भारत में मनी लॉन्ड्रिंग (पैसों की हेराफेरी) और आतंकवाद को मिलने वाले फंड को रोकने के लिए PMLA, 2002 और PML Rules, 2005 के तहत कड़े नियम बनाए गए हैं। सरल हिंदी में इनका मतलब और 'Beneficial Owner' (वास्तविक मालिक) की पहचान के नियम नीचे दिए गए हैं:
1. Beneficial Owner (वास्तविक मालिक) का मतलब
जब कोई संस्था (कंपनी, फर्म आदि) बैंक में खाता खोलती है, तो बैंक को यह जानना होता है कि उस संस्था के पीछे असली "इंसान" (Natural Person) कौन है। इसे ही Beneficial Owner कहते हैं।
स्वामित्व (Ownership) की शर्तें इस प्रकार हैं:
| संस्था का प्रकार | वास्तविक मालिक कौन माना जाएगा? |
| कंपनी (Company) | वह व्यक्ति जिसके पास कंपनी के 10% से ज्यादा शेयर, पूंजी या मुनाफे का हक हो। इसके अलावा, जिसके पास डायरेक्टर नियुक्त करने या मैनेजमेंट के फैसले लेने की पावर हो। |
| पार्टनरशिप फर्म | वह पार्टनर जिसके पास फर्म की पूंजी या मुनाफे का 10% से ज्यादा हिस्सा हो। |
| एसोसिएशन/सोसाइटी | वह व्यक्ति जिसके पास संपत्ति या पूंजी का 15% से ज्यादा हिस्सा हो। अगर ऐसा कोई नहीं मिलता, तो संस्था के Senior Managing Official (मुख्य अधिकारी) को मालिक माना जाएगा। |
| ट्रस्ट (Trust) | ट्रस्ट बनाने वाला (Author), ट्रस्टी, और वे लाभार्थी (Beneficiaries) जिनके पास 10% या उससे ज्यादा का हित हो। |
2. KYC पॉलिसी 2025 के मुख्य स्तंभ
बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए बनाई गई 'KYC पॉलिसी 2025' के चार प्रमुख हिस्से हैं:
Know Your Customer (KYC) Norms
इसका मतलब है "अपने ग्राहक को पहचानना"। बैंक को यह सुनिश्चित करना होता है कि ग्राहक वही है जो वह होने का दावा कर रहा है। इसके लिए आधार, पैन कार्ड और अन्य पहचान पत्र लिए जाते हैं ताकि बैंकिंग सिस्टम में किसी भी 'बेनामी' व्यक्ति का प्रवेश न हो।
Anti-Money Laundering (AML) Standards
मनी लॉन्ड्रिंग का अर्थ है 'काले धन को सफेद करना'। AML स्टैंडर्ड्स का उद्देश्य यह ट्रैक करना है कि पैसा कहां से आ रहा है और कहां जा रहा है। अगर कोई संदिग्ध लेनदेन होता है, तो बैंक को उसकी रिपोर्ट सरकार को देनी होती है।
Combating Financing of Terrorism (CFT)
इसका सीधा उद्देश्य आतंकवाद को रोकने से है। बैंक यह नजर रखते हैं कि बैंकिंग सिस्टम का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों की फंडिंग के लिए न किया जाए। इसके तहत संदिग्ध खातों और हाई-रिस्क वाले देशों से होने वाले लेनदेन पर बारीकी से नजर रखी जाती है।
PMLA, 2002 के तहत बैंकों की जिम्मेदारी
यह कानून बैंकों को कानूनी रूप से बाध्य करता है कि वे:
ग्राहकों के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखें।
लेनदेन की पूरी जानकारी (Maintenance of Records) संभाल कर रखें।
सरकार द्वारा मांगे जाने पर सारी जानकारी उपलब्ध कराएं।
सारांश: यह पूरी प्रक्रिया इसलिए बनाई गई है ताकि भारत की अर्थव्यवस्था सुरक्षित रहे और कोई भी अपराधी या आतंकी संगठन बैंकिंग सिस्टम का गलत फायदा न उठा सके।
1. डिजिटल और तकनीकी पहचान (Digital & Technical ID)
Central KYC Records Registry (CKYCR): यह एक डिजिटल लाइब्रेरी की तरह है। जब आप एक बार KYC करवाते हैं, तो आपकी जानकारी यहाँ डिजिटल रूप में सुरक्षित रख ली जाती है। इसका फायदा यह है कि भविष्य में किसी दूसरी वित्तीय संस्था में जाने पर आपको बार-बार कागजात नहीं देने पड़ते।
Digital KYC: इसमें ग्राहक का लाइव फोटो लिया जाता है और उसके असली दस्तावेजों (OVD) को स्कैन किया जाता है। खास बात यह है कि फोटो लेते समय उस जगह की लोकेशन (Latitude/Longitude) भी रिकॉर्ड की जाती है ताकि धोखाधड़ी न हो सके।
Digital Signature: यह आपके कागजी हस्ताक्षर का इलेक्ट्रॉनिक रूप है, जो डिजिटल दस्तावेजों की प्रामाणिकता (Authentication) साबित करता है।
KYC Identifier: CKYCR द्वारा दिया गया एक यूनिक कोड, जो आपकी पहचान की चाबी की तरह काम करता है।
UCIC (Unique Customer Identification Code): एक बैंक में एक ग्राहक के कई खाते (Saving, FD, Loan) हो सकते हैं। उन सभी खातों को एक ही यूनिक आईडी से जोड़ा जाता है, जिसे UCIC कहते हैं।
2. दस्तावेज और संस्थाएं (Documents & Entities)
Officially Valid Document (OVD): बैंक खाता खोलने के लिए सरकार द्वारा मान्य दस्तावेज:
पासपोर्ट
ड्राइविंग लाइसेंस
आधार कार्ड (UIDAI द्वारा जारी)
वोटर आईडी कार्ड
नरेगा (NREGA) जॉब कार्ड
नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (NPR) का पत्र।
Equivalent e-document: डिजिटल लॉकर (DigiLocker) में रखे गए वे दस्तावेज जिन पर जारी करने वाले विभाग के डिजिटल हस्ताक्षर हों, उन्हें असली कागज के बराबर ही माना जाएगा।
Non-Profit Organizations (NPO): ऐसी संस्थाएं जो लाभ के लिए नहीं, बल्कि धार्मिक या सामाजिक सेवा के लिए बनी हैं (जैसे ट्रस्ट, सोसाइटी या सेक्शन 8 कंपनियां)। इन्हें टैक्स कानून के तहत रजिस्टर्ड होना जरूरी है।
3. लेनदेन और संदिग्ध गतिविधियां (Transaction & Suspicion)
Transaction (लेनदेन): बैंक में किया गया कोई भी काम 'लेनदेन' है। इसमें सिर्फ पैसा जमा करना या निकालना ही नहीं, बल्कि लॉकर लेना, खाता खोलना, उपहार देना या किसी कानूनी समझौते (Fiduciary Relationship) में शामिल होना भी ट्रांजैक्शन माना जाता है।
Suspicious Transaction (संदिग्ध लेनदेन): बैंक ऐसे लेनदेन पर नजर रखते हैं जो अजीब लगें, जैसे:
वह पैसा जो किसी अपराध से कमाया गया हो।
ऐसा ट्रांजैक्शन जो बहुत जटिल हो और समझ न आए कि क्यों किया जा रहा है।
जिसका कोई ठोस आर्थिक आधार या नेक मकसद न दिखे।
जिसका संबंध आतंकवाद से होने का शक हो।
मुख्य अंतर: सामान्य vs डिजिटल
| विशेषता | सामान्य/ऑफलाइन KYC | डिजिटल KYC |
| फोटो | पासपोर्ट साइज फोटो चिपकाना | कैमरे से लाइव फोटो खींचना |
| लोकेशन | जरूरी नहीं | अक्षांश और देशांतर (GPS) अनिवार्य |
| सत्यापन | फिजिकल कॉपी की जांच | डिजिटल डेटा और ई-हस्ताक्षर की जांच |
1. यदि पते का प्रमाण (OVD) अपडेटेड न हो (Address Update Rules)
अगर आपके मुख्य पहचान पत्र (जैसे आधार या वोटर आईडी) पर पुराना पता है और आप नए पते पर रह रहे हैं, तो बैंक सीमित समय के लिए इन दस्तावेजों को पते के प्रमाण के रूप में स्वीकार कर सकता है:
यूटिलिटी बिल: बिजली, टेलीफोन, पोस्ट-पेड मोबाइल, पाइप्ड गैस या पानी का बिल (जो 2 महीने से पुराना न हो)।
टैक्स रसीद: प्रॉपर्टी या म्युनिसिपल टैक्स की रसीद।
पेंशन ऑर्डर (PPO): रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए।
एम्प्लॉयर लेटर: सरकारी या प्रतिष्ठित कंपनी द्वारा दिया गया आवास आवंटन पत्र।
चेतावनी: खाता खोलते समय आपको एक अंडरटेकिंग (सहमति पत्र) देना होगा कि आप 3 महीने के भीतर अपडेटेड पते वाला असली OVD जमा कर देंगे। अगर ऐसा नहीं किया, तो आपके खाते से पैसे निकालने (Debit) पर रोक लगा दी जाएगी।
2. डिजिटल और आधुनिक पहचान के तरीके
V-CIP (Video KYC): यह बैंक जाए बिना खाता खोलने का आधुनिक तरीका है। इसमें बैंक अधिकारी वीडियो कॉल के जरिए आपका चेहरा पहचानता है, आपके दस्तावेजों की लाइव जांच करता है और आपकी सहमति से पूरी प्रक्रिया की रिकॉर्डिंग करता है। इसे बैंक जाकर किए गए वेरिफिकेशन के बराबर ही माना जाता है।
Customer Due Diligence (CDD): इसका सीधा मतलब है ग्राहक की 'गहन जांच'। बैंक यह सुनिश्चित करता है कि ग्राहक और उसका असली मालिक (Beneficial Owner) वही है जो वह बता रहा है।
3. ग्राहकों के प्रकार
Customer: वह जो बैंक के साथ वित्तीय काम कर रहा है।
Walk-in Customer: वह व्यक्ति जिसका बैंक में खाता तो नहीं है, लेकिन वह किसी एक काम (जैसे कैश जमा करना या ड्राफ्ट बनाना) के लिए बैंक आया है।
Non Face-to-Face Customer: वे ग्राहक जो मोबाइल ऐप या वेबसाइट के जरिए खाता खोलते हैं और कभी बैंक शाखा नहीं जाते।
PEP (Politically Exposed Persons): ये वे लोग हैं जो विदेश में ऊंचे पदों पर रहे हैं (जैसे राष्ट्रपति, मंत्री, जज या सेना के बड़े अधिकारी)। बैंकों को इनके खातों पर ज्यादा सावधानी रखनी पड़ती है।
4. अंतरराष्ट्रीय टैक्स और ट्रांजैक्शन नियम (FATCA & CRS)
भारत सरकार अन्य देशों के साथ मिलकर टैक्स चोरी रोकने के लिए जानकारी साझा करती है:
FATCA: यह अमेरिका का कानून है। यदि कोई अमेरिकी नागरिक भारत में खाता खोलता है, तो बैंक इसकी जानकारी साझा करता है।
CRS: यह ओईसीडी (OECD) देशों के बीच का समझौता है, जिसके तहत कई देश आपस में एक-दूसरे के नागरिकों के वित्तीय खातों की जानकारी हर साल साझा करते हैं।
Wire Transfer (वायर ट्रांसफर): इलेक्ट्रॉनिक तरीके से पैसे भेजना।
Domestic: अगर भेजने वाला और पाने वाला बैंक एक ही देश (भारत) में हैं।
Cross-border: अगर पैसा एक देश से दूसरे देश भेजा जा रहा है।
मुख्य सारांश तालिका
| विषय | मुख्य बात | समय सीमा |
| अस्थाई पता प्रमाण | बिल/टैक्स रसीद मान्य | केवल 3 महीने के लिए |
| V-CIP | वीडियो कॉल पर पहचान | फेस-टू-फेस के बराबर |
| PEP | विदेशी नेता/अधिकारी | हाई रिस्क श्रेणी |
| Debit Freeze | पैसे निकालने पर रोक | OVD न देने पर |
1. KYC पॉलिसी के मुख्य उद्देश्य (Objectives)
इस पॉलिसी को बनाने के पीछे बैंक के तीन बड़े लक्ष्य हैं:
जोखिम प्रबंधन (Risk Management): ग्राहकों के वित्तीय व्यवहार को समझकर बैंक संभावित धोखाधड़ी या नुकसान से खुद को बचाता है।
कानूनी पालन (Compliance): PMLA, 2002 और सरकारी संस्थाओं के साथ सहयोग करना ताकि बैंक पर कोई कानूनी कार्रवाई न हो।
सुरक्षा: बैंकिंग सिस्टम को अपराधियों और आतंकियों से दूर रखना।
2. KYC पॉलिसी के 4 मुख्य स्तंभ (Key Elements)
किसी भी बैंक की KYC पॉलिसी इन 4 स्तंभों पर टिकी होती है:
Customer Acceptance Policy (CAP): ग्राहक को स्वीकार करने के नियम।
Risk Management: ग्राहक के जोखिम का आकलन करना।
Customer Identification Procedures (CIP): ग्राहक की पहचान सुनिश्चित करना।
Monitoring of Transactions: खातों में होने वाले लेनदेन पर नजर रखना।
3. ग्राहक स्वीकार्यता नीति (Customer Acceptance Policy - CAP)
बैंक हर किसी का खाता नहीं खोलता। खाता खोलने से पहले बैंक इन नियमों को पक्का करता है:
नाम की शुद्धता: कोई भी खाता फर्जी, गुमनाम या 'बेनामी' नाम से नहीं खोला जाएगा।
असहयोग की स्थिति: यदि ग्राहक जानकारी देने से मना करता है या उसके दस्तावेज संदिग्ध हैं, तो खाता नहीं खोला जाएगा। ऐसे मामलों में बैंक STR (Suspicious Transaction Report) भी दर्ज कर सकता है।
UCIC का फायदा: अगर आप बैंक के पुराने और KYC कम्प्लायंट ग्राहक हैं, तो दोबारा खाता खोलने के लिए फिर से लंबी प्रक्रिया की जरूरत नहीं होगी (UCIC लेवल पर चेकिंग होगी)।
सत्यापन (Verification): * PAN: इसकी जांच जारी करने वाली अथॉरिटी (Income Tax Dept) से की जाएगी।
GST: अगर GST नंबर दिया गया है, तो उसका भी वेरिफिकेशन होगा।
E-documents: डिजिटल हस्ताक्षरों की जांच IT Act, 2000 के तहत होगी।
प्रतिबंध सूची (Sanctions List): यदि किसी व्यक्ति का नाम सरकार या RBI की 'ब्लैकलिस्ट' (Sanctions List) में है, तो उसका खाता नहीं खोला जाएगा।
4. जोखिम प्रबंधन (Risk Management)
बैंक अपने ग्राहकों को उनकी प्रोफाइल के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटता है:
| जोखिम श्रेणी (Risk Category) | कौन शामिल है? |
| Low Risk (कम जोखिम) | वेतनभोगी कर्मचारी, सरकारी विभाग, छोटे व्यापारी या साधारण बचत खाते वाले लोग। |
| Medium Risk (मध्यम जोखिम) | ऐसे व्यवसाय जिनका टर्नओवर ज्यादा है या जो किसी विशेष क्षेत्र से जुड़े हैं। |
| High Risk (उच्च जोखिम) | PEPs (राजनेता/बड़े अधिकारी), ट्रस्ट, ज्वेलर्स, या वे जो विदेशों से बड़े लेनदेन करते हैं। |
वर्गीकरण का आधार: ग्राहक की पहचान, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, व्यवसाय की प्रकृति, लोकेशन और लेनदेन का तरीका।
5. महत्वपूर्ण बिंदु: संयुक्त खाते (Joint Accounts)
संयुक्त खाते के मामले में, सभी खाताधारकों (Joint Holders) का अलग-अलग CDD (Customer Due Diligence) प्रक्रिया से गुजरना अनिवार्य है। ऐसा नहीं हो सकता कि केवल एक व्यक्ति का KYC हो और दूसरे का नहीं।
1. केवाईसी का समय-समय पर नवीनीकरण (Periodic Updation)
बैंक ग्राहक के जोखिम (Risk) के आधार पर समय-समय पर नए दस्तावेजों की मांग करता है:
| ग्राहक की श्रेणी | केवाईसी अपडेट करने का समय |
| High Risk (उच्च जोखिम) | हर 2 साल में |
| Medium Risk (मध्यम जोखिम) | हर 8 साल में |
| Low Risk (कम जोखिम) | हर 10 साल में |
2. अपडेट करने की प्रक्रिया (Process)
व्यक्तिगत खातों (Individual Accounts) के लिए:
कोई बदलाव नहीं: अगर आपकी जानकारी (पता, नाम आदि) वही है, तो आप सिर्फ एक स्व-घोषणा (Self-declaration) पत्र देकर काम चला सकते हैं। यह ईमेल, मोबाइल, ATM या नेट बैंकिंग से दिया जा सकता है।
पता बदलने पर: अगर सिर्फ पता बदला है, तो आप नया पता और स्व-घोषणा पत्र डिजिटल माध्यम से दे सकते हैं। बैंक 2 महीने के भीतर इसकी जांच (जैसे वेरिफिकेशन लेटर भेजकर) करेगा।
नाबालिग से बालिग होने पर: जब कोई बच्चा (Minor) 18 साल का हो जाता है, तो उसे नए फोटो, हस्ताक्षर और ताजा केवाईसी दस्तावेज जमा करने होते हैं।
संस्थागत खातों (Non-Personal Accounts) के लिए:
यदि केवाईसी जानकारी में कोई बदलाव होता है, तो पूरी प्रक्रिया नए खाते खोलने की तरह दोबारा की जाती है।
3. सख्त कदम: खाता फ्रीज और बंद करना
अगर ग्राहक समय पर केवाईसी अपडेट नहीं करता, तो बैंक निम्नलिखित कदम उठाता है:
Temporary Freeze: बैंक ग्राहक को 30 दिनों के भीतर 10-10 दिनों के दो नोटिस भेजेगा। इसके बाद खाते को 'डेबिट फ्रीज' कर दिया जाएगा (यानी आप पैसे सिर्फ जमा कर पाएंगे, निकाल नहीं पाएंगे)।
PAN/Form 60: यदि ग्राहक पैन कार्ड या फॉर्म 60 जमा नहीं करता, तो भी खाता फ्रीज किया जा सकता है।
खाता बंद करना: यदि ग्राहक स्पष्ट रूप से कह देता है कि वह दस्तावेज नहीं देगा, तो बैंक के पास खाता बंद करने का अधिकार होता है।
4. आधार OTP आधारित खाते (E-KYC/OTP Based Accounts)
यदि आपने बैंक जाए बिना सिर्फ आधार ओटीपी (Aadhaar OTP) से खाता खोला है, तो आरबीआई के अनुसार उसकी कुछ कड़ी सीमाएं हैं:
सहमति: आपकी स्पष्ट सहमति अनिवार्य है।
बैलेंस की सीमा: खाते में किसी भी समय 1 लाख रुपये से ज्यादा बैलेंस नहीं होना चाहिए।
जमा सीमा: साल भर में सभी खातों को मिलाकर कुल जमा 2 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
लोन की सीमा: टर्म लोन (Term Loan) एक साल में 60,000 रुपये से ज्यादा नहीं हो सकता।
अनिवार्य शर्त: यदि एक साल के भीतर पूर्ण केवाईसी (Face-to-Face या V-CIP) नहीं की जाती, तो डिपॉजिट अकाउंट तुरंत बंद कर दिया जाएगा और लोन अकाउंट में डेबिट (पैसा निकालना) रोक दिया जाएगा।
5. ग्राहक पहचान प्रक्रिया (Customer Identification Procedure)
इसका सीधा मतलब है कि बैंक यह सुनिश्चित करेगा कि आप वही हैं जो आप होने का दावा कर रहे हैं। बैंक Beneficial Owner (असली मालिक) की भी पहचान करता है ताकि बेनामी लेनदेन न हो सके।
1. बैंक को KYC कब करना अनिवार्य है?
बैंक केवल खाता खोलते समय ही नहीं, बल्कि इन स्थितियों में भी आपकी पहचान सुनिश्चित करता है:
नया रिश्ता शुरू करते समय: जब आप बैंक में अपना पहला खाता खोलते हैं।
वॉक-इन कस्टमर (Walk-in Customer): यदि आपका बैंक में खाता नहीं है, लेकिन आप 50,000 रुपये या उससे अधिक का ट्रांजैक्शन (एक बार में या छोटे-छोटे टुकड़ों में) कर रहे हैं।
संदेह होने पर: यदि बैंक को लगता है कि आपके पुराने कागजात अब सही नहीं हैं या आप जानबूझकर 50,000 से कम के कई ट्रांजैक्शन कर रहे हैं ताकि जांच से बच सकें।
थर्ड पार्टी प्रोडक्ट्स: क्रेडिट कार्ड बिल भरना, ट्रैवल कार्ड लोड करना, या 50,000 रुपये से अधिक का कोई भी इंश्योरेंस या म्यूचुअल फंड खरीदना।
बिना पहचान (Introduction): अब खाता खोलने के लिए किसी पुराने खाताधारक की 'पहचान' (Introduction) की जरूरत नहीं होती, केवल आपके अपने दस्तावेज काफी हैं।
2. वीडियो आधारित पहचान (V-CIP) के फायदे
वीडियो केवाईसी (V-CIP) का इस्तेमाल बैंक इन कामों के लिए कर सकता है:
नया ग्राहक: नए व्यक्तिगत ग्राहकों को जोड़ने के लिए।
बिज़नेस (Proprietorship): प्रोप्राइटर (मालिक) की पहचान करने और फर्म के अस्तित्व के सबूत (Proof of Activity) की जांच करने के लिए।
अपग्रेड: यदि आपने ओटीपी (OTP) से खाता खोला था, तो उसे 'फुल केवाईसी' (Face-to-Face के बराबर) में बदलने के लिए।
KYC अपडेट: पुराने ग्राहकों के पते या फोटो अपडेट करने के लिए।
3. छोटा खाता (Small Account) - जिनके पास कागज नहीं हैं
यदि किसी व्यक्ति के पास कोई भी सरकारी दस्तावेज (OVD जैसे आधार, पैन) नहीं है, तो बैंक फिर भी उनका 'Small Account' खोल सकता है। इसकी कुछ सख्त सीमाएं हैं:
| नियम | सीमा (Limit) |
| कुल जमा (साल भर में) | 1 लाख रुपये से ज्यादा नहीं |
| निकासी (एक महीने में) | 10,000 रुपये से ज्यादा नहीं |
| अधिकतम बैलेंस | किसी भी समय 50,000 रुपये से ज्यादा नहीं |
| विदेशी पैसा | बाहर से पैसा मंगाना (Foreign Remittance) मना है |
| वैधता | शुरू में 12 महीने। अगर आपने OVD के लिए अप्लाई कर दिया है, तो 12 महीने और बढ़ सकते हैं (कुल 24 महीने)। |
4. आधार की अनिवार्यता (Section 15)
बैंक आपसे आधार नंबर तभी मांगता है जब:
आप किसी सरकारी योजना (Subsidy) या सब्सिडी का लाभ सीधे अपने खाते में लेना चाहते हैं (DBT)।
अन्यथा, आप अन्य OVD (जैसे वोटर आईडी या पासपोर्ट) का उपयोग भी कर सकते हैं।
5. महत्वपूर्ण प्रक्रिया: प्रोप्राइटरशिप फर्म (Proprietorship Firm)
यदि आप अपनी दुकान या फर्म के नाम पर खाता खोलते हैं, तो बैंक आपसे दो चीजें मांगता है:
प्रोप्राइटर की पहचान: (आधार, पैन आदि)।
बिजनेस का सबूत: (जैसे जीएसटी रजिस्ट्रेशन, दुकान स्थापना का लाइसेंस या कोई अन्य सरकारी प्रमाण)।
1. आधार और पहचान के विभिन्न तरीके
बैंक आपके पास मौजूद आधार की स्थिति के अनुसार अलग-अलग प्रक्रिया अपनाता है:
Offline Verification: यदि आपके आधार कार्ड का QR कोड स्कैन हो सकता है, तो बिना इंटरनेट/बायोमेट्रिक के भी सत्यापन किया जा सकता है।
e-KYC (Biometric/OTP): इसमें आपके अंगूठे के निशान या मोबाइल ओटीपी का उपयोग होता है।
CKYCR (KYC Identifier): यदि आपने पहले कभी KYC करवाया है, तो आप बैंक को केवल अपना 'KYC Identifier' नंबर और सहमति देकर पुराने रिकॉर्ड डाउनलोड करने की अनुमति दे सकते हैं।
PAN या Form-60: खाते के लिए पैन कार्ड अनिवार्य है; यदि पैन नहीं है, तो फॉर्म-60 भरना होगा।
2. विशेष परिस्थितियाँ (बीमारी या वृद्धावस्था)
अगर कोई ग्राहक सरकारी योजना (Subsidy) का लाभ लेना चाहता है, लेकिन चोट, बीमारी या बुढ़ापे के कारण उसके बायोमेट्रिक (अंगूठे का निशान) काम नहीं कर रहे हैं, तो बैंक:
उसका आधार नंबर लेगा।
सत्यापन के लिए Offline Verification करेगा या किसी अन्य OVD (जैसे वोटर आईडी) की सर्टिफाइड कॉपी लेगा।
यह सुनिश्चित करेगा कि ग्राहक को केवल बायोमेट्रिक न मिलने के कारण सब्सिडी से वंचित न रहना पड़े।
3. प्रोप्राइटरशिप फर्म के लिए जरूरी दस्तावेज (Sole Proprietorship)
एक प्रोप्राइटरशिप फर्म (जैसे आपकी अपनी दुकान या छोटा बिजनेस) के लिए बैंक को दो (2) ऐसे दस्तावेजों की जरूरत होती है जो फर्म के नाम पर हों। यदि बैंक संतुष्ट है, तो वह एक दस्तावेज भी मान सकता है।
मुख्य दस्तावेजों की सूची:
Udyam Registration Certificate (URC): सरकार द्वारा जारी उद्यम सर्टिफिकेट।
Shop & Establishment Act License: नगर पालिका द्वारा जारी दुकान का लाइसेंस।
GST/VAT/CST Certificate: टैक्स विभाग द्वारा जारी प्रमाण पत्र।
Income Tax Return (ITR): केवल रसीद नहीं, बल्कि पूरा ऑथेंटिकेटेड फॉर्म।
Professional License: जैसे चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) या डॉक्टर के लिए प्रैक्टिस सर्टिफिकेट।
Utility Bills: फर्म के नाम पर बिजली, पानी या लैंडलाइन बिल।
IEC (Importer Exporter Code): यदि आप आयात-निर्यात का काम करते हैं।
4. सत्यापन की प्रक्रिया (Online Verification)
बैंक केवल आपके कागजात लेता नहीं है, बल्कि उनकी शुद्धता भी जांचता है:
वोटर आईडी और पैन: बैंक इन दस्तावेजों को चुनाव आयोग और आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइटों से ऑनलाइन वेरीफाई करता है।
रिकॉर्ड: इस ऑनलाइन वेरिफिकेशन का प्रिंटआउट आपके खाता खोलने वाले फॉर्म (AOF) के साथ रिकॉर्ड में लगाया जाता है।
5. वित्तीय स्थिति की जानकारी
खाता खोलते समय बैंक आपसे आपकी आय और व्यवसाय के बारे में एक दस्तावेज मांग सकता है (जैसे सैलरी स्लिप या टर्नओवर का सबूत)। यदि आपके पास कोई कागजी सबूत नहीं है, तो बैंक आपसे 'Self-declaration' (स्व-घोषणा पत्र) भी ले सकता है।
1. कंपनी (Company) के लिए नियम
जब एक प्राइवेट या पब्लिक लिमिटेड कंपनी खाता खोलती है, तो बैंक को इन कागजातों की जरूरत होती है:
पहचान और नियम: कंपनी का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (Incorportation Certificate) और नियम वाली किताबें (MOA और AOA)।
PAN: कंपनी का अपना पैन कार्ड।
अधिकार पत्र (Board Resolution): बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स द्वारा पास किया गया एक प्रस्ताव, जिसमें बताया गया हो कि कंपनी की तरफ से खाता कौन चलाएगा।
व्यक्तिगत केवाईसी: उन सभी मैनेजरों या अधिकारियों के केवाईसी दस्तावेज जिनके पास खाता चलाने की पावर (Power of Attorney) है। साथ ही Beneficial Owner (असली मालिकों) की जानकारी।
पता: रजिस्टर्ड ऑफिस और काम करने वाली मुख्य जगह का पता।
2. पार्टनरशिप फर्म (Partnership Firm)
पार्टनरशिप में चलने वाले बिजनेस के लिए निम्नलिखित दस्तावेज अनिवार्य हैं:
रजिस्ट्रेशन और एग्रीमेंट: फर्म का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और पार्टनरशिप डीड (Partnership Deed)।
PAN: फर्म के नाम का पैन कार्ड।
पार्टनर्स की जानकारी: सभी पार्टनर्स के नाम और पते।
अधिकार: वह दस्तावेज जो बताता है कि कौन सा पार्टनर या कर्मचारी फर्म की ओर से लेनदेन करने के लिए अधिकृत है।
3. ट्रस्ट (Trust)
ट्रस्ट के मामले में पारदर्शिता बहुत जरूरी होती है, इसलिए बैंक ये मांगते हैं:
डीड और रजिस्ट्रेशन: ट्रस्ट डीड (Trust Deed) और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट।
PAN: ट्रस्ट का पैन कार्ड।
पदों की जानकारी: ट्रस्ट बनाने वाले (Settlor), ट्रस्टी और लाभार्थियों (Beneficiaries) के नाम और उनके केवाईसी दस्तावेज।
लेनदेन का अधिकार: ट्रस्टियों की सूची और वह प्रस्ताव जो किसी व्यक्ति को लेनदेन करने का अधिकार देता है।
4. अनइन्कॉर्पोरेटेड एसोसिएशन या व्यक्तियों का समूह (Unincorporated Association/BOI)
जैसे कि छोटी सोसायटियाँ या क्लब, जो किसी कंपनी के रूप में रजिस्टर्ड नहीं हैं:
प्रस्ताव (Resolution): मैनेजिंग बॉडी द्वारा पारित प्रस्ताव कि खाता कौन संभालेगा।
PAN: संस्था का पैन कार्ड या फॉर्म 60।
Power of Attorney: लेनदेन करने के लिए अधिकृत व्यक्ति का पावर ऑफ अटॉर्नी।
अतिरिक्त जानकारी: बैंक ऐसी संस्थाओं के अस्तित्व की पुष्टि करने के लिए अन्य जानकारी या स्पष्टीकरण भी मांग सकता है।
बैंक द्वारा भौतिक सत्यापन (Physical Verification)
जैसा कि आपने उल्लेख किया है, बैंक केवल कागज ही नहीं लेता बल्कि:
Contact Point Verification: बैंक का कोई प्रतिनिधि आपके बिजनेस के पते पर जाकर यह देखता है कि वहां वास्तव में काम हो रहा है या नहीं।
अस्तित्व की पुष्टि: बैंक संतुष्ट होना चाहता है कि दी गई जानकारी और बिजनेस का प्रकार सही है।
सारांश तालिका (Quick Reference)
| संस्था का प्रकार | मुख्य दस्तावेज | मुख्य आईडी |
| कंपनी | MOA / AOA / Board Resolution | Company PAN |
| पार्टनरशिप | Partnership Deed | Firm PAN |
| ट्रस्ट | Trust Deed | Trust PAN |
| एसोसिएशन | Managing Body Resolution | Entity PAN / Form 60 |
1. अपंजीकृत संस्थाएं (Unregistered Trusts/Partnership Firms)
बैंक के नियमों के अनुसार, यदि कोई ट्रस्ट या पार्टनरशिप फर्म कानूनी रूप से रजिस्टर्ड नहीं है, तो उन्हें 'Unincorporated Association' (असंगठित संघ) की श्रेणी में रखा जाता है।
इसमें सोसायटियाँ और 'Body of Individuals' (व्यक्तियों का समूह) भी शामिल हैं।
जरूरी दस्तावेज: बैंक ऐसे दस्तावेज मांगता है जो सामूहिक रूप से उस संस्था के अस्तित्व (Legal Existence) को साबित कर सकें। साथ ही, उस संस्था की ओर से काम करने वाले व्यक्तियों के KYC और पावर ऑफ अटॉर्नी अनिवार्य हैं।
2. न्यायिक व्यक्ति (Juridical Persons)
इसमें वे संस्थाएं आती हैं जो इंसान नहीं हैं लेकिन कानून की नजर में एक "व्यक्ति" हैं (जैसे सरकारी निकाय, विश्वविद्यालय आदि)।
पहचान: उस व्यक्ति के दस्तावेज जो संस्था की ओर से काम करने के लिए अधिकृत है।
खुलासा (Disclosure): ट्रस्ट के मामले में, ट्रस्टियों को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होती है, विशेषकर तब जब वे:
50,000 रुपये या उससे अधिक का लेनदेन कर रहे हों।
कोई भी अंतरराष्ट्रीय पैसा (International Money Transfer) भेज या मंगा रहे हों।
3. Enhanced Due Diligence (EDD): जब आप बैंक नहीं जाते
जब कोई ग्राहक बैंक जाए बिना या बिना वीडियो कॉल (V-CIP) के डिजिटल माध्यमों (जैसे CKYCR या DigiLocker) से खाता खोलता है, तो बैंक धोखाधड़ी रोकने के लिए Enhanced Due Diligence (EDD) यानी "कड़ी जांच" करता है:
V-CIP पहली पसंद: बैंक हमेशा ग्राहक को वीडियो केवाईसी (V-CIP) का पहला विकल्प देगा क्योंकि इसे फिजिकल वेरिफिकेशन के बराबर माना जाता है।
मोबाइल नंबर की सुरक्षा: धोखाधड़ी रोकने के लिए, खाते में वही मोबाइल नंबर रहेगा जिससे खाता खुला है। कोई दूसरा "वैकल्पिक" नंबर ओटीपी (OTP) के लिए नहीं जोड़ा जाएगा। नंबर बदलने के लिए बैंक की एक बहुत सख्त प्रक्रिया होगी।
पते की पुष्टि (Positive Confirmation): केवल एड्रेस प्रूफ लेना काफी नहीं है। बैंक वेरिफिकेशन लेटर भेजकर या फिजिकल जांच (Contact Point Verification) करके पते की पुष्टि करेगा, उसके बाद ही खाते से पैसा निकालने (Operations) की अनुमति मिलेगी।
पैन (PAN) की जांच: पैन कार्ड अनिवार्य है और इसे जारी करने वाली अथॉरिटी से ऑनलाइन वेरीफाई किया जाएगा।
पहला लेनदेन (First Credit): ऐसे खातों में पहला पैसा ग्राहक के किसी दूसरे पुराने केवाईसी-अनुपालित (KYC-compliant) बैंक खाते से ही आना चाहिए।
मुख्य सारांश तालिका
| स्थिति | मुख्य नियम |
| बिना रजिस्ट्रेशन वाली संस्था | 'Unincorporated Association' के रूप में पहचान। |
| ट्रस्ट का लेनदेन | 50,000+ या विदेशी लेनदेन पर ट्रस्टी का खुलासा अनिवार्य। |
| डिजिटल खाता सुरक्षा | केवल रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से ही ट्रांजैक्शन संभव। |
| पॉजिटिव कन्फर्मेशन | बैंक द्वारा पते की भौतिक या लिखित जांच अनिवार्य। |
1. बिना मिले खाता खोलना (Non-Face-to-Face Onboarding)
जैसा कि आपने बताया, जो ग्राहक बैंक आए बिना या बिना वीडियो केवाईसी (V-CIP) के खाता खोलते हैं, उनके लिए नियम बहुत सख्त हैं:
High-Risk श्रेणी: ऐसे ग्राहकों को तब तक 'हाई-रिस्क' माना जाता है जब तक उनका फिजिकल वेरिफिकेशन या V-CIP न हो जाए।
कड़ी निगरानी: इनके खातों के लेनदेन पर बैंक तब तक अतिरिक्त नजर रखता है जब तक पहचान पूरी तरह सुनिश्चित न हो जाए।
2. राजनेता और उनके करीबी (Politically Exposed Persons - PEPs)
PEPs वे लोग हैं जिन्हें विदेश में कोई बड़ा सरकारी पद मिला है। बैंक इनके साथ रिश्ता जोड़ने से पहले ये कदम उठाता है:
Senior Management की मंजूरी: सामान्य बैंक अधिकारी इनका खाता नहीं खोल सकते; इसके लिए सीनियर मैनेजमेंट की अनुमति जरूरी है।
पैसे का स्रोत: बैंक यह गहराई से जांचता है कि इनकी संपत्ति और फंड का स्रोत (Source of Wealth) क्या है।
परिवार पर भी लागू: ये नियम सिर्फ नेता पर नहीं, बल्कि उनके परिवार के सदस्यों और करीबियों पर भी लागू होते हैं।
चलती निगरानी: यदि कोई पुराना ग्राहक अचानक PEP बन जाता है, तो बैंक को रिश्ता जारी रखने के लिए फिर से सीनियर मैनेजमेंट की अनुमति लेनी पड़ती है।
3. प्रोफेशनल इंटरमीडियरीज (जैसे CA, वकील या ब्रोकर्स)
जब कोई पेशेवर मध्यस्थ (Intermediary) किसी ग्राहक की ओर से खाता चलाता है:
जानकारी का खुलासा: बैंक ऐसे मध्यस्थों के साथ खाता नहीं खोलेगा जो गोपनीयता का हवाला देकर ग्राहक की जानकारी देने से मना करें।
अंतिम जिम्मेदारी: भले ही बैंक किसी मध्यस्थ द्वारा किए गए केवाईसी पर भरोसा करे, लेकिन ग्राहक को सही से जानने की अंतिम जिम्मेदारी बैंक की ही होती है।
4. सरल केवाईसी नियम (Simplified Due Diligence)
स्वयं सहायता समूह (SHGs):
बचत खाता खोलते समय: ग्रुप के सभी सदस्यों का केवाईसी जरूरी नहीं है। केवल पदाधिकारियों (Office Bearers) का केवाईसी ही काफी है।
लोन लेते समय: जब SHG बैंक से लोन (Credit Linkage) लेगा, तब सभी सदस्यों का केवाईसी करना अनिवार्य हो जाता है।
विदेशी छात्रों (Foreign Students) के लिए:
विदेशी छात्र भारत में NRO (Non-Resident Ordinary) खाता खोल सकते हैं:
जरूरी दस्तावेज: पासपोर्ट (वीजा और इमिग्रेशन स्टैम्प के साथ), फोटो, और भारतीय शिक्षण संस्थान का एडमिशन लेटर।
शर्तें: * खाता खुलने के 30 दिनों के भीतर स्थानीय पते (Local Address) का प्रमाण देना और उसे वेरीफाई करवाना होगा।
इन 30 दिनों के दौरान, खाते में विदेश से अधिकतम $1,000 ही मंगाए जा सकते हैं और कुल जमा सीमा 50,000 रुपये होगी।
विशेष नियम: पाकिस्तानी नागरिकों को खाता खोलने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की पूर्व अनुमति अनिवार्य है।
मुख्य सारांश तालिका
| श्रेणी | मुख्य शर्त | विशेष बात |
| PEP (राजनेता) | सीनियर मैनेजमेंट की अनुमति | परिवार पर भी नियम लागू |
| विदेशी छात्र | एडमिशन लेटर + पासपोर्ट | 30 दिन में लोकल एड्रेस जरूरी |
| SHG | केवल पदाधिकारियों का KYC | लोन के समय सबका KYC |
| Digital Account | हाई-रिस्क निगरानी | V-CIP होने तक कड़ी नजर |
1. विदेशी संस्थागत निवेशक (FPIs) के लिए सरल नियम
विदेशी निवेशक (FPIs) जो भारतीय शेयर बाजार में निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए SEBI के दिशा-निर्देशों के अनुसार केवाईसी प्रक्रिया को सरल बनाया गया है:
दस्तावेजों में छूट: बैंक निवेश के लिए जरूरी कागजात स्वीकार करता है, लेकिन कुछ विशेष दस्तावेजों में छूट दी जा सकती है।
वचन पत्र (Undertaking): निवेशक या उनके संरक्षक (Global Custodian) को एक लिखित वादा करना होता है कि जब भी बैंक को उन दस्तावेजों की जरूरत होगी, वे उन्हें तुरंत उपलब्ध कराएंगे।
FATCA/CRS: इन निवेशकों को अंतरराष्ट्रीय टैक्स नियमों (जैसे अमेरिका का FATCA) का पालन करना अनिवार्य है।
2. FIU-India को रिपोर्टिंग (Reporting Requirements)
FIU-IND एक केंद्रीय एजेंसी है जो संदिग्ध पैसों के लेन-देन पर नजर रखती है। बैंकों को कानूनन कुछ खास तरह की रिपोर्ट उन्हें भेजनी होती है।
यहाँ दी गई तालिका इन रिपोर्टों को विस्तार से समझाती है:
| क्र.सं. | रिपोर्ट का नाम | विवरण (कब भेजी जाती है?) | कब तक भेजनी है? |
| 1 | Cash Transaction Report (CTR) | जब एक महीने में 10 लाख रुपये से अधिक का नकद लेनदेन (एक बार में या छोटे टुकड़ों में) किया जाए। | अगले महीने की 15 तारीख तक। |
| 2 | Suspicious Transaction Report (STR) | जब किसी लेनदेन पर शक हो (चाहे वह 1 रुपये का ही क्यों न हो या फेल हो गया हो)। | शक पुख्ता होने के 7 दिनों के भीतर। |
| 3 | Counterfeit Currency Report (CCR) | जब बैंक में जाली नोट या फर्जी दस्तावेज पकड़े जाएं। | अगले महीने की 15 तारीख तक। |
| 4 | Non-Profit Organizations Report (NTR) | जब किसी NPO (ट्रस्ट/एनजीओ) के खाते में 10 लाख रुपये से अधिक का विदेशी लेनदेन हो। | अगले महीने की 15 तारीख तक। |
| 5 | Cross Border Wire Transfer (CWTR) | जब भारत से बाहर या बाहर से भारत 5 लाख रुपये से अधिक का इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर हो। | अगले महीने की 15 तारीख तक। |
3. मुख्य बातें जो ध्यान देने योग्य हैं:
सीक्रेसी (Secrecy): जब बैंक किसी ग्राहक की STR (संदिग्ध रिपोर्ट) भेजता है, तो कानूनन वह ग्राहक को यह नहीं बता सकता कि उसके खिलाफ रिपोर्ट भेजी गई है। इसे "Tipping-off" कहते हैं, जो कि गैरकानूनी है।
STR में कोई सीमा नहीं: CTR के लिए 10 लाख की सीमा है, लेकिन STR के लिए कोई न्यूनतम सीमा नहीं है। अगर 500 रुपये का लेनदेन भी संदिग्ध लगता है, तो उसकी रिपोर्ट भेजी जाती है।
कनेक्टेड ट्रांजैक्शन: अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर 10 लाख की सीमा से बचने के लिए एक ही महीने में 2-2 लाख के 6 ट्रांजैक्शन करता है, तो उसे भी CTR में गिना जाएगा।
सारांश: यह पूरी व्यवस्था यह सुनिश्चित करने के लिए है कि भारत के बैंकिंग चैनल का उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग या आतंकवाद की फंडिंग के लिए न किया जा सके।
1. व्यक्तिगत खातों के लिए नियम (Individuals)
जब आप खाता खोलते हैं, तो आप बैंक को अपनी "अनुमानित वार्षिक आय" (Expected Annual Income) बताते हैं। उसके आधार पर सीमा इस प्रकार तय होती है:
दस्तावेज देने पर: यदि आपने अपनी आय के सबूत (जैसे सैलरी स्लिप या ITR) दिए हैं, तो आपकी सीमा आपके द्वारा बताई गई सालाना आय का 150% होगी।
केवल स्व-घोषणा (Self-declaration) देने पर: यदि आपके पास आय का कोई दस्तावेजी सबूत नहीं है, तो भी सीमा 150% ही रहेगी, लेकिन इसकी एक अधिकतम लिमिट (Cap) है:
बचत खाता (SF): अधिकतम ₹18 लाख सालाना।
करेंट/OD/CC खाता: अधिकतम ₹60 लाख सालाना।
2. विशेष श्रेणियों के लिए सीमा
कुछ खातों के लिए सरकार और बैंक ने पहले से ही सीमा तय कर दी है:
Small Accounts (छोटे खाते): अधिकतम ₹1 लाख सालाना।
BSBD और BC लोकेशन्स वाले खाते: अधिकतम ₹6 लाख सालाना।
3. कानूनी संस्थाओं (Legal Entities) के लिए नियम
कंपनियों, फर्मों और ट्रस्टों के लिए सीमा उनके व्यवसाय के प्रकार और शाखा (Branch) की लोकेशन पर निर्भर करती है।
Table II (अधिकतम सीमा - लाख रुपये में):
| संस्था का प्रकार | ग्रामीण/अर्ध-शहरी शाखा | शहरी/मेट्रो शाखा |
| Public Ltd Co / NBFC | 500 लाख (5 Cr) | 1500 लाख (15 Cr) |
| Pvt Ltd Co / LLP | 200 लाख (2 Cr) | 500 लाख (5 Cr) |
| Partnership/Trust/Society | 80 लाख | 100 लाख (1 Cr) |
| Proprietorship/HUF | 60 लाख | 80 लाख |
| अन्य संस्थाएं | 50 लाख | 60 लाख |
4. सीमाओं की समीक्षा (Threshold Review)
बैंक हर वित्तीय वर्ष (Financial Year) की शुरुआत में इन सीमाओं की दोबारा जांच करता है:
Small Accounts: हमेशा ₹1 लाख पर स्थिर रहेंगे।
BSBD/BC Accounts: ₹6 लाख पर रहेंगे।
अन्य सभी खाते (Savings/Current/CC/OD): पिछले साल आपके खाते में कुल जितना पैसा जमा हुआ था, उसका 150% या जो सीमा पहले से तय थी—इनमें से जो भी ज्यादा हो, उसे नई सीमा मान लिया जाएगा।
यह क्यों जरूरी है?
यदि आपके खाते में लेनदेन इस 'Threshold Limit' को पार कर जाता है, तो बैंक का सिस्टम एक Alert जारी करता है। इसके बाद बैंक आपसे पूछ सकता है कि अचानक इतना पैसा कहाँ से आया। इसे ही Transaction Monitoring कहते हैं।
1. बचत ब्याज गणना (Saving Interest Calculation)
नियम: बैंक अब आपके खाते में हर दिन के अंत में बचे हुए बैलेंस (Daily Balance) पर ब्याज की गणना करता है।
भुगतान चक्र: यह ब्याज साल में चार बार आपके खाते में जमा (Credit) किया जाता है: फरवरी, मई, अगस्त और नवंबर में।
महत्व: यदि आप महीने की 2 तारीख को पैसा निकालते हैं और 20 को वापस जमा करते हैं, तो आपको उन 18 दिनों का ब्याज नहीं मिलेगा, लेकिन बाकी दिनों का मिलेगा।
2. बल्क डिपॉजिट (Bulk Deposit)
पूरा नाम: Bulk Deposit (बड़ी जमा राशि)
नियम: अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (Scheduled Commercial Banks) और स्मॉल फाइनेंस बैंकों (SFB) के लिए ₹3 करोड़ और उससे अधिक की एकल सावधि जमा (Single Term Deposit) को 'बल्क डिपॉजिट' कहा जाता है।
नोट: क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) के लिए यह सीमा अलग हो सकती है।
3. वरिष्ठ और अति-वरिष्ठ नागरिकों के लिए अतिरिक्त ब्याज
Senior Citizen (60 से 80 वर्ष): इन्हें ₹3 करोड़ से कम की जमा पर 5 साल तक की अवधि के लिए 0.50% (50 bps) और 5 साल से अधिक के लिए 0.80% (80 bps) अतिरिक्त ब्याज मिलता है।
Super Senior Citizen (80 वर्ष और अधिक): इन्हें सभी समयावधि (Maturity Buckets) पर हमेशा 0.80% (80 bps) अतिरिक्त ब्याज मिलता है।
PNB Tax Saver FD: बैंक के कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों (Staff/Retired Staff) को कार्ड रेट से अधिकतम 1.00% (100 bps) तक अतिरिक्त ब्याज मिल सकता है।
4. इंटर-सॉल लेनदेन (Intersol Transactions)
यहाँ SOL का मतलब Service Outlet (बैंक शाखा) है।
Parent SOL / Base Branch: वह शाखा जहाँ आपने अपना खाता खुलवाया है।
Non-Parent / Service SOL: बैंक की कोई भी दूसरी शाखा (बेस ब्रांच के अलावा)।
Remote SOL: ऐसी शाखा जहाँ न तो पैसे देने वाले (Drawer) का खाता है और न ही पाने वाले (Payee) का।
शर्त: इन शाखाओं से लेनदेन के लिए खाते में मोबाइल नंबर अपडेट होना अनिवार्य है।
लेनदेन की सीमाएं (Limits):
| विवरण | बचत खाता (Saving) | चालू खाता (Current) |
| स्वयं के चेक से नकद (Self Cash) | अधिकतम ₹5 लाख | अधिकतम ₹5 लाख |
| तीसरे पक्ष को नकद (3rd Party Cash) | अधिकतम ₹50,000 प्रतिदिन | अधिकतम ₹1,00,000 प्रतिदिन |
| रिमोट सॉल पर डेबिट ट्रांसफर | अधिकतम ₹1,00,000 प्रतिदिन | अधिकतम ₹2,00,000 प्रतिदिन |
5. न्यूनतम बैलेंस शुल्क की माफी (Waiver of Penal Charges)
नियम: 01 जुलाई 2025 से PNB ने सभी बचत खाता योजनाओं में न्यूनतम औसत बैलेंस (Minimum Average Balance - MAB) न बनाए रखने पर लगने वाले जुर्माने को पूरी तरह खत्म कर दिया है। अब बैलेंस कम होने पर कोई चार्ज नहीं कटेगा।
6. बैलेंस के आधार पर ब्याज दरें (Slab-wise Interest)
आपका बैलेंस जितना अधिक होगा, ब्याज दर उतनी ही अधिक होगी:
₹100 Cr तक: 2.50% वार्षिक
₹100 Cr से ₹500 Cr: 2.70% वार्षिक
₹500 Cr से ₹1,000 Cr: 3.60% वार्षिक
₹1,000 Cr से ₹2,000 Cr: 3.75% वार्षिक
₹2,000 Cr से अधिक: 4.25% वार्षिक
7. DICGC - जमा बीमा (Deposit Insurance)
पूरा नाम: Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation (जमा बीमा और क्रेडिट गारंटी निगम)
बीमा राशि: यदि बैंक विफल होता है, तो प्रत्येक जमाकर्ता को अधिकतम ₹5 लाख (मूलधन + ब्याज) तक की सुरक्षा मिलती है।
प्रीमियम: इसका खर्च बैंक उठाता है, जो 12 पैसे प्रति ₹100 (प्रति वर्ष) होता है।
8. महत्वपूर्ण शॉर्ट फॉर्म्स (Exam के लिए Imp)
ALM: Asset Liability Management (संपत्ति देयता प्रबंधन)
IRMD: Integrated Risk Management Division (एकीकृत जोखिम प्रबंधन विभाग)
BPS: Basis Points (100 bps = 1%)
SOL: Service Outlet (शाखा कोड/पहचान)
MAB: Minimum Average Balance (न्यूनतम औसत शेष)
DICGC: Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation
P.A.: Per Annum (प्रति वर्ष)
1. PNB उन्नति सेविंग फंड अकाउंट (Savings Account – General)
यह PNB का सबसे सामान्य बचत खाता है। इसके मुख्य नियम इस प्रकार हैं:
पात्रता (Eligibility): भारत के निवासी (अकेले या संयुक्त), एसोसिएशन, ट्रस्ट, HUF (Hindu Undivided Family), क्लब और सोसायटियाँ।
न्यूनतम शेष (QAB - Quarterly Average Balance): इस खाते में आपको शहर के अनुसार न्यूनतम बैलेंस रखना होता है।
Rural (ग्रामीण): ₹500
Semi-Urban (अर्ध-शहरी): ₹1,000
Urban/Metro (शहरी/मेट्रो): ₹2,000
डेबिट एंट्री की सीमा (Debit Entry Limit): साल में केवल 50 डेबिट एंट्री (पैसे निकालना) मुफ्त हैं।
ध्यान दें: इसमें IBS (Internet Banking Service), ATM, और SI (Standing Instructions) के ज़रिए होने वाले लेनदेन को नहीं गिना जाता। यदि आप काउंटर (ब्रांच) से 50 से ज़्यादा बार पैसे निकालते हैं, तो चार्ज लगेगा।
चेक बुक: साल में 20 पन्ने (Leaves) वाली पर्सनलाइज्ड मल्टीसिटी चेकबुक फ्री मिलती है।
इंटरनेट बैंकिंग: फ्री इंटरनेट बैंकिंग मिलती है, लेकिन ध्यान रखें कि Internet Banking के ज़रिए फंड ट्रांसफर पर NEFT/RTGS की सुविधा इस स्कीम में नहीं है (यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण पॉइंट है)। हालांकि, ब्रांच से NEFT/RTGS किया जा सकता है।
बीमा: DICGC द्वारा ₹5 लाख तक का बीमा।
2. PNB SF प्रूडेंट स्वीप डिपॉजिट स्कीम (Sweep Deposit Scheme)
यह स्कीम उन लोगों के लिए है जो अपने बचत खाते पर FD (सावधि जमा) जैसा ब्याज चाहते हैं।
प्रक्रिया (Sweep-in & Out):
थ्रेशोल्ड/कट-ऑफ: ₹50,000। जैसे ही आपके खाते में ₹50,000 से ज़्यादा पैसे होंगे, स्वीप सुविधा चालू हो जाएगी।
न्यूनतम स्वीप: कम से कम ₹5,000 और उसके बाद ₹5,000 के गुणकों (Multiples) में पैसा अपने आप FD (जिसे यहाँ FFD - Flexible Fixed Deposit कहते हैं) बन जाएगा।
उदाहरण: अगर खाते में ₹62,000 हैं, तो ₹50,000 छोड़कर बाकी के ₹12,000 में से ₹10,000 की FD बन जाएगी और ₹2,000 बचत खाते में ही रहेंगे।
LIFO नियम (Last In First Out): जब आपको पैसों की ज़रूरत होगी और आप चेक काटेंगे या पैसे निकालेंगे, तो बैंक सबसे आखिरी में बनी FD को सबसे पहले तोड़ेगा। इससे पुरानी FD पर मिलने वाले ब्याज का नुकसान कम होता है।
अवधि: ये FD (FDRs) 46 दिन से 3 साल तक की अवधि के लिए बनती हैं।
न्यूनतम बैलेंस (QAB): इसमें ₹25,000 का औसत बैलेंस रखना अनिवार्य है। न रखने पर ₹400 प्रति तिमाही का भारी जुर्माना है।
छूट (Concessions): * RTGS/NEFT पर 50% की छूट।
डीमैट (De-mat) सेवाओं के AMC (Annual Maintenance Charge) पर पहले साल 50% की छूट।
₹25,000 तक के बाहरी चेक (Outstation Checks) का कलेक्शन फ्री (सिर्फ वास्तविक खर्च या Out of pocket charges लगेंगे)।
3. इनऑपरेटिव / डॉर्मेंट अकाउंट (Inoperative / Dormant Account)
यह नियम खातों की सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है:
समय सीमा: यदि खाते में लगातार 2 साल (24 महीने) तक ग्राहक की ओर से कोई लेनदेन (Transaction) नहीं होता, तो उसे 'इनऑपरेटिव' मान लिया जाता है।
एक्सटेंडेड पीरियड (Extended Period): यदि बैंक ग्राहक से संपर्क करता है और ग्राहक कारण बता देता है (जैसे विदेश में होना), तो बैंक उसे 1 साल का अतिरिक्त समय देता है।
अंतिम वर्गीकरण: यदि उस 1 साल की अतिरिक्त अवधि के बाद भी ग्राहक कोई लेनदेन नहीं करता, तो खाता अनिवार्य रूप से 'Inoperative' कर दिया जाता है।
लेनदेन का मतलब: इसमें ग्राहक द्वारा किया गया डेबिट या क्रेडिट (जैसे चेक, ATM, मोबाइल बैंकिंग) शामिल है। बैंक द्वारा जमा किया गया 'ब्याज' इसमें नहीं गिना जाता।
महत्वपूर्ण फुल फॉर्म (Short Names for Exam)
RLBD: Retail Liabilities Banking Division (रिटेल लायबिलिटी बैंकिंग डिवीजन)
HUF: Hindu Undivided Family (हिंदू अविभाजित परिवार)
QAB: Quarterly Average Balance (तिमाही औसत शेष)
IBS: Internet Banking Service (इंटरनेट बैंकिंग सेवा)
SI: Standing Instruction (स्थायी निर्देश - जैसे हर महीने ऑटोमैटिक बिल पेमेंट)
LIFO: Last In First Out (आखिरी आया, पहले गया)
FFD: Flexible Fixed Deposit (लचीली सावधि जमा)
AMC: Annual Maintenance Charge (वार्षिक रखरखाव शुल्क)
ECS: Electronic Clearing Service (इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग सेवा)
1. पात्रता और मुख्य उद्देश्य
यह योजना उन संस्थाओं (Institutions) के लिए है जो आरबीआई के नियमों के अनुसार बचत खाता (Savings Account) खोलने के लिए पात्र हैं (जैसे ट्रस्ट, सोसायटियाँ, एसोसिएशन आदि)। इसका मुख्य उद्देश्य संस्था के पास पड़े फालतू फंड पर बचत खाते से अधिक ब्याज दिलाना है।
2. वेरिएंट के आधार पर तुलनात्मक विश्लेषण
| विवरण | Standard (SBPPI) | Classic (SBCPI) | Advantage (SBAPI) |
| न्यूनतम तिमाही शेष (QAB) | ₹1.00 लाख | ₹5.00 लाख | ₹10.00 लाख |
| QAB न रखने पर जुर्माना | ₹400/- | ₹1000/- | ₹1500/- |
| स्वीप के लिए कट-ऑफ | ₹5.00 लाख | ₹8.00 लाख | ₹10.00 लाख |
| स्वीप की राशि (Multiples) | ₹1.00 लाख | ₹1.00 लाख | ₹1.00 लाख |
| FFD की अवधि | 7 से 90 दिन | 46 से 180 दिन | 46 दिन से 1 वर्ष |
| मुफ्त नकद जमा (प्रति दिन) | ₹1.00 लाख | ₹2.00 लाख | ₹3.00 लाख |
3. संचालन का तरीका (Operational Modality) - गहराई से समझें
संस्थागत खातों में स्वीप का तरीका व्यक्तिगत खातों से थोड़ा अलग और बड़े स्तर का है:
स्वीप की आवृत्ति (Frequency): व्यक्तिगत खातों में स्वीप 'डेली' (रोजाना) होता है, लेकिन संस्थागत खातों में स्वीप हर मंगलवार (Every Tuesday) को होता है। यदि मंगलवार को छुट्टी है, तो अगले कार्यदिवस पर होगा।
डेबिट का क्रम: यदि कोई चेक या पेमेंट आता है, तो सबसे पहले बचत खाते में मौजूद 'लिक्विड बैलेंस' (जैसे Standard में ₹5 लाख तक) का उपयोग होगा। यदि भुगतान उससे ज्यादा का है, तो बैंक बनी हुई FFD को तोड़ना शुरू करेगा।
LIFO (Last In First Out): जो FD (FFD) सबसे अंत में बनी थी, उसे सबसे पहले तोड़ा जाएगा। यह इसलिए किया जाता है ताकि जो पुरानी FD है, उस पर मिल रहा ब्याज सुरक्षित रहे।
मल्टीपल: FFD हमेशा ₹1.00 लाख के टुकड़ों में ही टूटेगी।
4. रियायतें और लाभ (Free/Concessions)
संस्थाओं को आकर्षित करने के लिए बैंक इसमें कई मुफ्त सुविधाएं देता है:
DD (Demand Draft):
Standard: हर महीने ₹25,000 तक का एक DD फ्री।
Classic: हर महीने ₹50,000 तक के (अधिकतम दो) DD फ्री।
Advantage: हर महीने ₹1,00,000 तक के (अधिकतम दो) DD फ्री।
डिजिटल ट्रांजैक्शन: तीनों वेरिएंट्स में NACH, RTGS और NEFT पूरी तरह से मुफ्त (Zero Charges) हैं। संस्थाओं के लिए यह एक बहुत बड़ा फायदा है क्योंकि उनका लेनदेन अक्सर भारी मात्रा में होता है।
कैश डिपॉजिट: ब्रांच में नकद जमा करने पर भी वेरिएंट के हिसाब से ₹1 लाख से ₹3 लाख तक की छूट दी गई है।
5. महत्वपूर्ण शॉर्ट नेम्स (Exam के लिए Imp)
SBPPI: Savinig Bank Prudent Sweep for Public Institutions (Standard)
SBCPI: Savinig Bank Prudent Sweep for Public Institutions (Classic)
SBAPI: Savinig Bank Prudent Sweep for Public Institutions (Advantage)
FFD: Flexible Fixed Deposit
NACH: National Automated Clearing House
LIFO: Last In First Out
QAB: Quarterly Average Balance
गहराई से विश्लेषण (Deep Insight):
अगर आप Advantage (SBAPI) वेरिएंट लेते हैं, तो बैंक आपसे ₹10 लाख का बैलेंस रखने की अपेक्षा करता है। इसके बदले में बैंक आपको 1 साल तक की FD करने की अनुमति देता है, जिस पर ब्याज काफी अधिक मिलता है। वहीं Standard में अवधि केवल 90 दिन तक सीमित है। संस्थाओं को अपनी नकदी की जरूरत (Liquidity) के हिसाब से वेरिएंट चुनना चाहिए।
'प्रूडेंट स्वीप' योजना के बारे में है। व्यक्तिगत स्वीप योजना के मुकाबले इसके नियम काफी अलग हैं।
आइए इसके तीनों वेरिएंट्स (Standard, Classic, Advantage) को गहराई से समझते हैं:
1. पात्रता और मुख्य उद्देश्य
यह योजना उन संस्थाओं (Institutions) के लिए है जो आरबीआई के नियमों के अनुसार बचत खाता (Savings Account) खोलने के लिए पात्र हैं (जैसे ट्रस्ट, सोसायटियाँ, एसोसिएशन आदि)। इसका मुख्य उद्देश्य संस्था के पास पड़े फालतू फंड पर बचत खाते से अधिक ब्याज दिलाना है।
2. वेरिएंट के आधार पर तुलनात्मक विश्लेषण
| विवरण | Standard (SBPPI) | Classic (SBCPI) | Advantage (SBAPI) |
| न्यूनतम तिमाही शेष (QAB) | ₹1.00 लाख | ₹5.00 लाख | ₹10.00 लाख |
| QAB न रखने पर जुर्माना | ₹400/- | ₹1000/- | ₹1500/- |
| स्वीप के लिए कट-ऑफ | ₹5.00 लाख | ₹8.00 लाख | ₹10.00 लाख |
| स्वीप की राशि (Multiples) | ₹1.00 लाख | ₹1.00 लाख | ₹1.00 लाख |
| FFD की अवधि | 7 से 90 दिन | 46 से 180 दिन | 46 दिन से 1 वर्ष |
| मुफ्त नकद जमा (प्रति दिन) | ₹1.00 लाख | ₹2.00 लाख | ₹3.00 लाख |
3. संचालन का तरीका (Operational Modality) - गहराई से समझें
संस्थागत खातों में स्वीप का तरीका व्यक्तिगत खातों से थोड़ा अलग और बड़े स्तर का है:
स्वीप की आवृत्ति (Frequency): व्यक्तिगत खातों में स्वीप 'डेली' (रोजाना) होता है, लेकिन संस्थागत खातों में स्वीप हर मंगलवार (Every Tuesday) को होता है। यदि मंगलवार को छुट्टी है, तो अगले कार्यदिवस पर होगा।
डेबिट का क्रम: यदि कोई चेक या पेमेंट आता है, तो सबसे पहले बचत खाते में मौजूद 'लिक्विड बैलेंस' (जैसे Standard में ₹5 लाख तक) का उपयोग होगा। यदि भुगतान उससे ज्यादा का है, तो बैंक बनी हुई FFD को तोड़ना शुरू करेगा।
LIFO (Last In First Out): जो FD (FFD) सबसे अंत में बनी थी, उसे सबसे पहले तोड़ा जाएगा। यह इसलिए किया जाता है ताकि जो पुरानी FD है, उस पर मिल रहा ब्याज सुरक्षित रहे।
मल्टीपल: FFD हमेशा ₹1.00 लाख के टुकड़ों में ही टूटेगी।
4. रियायतें और लाभ (Free/Concessions)
संस्थाओं को आकर्षित करने के लिए बैंक इसमें कई मुफ्त सुविधाएं देता है:
DD (Demand Draft):
Standard: हर महीने ₹25,000 तक का एक DD फ्री।
Classic: हर महीने ₹50,000 तक के (अधिकतम दो) DD फ्री।
Advantage: हर महीने ₹1,00,000 तक के (अधिकतम दो) DD फ्री।
डिजिटल ट्रांजैक्शन: तीनों वेरिएंट्स में NACH, RTGS और NEFT पूरी तरह से मुफ्त (Zero Charges) हैं। संस्थाओं के लिए यह एक बहुत बड़ा फायदा है क्योंकि उनका लेनदेन अक्सर भारी मात्रा में होता है।
कैश डिपॉजिट: ब्रांच में नकद जमा करने पर भी वेरिएंट के हिसाब से ₹1 लाख से ₹3 लाख तक की छूट दी गई है।
5. महत्वपूर्ण शॉर्ट नेम्स (Exam के लिए Imp)
SBPPI: Savinig Bank Prudent Sweep for Public Institutions (Standard)
SBCPI: Savinig Bank Prudent Sweep for Public Institutions (Classic)
SBAPI: Savinig Bank Prudent Sweep for Public Institutions (Advantage)
FFD: Flexible Fixed Deposit
NACH: National Automated Clearing House
LIFO: Last In First Out
QAB: Quarterly Average Balance
गहराई से विश्लेषण (Deep Insight):
अगर आप Advantage (SBAPI) वेरिएंट लेते हैं, तो बैंक आपसे ₹10 लाख का बैलेंस रखने की अपेक्षा करता है। इसके बदले में बैंक आपको 1 साल तक की FD करने की अनुमति देता है, जिस पर ब्याज काफी अधिक मिलता है। वहीं Standard में अवधि केवल 90 दिन तक सीमित है। संस्थाओं को अपनी नकदी की जरूरत (Liquidity) के हिसाब से वेरिएंट चुनना चाहिए।
यह जानकारी PNB के Basic Saving Bank Deposit Account (BSBDA) के बारे में है, जिसे आम भाषा में 'जीरो बैलेंस खाता' भी कहा जाता है। यह खाता समाज के हर वर्ग, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को बैंकिंग से जोड़ने के लिए बनाया गया है।
आइए इसकी बारीकियों को गहराई से समझते हैं:
1. पात्रता (Eligibility): बैंक का समावेशी दृष्टिकोण
यह खाता केवल सामान्य व्यक्तियों के लिए ही नहीं, बल्कि बैंक ने इसे बहुत सरल बनाया है:
नाबालिग (Minors): 10 वर्ष या उससे अधिक आयु के बच्चे इसे स्वयं चला सकते हैं। उससे छोटे बच्चों का खाता अभिभावक (Guardian) के साथ खुलता है।
विशेष सहायता: निरक्षर (Illiterate) और दृष्टिबाधित (Visually Impaired) व्यक्ति भी इसे खोल सकते हैं। बैंक इनके लिए विशेष सुरक्षा उपाय (Precautions) अपनाता है।
न्यूनतम शेष (QAB): इसमें कोई पैसा (Nil Balance) रखने की मजबूरी नहीं है।
2. खातों की पाबंदी (Account Constraints)
यह इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण "कानूनी" बिंदु है:
नियम: यदि आपके पास BSBDA खाता है, तो आप उसी बैंक में कोई दूसरा बचत खाता (Savings Account) नहीं रख सकते।
समय सीमा: यदि आपका पहले से कोई बचत खाता है, तो BSBDA खोलने के 30 दिनों के भीतर उसे बंद करना अनिवार्य है।
अपवाद: आप सावधि जमा (FD) या आवर्ती जमा (RD) जैसे अन्य खाते रख सकते हैं, केवल दूसरा 'बचत खाता' मना है।
3. लेनदेन की सीमाएँ और सुविधाएँ (Transactions & Features)
जमा (Deposits): पैसे जमा करने की संख्या या राशि पर कोई सीमा नहीं है। आप जितनी बार चाहें पैसा डाल सकते हैं।
निकासी (Withdrawals): RBI के निर्देशों के अनुसार, महीने में कम से कम 4 बार निकासी (ATM सहित) मुफ्त होनी चाहिए, लेकिन PNB के इस डेटा के अनुसार महीने में 6 निकासी (ATM सहित) मुफ्त दी जा रही हैं। इसके बाद बैंक नियमनुसार चार्ज ले सकता है।
चेक बुक: साल में 10 पन्नों की एक चेकबुक मुफ्त मिलती है, लेकिन इसके लिए शाखा प्रबंधक (Branch Manager) की अनुमति आवश्यक है।
ATM/Debit Card: कार्ड जारी करने का कोई शुल्क नहीं है, लेकिन इसका वार्षिक रखरखाव शुल्क (AMC) देना होगा।
4. परिचालन और पारदर्शिता (Operations & Transparency)
इनऑपरेटिव खातों पर राहत: यदि यह खाता निष्क्रिय (Inoperative) हो जाता है, तो इसे दोबारा चालू (Activate) करने के लिए बैंक कोई शुल्क नहीं लेगा। यह सामान्य बचत खातों से अलग है जहाँ चार्जेस लग सकते हैं।
प्रचार और सूचना: बैंकों के लिए यह अनिवार्य है कि वे अपनी सभी शाखाओं में इस खाते की उपलब्धता का प्रमुखता से प्रदर्शन (Display) करें ताकि ग्राहक इसके बारे में जान सकें।
KYC अनुपालन: भले ही यह एक बेसिक खाता है, लेकिन इसमें KYC (Know Your Customer) और AML (Anti-Money Laundering) के सभी नियमों का पालन करना अनिवार्य है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण शॉर्ट फॉर्म्स (Key Terms)
BSBDA: Basic Saving Bank Deposit Account
QAB: Quarterly Average Balance (इसमें यह 'Nil' होता है)
AMC: Annual Maintenance Charge
KYC: Know Your Customer
AML: Anti-Money Laundering
गहराई से विश्लेषण (Expert Insight):
BSBDA खाता मुख्य रूप से 'फाइनेंशियल इंक्लूजन' (वित्तीय समावेशन) के लिए है। बैंक इसमें न्यूनतम बैलेंस का दबाव नहीं डालता, इसीलिए वह इस पर अन्य बचत खातों की तुलना में ज्यादा पाबंदियां लगाता है (जैसे दूसरा खाता न खोल पाना)। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जिनका लेनदेन कम है और जो बिना किसी पेनल्टी के अपना पैसा सुरक्षित रखना चाहते हैं।
PNB Grow (नाबालिगों/बच्चों के लिए) और PNB Rise (युवाओं के लिए)। ये दोनों स्कीम्स ग्राहकों की उम्र के हिसाब से बैंक के साथ उनके रिश्ते को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।
आइए इन दोनों को गहराई से समझते हैं:
1. PNB Grow Savings Scheme: बच्चों और किशोरों के लिए
यह स्कीम बच्चों में बचत की आदत डालने के लिए है।
पात्रता: किसी भी उम्र का नाबालिग अपने माता-पिता/अभिभावक के जरिए खाता खोल सकता है। 10 साल से बड़े बच्चे इसे स्वयं (Independently) चला सकते हैं।
अभिभावक की शर्त: अभिभावक (Guardian) का PNB में पहले से बचत खाता होना अनिवार्य है।
डेबिट कार्ड और सीमा: इन्हें 'Grow Debit Card' मिलता है। सुरक्षा के लिहाज से इसकी सीमा कम रखी गई है (ATM और POS दोनों ₹10,000 प्रतिदिन)।
बर्थडे बोनस: बच्चे के जन्मदिन पर 400 रिवॉर्ड पॉइंट्स मिलते हैं (₹100 का वाउचर)।
ट्रांज़िशन: जैसे ही बच्चा 18 साल का होता है, यह खाता अपने आप PNB Rise स्कीम में बदल जाता है।
2. PNB Rise Savings Scheme: युवाओं (Gen-Z) के लिए
यह 18 से 28 वर्ष के युवाओं के लिए एक हाई-फीचर वाला खाता है।
उम्र की सीमा: 18-28 वर्ष में खुलता है और 30 वर्ष की आयु तक इसके लाभ मिलते हैं।
ज़ीरो बैलेंस: इसमें कोई न्यूनतम बैलेंस रखने की मजबूरी नहीं है।
विशाल कार्ड लिमिट: इस स्कीम का सबसे बड़ा आकर्षण इसकी डेबिट कार्ड लिमिट है। ATM से ₹1 लाख और शॉपिंग (POS/eCom) के लिए ₹3 लाख प्रतिदिन।
शिक्षा और करियर: * PNB सरस्वती और प्रतिभा (Education Loans) योजनाओं के तहत प्रोसेसिंग और डॉक्यूमेंटेशन फीस पूरी तरह माफ है।
डीमैट खाता (Demat A/C) का सालाना चार्ज (AMC) माफ है यदि होल्डिंग ₹4 लाख तक है।
रिवॉर्ड्स और माइलस्टोन: जन्मदिन पर ₹250 का वाउचर। इसके अलावा ₹2.5 लाख और ₹4 लाख के खर्च पर अतिरिक्त वाउचर मिलते हैं।
कस्टमाइज्ड अकाउंट नंबर: युवा अपनी पसंद का अकाउंट नंबर (उपलब्धता के आधार पर) चुन सकते हैं।
3. तुलनात्मक विश्लेषण (Deep Analysis)
| फीचर | PNB Grow (बच्चे) | PNB Rise (युवा) |
| चेक बुक | 25 पन्ने साल में फ्री | अनलिमिटेड फ्री |
| डेबिट कार्ड AMC | ₹250 + GST (शर्तों के साथ फ्री) | ₹375 + GST (खर्च के आधार पर छूट) |
| SMS/Statement | पूरी तरह फ्री | पूरी तरह फ्री |
| ऑनलाइन बैंकिंग | NEFT/RTGS फ्री | NEFT/RTGS फ्री |
| DD (डिमांड ड्राफ्ट) | जारी करना फ्री | जारी करना फ्री |
4. महत्वपूर्ण नियम (The Fine Print)
उम्र का मोड़ (Age 30): यह सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है। जैसे ही ग्राहक 30 वर्ष का होता है, 'Rise' स्कीम के सभी विशेष लाभ (जैसे अनलिमिटेड चेकबुक, फ्री शिक्षा ऋण शुल्क) वापस ले लिए जाते हैं और खाता सामान्य बचत खाते (SBGEN) में बदल जाता है।
KYC फ्रीज: 18 वर्ष का होने पर खाते को तब तक फ्रीज रखा जाता है जब तक कि ग्राहक अपना नया KYC (नाबालिग से बालिग में परिवर्तन) पूरा नहीं कर लेता।
Grow Card का अंत: 18 साल के बाद पुराना 'Grow' कार्ड काम करना बंद कर देता है और उसकी जगह 'Rise' कार्ड लेना होता है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण (Short Names & Values)
MPG: Minor PNB Grow (डेबिट कार्ड कोड)
MPR: Minor PNB Rise (डेबिट कार्ड कोड)
Threshold for Free AMC: Rise कार्ड के लिए ₹50,000 सालाना खर्च या ₹10,000 औसत बैलेंस।
Loyalty Points: 1000 पॉइंट्स = ₹250 का मूल्य।
गहराई से समझें (Expert View):
PNB Rise स्कीम विशेष रूप से उन छात्रों के लिए बेहतरीन है जो उच्च शिक्षा के लिए लोन लेना चाहते हैं, क्योंकि प्रोसेसिंग फीस की बचत ₹5,000 से ₹10,000 तक हो सकती है। वहीं 'Grow' स्कीम अभिभावकों को बच्चों के खर्चों पर नियंत्रण (कम कार्ड लिमिट के जरिए) रखने की सुविधा देती है।