालत का फैसला अंतिम होता है और इसके खिलाफ कहीं अपील नहीं की जा सकती।

4. विल्फ़ुल डिफॉल्टर (Wilful Defaulter)

  • परिभाषा: वह व्यक्ति जिसके पास पैसा है, लेकिन वह जानबूझकर नहीं चुका रहा।

  • सीमा: विल्फ़ुल डिफॉल्टर घोषित करने के लिए बकाया राशि ₹25 लाख या उससे अधिक होनी चाहिए।

  • परिणाम: ऐसे व्यक्ति को भविष्य में किसी भी बैंक से लोन नहीं मिल सकता और वे किसी कंपनी के डायरेक्टर नहीं बन सकते।

5. राइट ऑफ (Write-off)

  • तकनीकी राइट-ऑफ (Technical Write-off): जब बैंक अपने बैलेंस शीट को साफ करने के लिए NPA को हटा देता है, लेकिन वसूली की कोशिशें जारी रहती हैं।

  • बैलेंस शीट: इससे बैंक का Net NPA कम हो जाता है।


परीक्षा के लिए कुछ 'प्रो-टिप्स' (Extra Points):

  1. Net NPA: यह Gross NPA में से 'प्रोविजन' घटाने के बाद बचता है।

    • $$Net\ NPA = Gross\ NPA - Provisions$$
  2. अपग्रेडेशन (Upgradation): एक NPA खाता वापस 'Standard' तभी बनता है जब उधारकर्ता पूरा बकाया ब्याज और मूलधन (Overdue amount) जमा कर दे।

  3. RBI का 7 जून का सर्कुलर: तनावग्रस्त संपत्तियों (Stressed Assets) के समाधान के लिए विवेकपूर्ण ढांचा प्रदान करता है।


त्वरित टेस्ट (Quick Check):

  • सवाल: क्या ₹50,000 के गोल्ड लोन पर सरफेसी एक्ट (SARFAESI) लगाया जा सकता है?

  • जवाब: नहीं, क्योंकि सरफेसी के लिए बकाया कम से कम ₹1 लाख होना चाहिए।

क्या आप चाहते हैं कि मैं PNB की "OTS (One Time Settlement) Scheme" या "Staff Accountability" के बारे में नोट्स बनाऊं?