1. Negotiable Instruments (NI) Act, 1881
धारा 4: वचन पत्र (Promissory Note) - इसमें भुगतान का वादा होता है।
धारा 5: विनिमय पत्र (Bill of Exchange) - इसमें भुगतान का आदेश होता है।
धारा 6: चेक (Cheque) - यह हमेशा एक निर्दिष्ट बैंक पर लिखा जाता है और मांग पर देय होता है।
चेक की वैधता: जारी होने की तारीख से 3 महीने तक।
धारा 13: NI तीन प्रकार के होते हैं: प्रॉमिसरी नोट, बिल ऑफ एक्सचेंज और चेक।
धारा 15: बेचान (Endorsement) - चेक के पीछे हस्ताक्षर करना।
धारा 18: यदि राशि शब्दों और अंकों में अलग हो, तो शब्दों (Words) वाली राशि मान्य होगी।
धारा 22: मैच्योरिटी की गणना में 3 दिन का ग्रेस (Grace Days) दिया जाता है (चेक पर लागू नहीं)।
धारा 123: सामान्य रेखांकन (General Crossing) - दो समानांतर तिरछी रेखाएं।
धारा 124: विशेष रेखांकन (Special Crossing) - रेखाओं के बीच बैंक का नाम होना अनिवार्य है।
धारा 131: बैंक को 'सुरक्षा' (Protection) मिलती है यदि वह ईमानदारी से चेक कलेक्ट करता है।
धारा 138: चेक बाउंस होने पर दंड - 2 साल की जेल या चेक राशि का दोगुना जुर्माना।
2. Banking Regulation (BR) Act, 1949
लागू हुआ: 16 मार्च 1949 से (J&K में 1956 से)।
धारा 5(b): बैंकिंग की परिभाषा - "जनता से जमा स्वीकार करना और ऋण देना।"
धारा 7: बैंक को अपने नाम में 'Bank', 'Banking' या 'Banking Company' शब्द जोड़ना अनिवार्य है।
धारा 8: बैंक माल (Goods) का व्यापार (Trading) नहीं कर सकते।
धारा 10: निदेशक (Director) का अधिकतम कार्यकाल 10 वर्ष हो सकता है।
धारा 17: बैंक को लाभ का 25% रिजर्व फंड में ट्रांसफर करना होता है।
धारा 22: भारत में बैंकिंग के लिए RBI से लाइसेंस लेना अनिवार्य है।
धारा 24: SLR (Statutory Liquidity Ratio) की अधिकतम सीमा 40% है।
धारा 26: 10 साल से बिना लेनदेन वाले खातों (Unclaimed Deposits) की सूची RBI को भेजी जाती है।
धारा 26A: लावारिस पैसा DEAF Fund (Deposit Education and Awareness Fund) में जमा होता है।
धारा 35: RBI को बैंकों के निरीक्षण (Inspection) का अधिकार है।
धारा 45ZA से 45ZE: बैंक खातों, सेफ कस्टडी और लॉकर में नामांकन (Nomination) की सुविधा।
3. Banker-Customer Relationship (बैंक-ग्राहक संबंध)
बचत/चालू खाता: बैंक = ऋणी (Debtor), ग्राहक = लेनदार (Creditor)।
ऋण/लोन खाता: बैंक = लेनदार (Creditor), ग्राहक = ऋणी (Debtor)।
चेक कलेक्शन: बैंक = एजेंट, ग्राहक = प्रधान (Principal)।
लॉकर सुविधा: बैंक = लेसर (Locker owner), ग्राहक = लेसी (Hirer)।
सेफ कस्टडी (सामान रखना): बैंक = बेली (Bailee), ग्राहक = बेलर (Bailor)।
Lien (ग्रहणाधिकार): बैंक का ग्राहक की संपत्ति को रोकने का अधिकार जब तक कर्ज न चुक जाए।
Set-off (मुजराई): बैंक द्वारा ग्राहक के जमा खाते से ऋण खाते की राशि का समायोजन करना।
Garnishee Order: न्यायालय (Court) द्वारा जारी किया जाता है (CPC की धारा 60)।
Attachment Order: आयकर विभाग द्वारा जारी किया जाता है (IT Act की धारा 226/3)।
भविष्य की जमा पर लागू: गार्निशी ऑर्डर लागू नहीं होता, लेकिन अटैचमेंट ऑर्डर लागू होता है।
4. KYC और अन्य महत्वपूर्ण बिंदु
KYC का उद्देश्य: मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद की फंडिंग को रोकना।
CTS-2010: चेकों के मानकीकरण और सुरक्षा के लिए (जैसे Watermark 'CTS India')।
पुनर्वैधीकरण (Revalidation): पुराना (Stale) चेक केवल लेखक (Drawer) द्वारा ही फिर से वैध किया जा सकता है।
मतदान अधिकार: प्राइवेट बैंकों में अधिकतम 26% और सरकारी बैंकों में 10%।